हेमंत सोरेन एक ऐसे सीएम हैं जो महिला अधिकारों के लिए लड़ पूरे झारखंड और देश में होते जा रहे हैं लोकप्रिय

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केंद्र

रांची। देश और राज्य में जब कोरोना अपने पीक पर था (यानी मई 2020), तो जाने माने मैगजीन फेम इंडिया और एशिया पोस्ट ने 2020 का एक सर्वे जारी किया था। यह सर्वे देश के 50 प्रभावशाली भारतीयों की स्थिति को लेकर था। इसमें कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री का नाम भी शामिल थे। जिसमें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (स्थान 13वें) और दिल्ली के अरविंद केजरीवाल (स्थान 14वें) जैसे शख्सियत शामिल थे। इनके बावजूद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में रहे। उन्हें 12वां स्थान मिला था। हेमंत को यह उपलब्धि कोरोना काल में अपने केवल साढ़े चार माह के कार्यकाल में किये कामों से मिला। लेकिन संक्रमण के इस समय में हेमंत सोरेन ने जिस एक काम को काफी तरजीह दी, उससे वे पूरे झारखंड और देश में लोकप्रिय होते जा रहे हैं। इसमें सबसे प्रमुखता से महिलाओं के उत्थान और उनके अधिकारों के लिए हेमंत की लड़ाई शामिल हैं। 

मुख्यमंत्री बनने से पहले ही महिलाओं के आर्थिक व सामाजिक सशक्तिकरण का लेकर गंभीर रहे हैं हेमंत

ऐसा नहीं हैं कि मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने सत्ता मिलने के बाद ही महिलाओं के आर्थिक व सामाजिक सशक्तिकरण को तरजीह दी है। जब वे विपक्ष के नेता थे, उन्होंने पांच साल महिला उत्थान को अपनी प्राथमिकता दी थी। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले उनकी पार्टी जेएमएम ने झारखंडी जनता के समक्ष जो चुनावी वादा किया था,  उसमें महिला सशक्तिकरण प्रमुखता से शामिल था। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने अपने इस लक्ष्य को तरजीह दी। वैसे तो उनके कामों को जोड़ा जाए, तो बताना मुश्किल हो जाए, लेकिन कुछ चुनिंदा कामों को हम यहां बता रहे है। 

छात्राओं के बीच बांटा नियुक्ति पत्र :  

बीते 30 सितंबर को हेमंत सोरेन ने राज्य की 111 महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त कर इन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा। दरअसल सभी महिलाओं ने नर्सिंग का कोर्स किया हैं। इन्हें कल्याण विभाग के नर्सिंग कॉलेज में शिक्षा ली है। अब ये सभी देश के कई महानगरों सहित झारखंड के अस्पतालों में अपनी सेवाएं देगी। ऐसा कर हेमंत ने इन्हें आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। 

आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने बीते 29 सितंबर को ही तीन प्रमुखता योजनाओं की शुरूआत की। इसमें आजीविका संवर्धन हुनर अभियान, फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान और पलाश ब्रांड शामिल हैं। दरअसल इन योजनाओं को लाने के पीछे हेमंत की सोच यहीं हैं कि ग्रामीण क्षेत्र की वैसी महिलाएं, जो शराब, ह़ड़िया और दारू बेचकर आजीविका चलाती है, उन्हें समाज के मुख्यधारा में लाया जाए। 

तीन प्रमुखता योजनाओं की शुरूआत कर बनाया स्वालंबी

*महिला खिलाड़ियो कें उत्थान को दी तरजीह* 

महिला खिलाड़ियों के विकास के लिए भी हेमंत सोरेन ने पिछले कुछ माह में बड़े कामों को अंजाम दिया। इसमें 8 अक्टूबर को हेमंत ने राज्य गठन के बाद पहली बार जिला खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति की। दो जिलों में नियुक्ति होने वाले पदाधिकारियों में महिला शामिल थी। इसी तरह 18 अक्टूबर को कराटे में गोल्ड मेडलिस्ट विमला मुंडा की खराब स्थिति की जानकारी मिलते ही इसे गंभीरता से लिया। न केवल अपने खेल नीति से ऐसी महिला खिलाड़ियो के उत्थान का भरोसा दिलाया, बल्कि राज्य में ऐसी स्थिति बनाने का आश्वासन दिया, ताकि कोई भी महिला खिलाड़ियों की आर्थिक हालत खराब न हो।

तस्करी की शिकार महिलाओं के घऱ वापसी को बनाया आसान

हेमंत सोरेन ने वैसी महिलाओं पर भी जोर दिया, जो पिछले सरकार के दौरान विकास के झूठे दावे से परेशान दूसरे राज्यों में काम में जाने को विवश हुई थी। इसमें कई महिलाओं को तो तस्करी कर दूसरे राज्यों में काम के लिए ले जाया गया था।

• बीते 20 अक्टूबर को हेमंत की पहल पर तमिलनाडु से मुक्त करायी गयी राज्य की 22 लड़कियों को राजधानी में ही रोजगार मुहैया कराया गया। हेमंत का कहना था कि अगर कोरोना जैसी स्थिति राज्य में नहीं बनती, तो उन्हें शायद पता भी नहीं चलता कि आज झारखंडी महिलाओं की स्थिति क्या है। 

• इसी तरह से बीचे 22 अक्टूबर को ही हेमंत सोरेन ने मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त करायी झारखंड की 60 लड़कियों सहित दो लड़कों को दिल्ली से एयरलिफ्ट कराया। कोरोना काल में दिल्ली के विभिन्न इलाकों से मुक्त कराये गये सभी बच्चे को दिल्ली के 17 शेल्टर होम में रखा गया था। प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से घरेलू काम में लगवाने को लेकर एक मोटी रकम लेकर दलालों ने इन्हें बेच दिया था। इनमें ज्यादातर साहिबगंज जिले के हैं। इन्हें कई शारीरिक और मानसिक यातनाएं भी सहनी पड़ रही थीं।

सरकारी नौकरी में 50 फीसदी आरक्षण का संकेत

बीते 8 मार्च को हेमंत सोरेन ने महिलाओं को सरकारी नौकरी में 50 फीसदी आरक्षण देने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार का सशक्त कदम होगा। आगे होने वाले नियुक्तियों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने पर सरकार विचार कर रही है। हालांकि कोरोना के आने से यह योजना थोड़ा धीरे हो गयी। लेकिन हेमंत का यह आश्वासन साफ बताता हैं कि भविष्य में सरकार अपनी इस योजना को पूरा करेगी।

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