जान बचाने वालों को

हेमन्त सरकार पेश की मानवता की मिसाल, जान बचाने वालों को इनाम दे करेगी सम्मान

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हेमन्त सरकार सड़क दुर्घटनाओं के घायलों को अस्पताल पहुंचा जान बचाने वालों को राज्य सरकार प्रोत्साहन के तौर पर देगी 2000 से 5000 इनामी राशि

झारखण्ड की हेमंत सराकर जन सेवार्थ में विकास कार्यों को गति देने के साथ, समाज में मानवता के बीजारोपण के मद्धेनाजर असहायों की जान बचाने वालों को प्रोत्साहित कर पेश कर रही है मिसाल। झारखंड के मुखिया हेमन्त सोरेन राज्य में ज़रूरतमंदों की सेवा में तत्पर दीखते है। ज्ञात हो कि सड़क दुर्घटना के घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने वाले को इनाम देने की घोषणा की है। जो ने केवल कई जाने बचाएगी, राज्य में मानवता की भावना के प्रति भी लोगों में जागरूकता लाएगी।

सड़क दुर्घटनाओं के घायलों को अस्पताल पहुंचाने वालों को राज्य सरकार देगी 2000 से 5000 इनामी राशि

राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के घायलों के मददगारों को राज्य सरकार दो हजार से लेकर पांच हजार रुपए राशि इनाम के तौर पर देगी।

  • घायल को एक व्यक्ति अस्पताल तक पहुँचाता है तो उसे तत्काल अस्पताल प्रबंधन से 2000/- की राशि इनाम के तौर पर मिलेगी। 
  • यदि दो व्यक्ति मिल कर घायल को अस्पताल तक पहुँचाते हैं, तो उन दोनों मददगारों को तत्काल अस्पताल प्रबंधन से दो-दो हजार की राशि इनाम के तौर पर मिलेगी। 
  • यदि दो से अधिक लोग घायल को अस्पताल तक पहुंचाते हैं, तो उसे मददगार का समूह मानते हुए, उस समूह को 5000/- की राशि इनाम के तौर पर मिलेगी। 

देश में पहली बार है जहाँ मानवता के मिसाल पेश करते हुए हेमन्त सरकार ने घायलों के मददगारों को पांच हजार रुपए की राशि देने का साहसिक फैसला लिया है। हालांकि, हेमंत सरकार की तुलना में राज्य की पिछली भाजपा सत्ता में ऐसी मानवीय पहलू कभी नहीं दिखी। दूसरे राज्यों की तुलना में भी यह इनामी राशि बड़ी है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार व यूपी सरकार घायलों के मामले इनामी राशि देने की प्रक्रिया अपनाई है, लेकिन यह राशि हल मामले दो हजार रुपए है।

ज्ञात हो कि हेमन्त सरकार का मानवीय पहलू की मिशाल कोई नया नहीं है। कोरोनाकाल के दौर में जब भी झारखंडी बेटे-बेटियों ने अपने मुख्यमंत्री को पुकारा। वह हमेशा समय रहे उनकी मदद को उपस्थित हो गए। राज्य के प्रवासी मजदूरों कि कोरोना त्रासदी के हालत से कैसे जद्दोजहद घर वापस लाया गया, राज्य नहीं, पूरा देश जानता है। झारखंड के इस बेटे को मुख्यमंत्री के रूप में, कभी देर रात मोटरसाइकिल से राजधानी के सड़कों पर, कभी रेलवे स्टेशन पर, कभी सचिवालय में तो कभी राशन मुहैया कराने के कवायद करते देखा गया। झारखंड की सच्ची जनता इस सत्य को कभी नकार नहीं सकती…।

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