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Jharkhand Khabar – Home Page झारखण्ड के ख़बरों के पीछे की सच्चाई

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( Jharkhand Khabar ) मीडिया बुर्जुआ वर्ग के वैचारिक-राजनीतिक वर्चस्व का साधन होने के साथ ही अपनेआप में एक व्यवसाय है, एक उद्योग है जिसमें पूँजी लगाकर कॉरपोरेट घराने प्रबन्धकों व शीर्ष बुध्दिजीवियों को अच्छी सुविधाएँ (निचोड़े गये अधिशेष में से हिस्सा) देकर उनकी मदद से नीचे के कर्मचारियों-मज़दूरों के मानसिक-शारीरिक श्रम के दोहन का काम करते हैं। इसके अतिरिक्त मीडिया की तीसरी भूमिका है कम्पनियों और उनके उत्पादित मालों का विज्ञापन छापकर प्रचार करने की।

( Jharkhand Khabar ) इसके बिना पूँजीवादी बाज़ार चल ही नहीं सकता। नवउदारवाद के दौर में यह तीसरी भूमिका अत्यधिक अहम हो गयी है, लेकिन हर समय में बुर्जुआ मीडिया तीनों काम करता है; पहला, बुर्जुआ शासन और सामाजिक ढाँचे के पक्ष में जनमानस तैयार करना, दूसरा, एक उद्योग के रूप में मुनाफा कमाना, और तीसरा, बाज़ार तन्त्र की मशीनरी में उत्पादों का प्रचार करके बिक्री बढ़ाने के नाते अहम भूमिका निभाना। जिस मीडिया जगत में मालिकों के कुल राजस्व का 80 से लेकर 100 प्रतिशत तक विज्ञापनों से आता है और जहाँ सभी बड़े खिलाड़ी कॉरपोरेट घराने हैं, वहाँ पत्रकारों की स्वतन्त्रता की बात सोचना ही बेमानी है।

( Jharkhand Khabar ) आलोचना की पूँजीवादी जनवादी स्वतन्त्रता वहीं तक है जहाँ तक व्यवस्था की वैधता पर सवाल न उठ खड़े हों और बुराइयों-कमज़ोरियों को सुधारने में मदद मिलती रहे। लेकिन संकट के दौरों में जब कॉरपोरेट युध्द तेज़ हो जाता है तो अलग-अलग घराने एक-दूसरे पर चोट करते हुए विरोधी की सेवा में सन्नद्ध भाड़े के कलमघसीटों का और अख़बारों-चैनलों का भी असली चेहरा नंगा करने लगते हैं और इस प्रक्रिया में पूरा बुर्जुआ मीडिया ही नंगा हो जाता है जैसा कि अभी हुआ है। व्यवस्था के अन्तरविरोधों की उग्रता के चलते, जब भी ऐसा होता है तो बुर्जुआ वर्ग के घुटे-घुटाये सिध्दान्तकार आगे आते हैं और ‘डैमेज कण्ट्रोल’ और साख-बहाली के काम में लग जाते हैं जैसा कि अभी हो रहा है।

जनतन्त्र का यह भद्दा-नंगा ड्रामा तब वीभत्सता की हदों को पार कर जाता है, जब नवउदारवाद के पैरोकार अकादमिक जगत के लोग और ”जनमत-निर्माता” अख़बारी कलम-घसीट और टीवी चैनलों के बकबकिये 10 या 20 वर्षों में भारत के’ग्लोबल पॉवर’ बन जाने की घोषणा करते हैं, विश्वस्तरीय सुविधाओं वाले पाँच सितारा अस्पतालों-स्कूलों-होटलों और महँगी गाड़ियों-ए.सी.-फ्रिज-टीवी-कम्प्यूटर-इण्टरनेट-मोबाइल आदि के तेज़ी से बढ़ते बाज़ार के हवाले देते हैं और इस महागाथा के हाशिये पर भी यह चर्चा नहीं होती कि इस उभरती वैश्विक ताकत के पास इस सदी के मध्‍य तक कुपोषित, विकलांग और अशिक्षित बच्चों की सबसे बड़ी संख्या होगी। हमारे देश का मध्‍यवर्गीय अभिजन समाज इसी नये मीडिया की ख़ुराक पर पलने वाला जीव है और मीडिया से परावर्तित हो रही अपनी ही ग्लैमरस छवि से चुँधियाया हुआ है। आसपास के अंधेरे के पर्दे में छुपी सच्चाई को उजागर करना Jharkhand Khabar का परम लक्ष है।

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