हेमंत सरकार ने झारखंड की गरीब जनता को 2021 में दिए 3 (तीन) तोहफे

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हेमंत सरकार के 2021 में दिए 3 (तीन) तोहफे
  1. नयी स्थानीय नीति
  2. सामान्य वर्ग के बच्चों को छात्रवृत्ति
  3. नीजि क्षेत्र में झारखंडियों को 75 प्रतिशत आरक्षण

तीसरे तोहफे में – मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रभार वाले स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग की सामान्य वर्ग के बच्चों को छात्रवृत्ति देने की तैयारी

रांची। साल 2021 के पहली सुबह के साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य के हर तबके के जनता को तोहफे से नवाज रही है। जिसकी संख्या अबतक तीन (3) हो चुकी है। ये तोहफे नयी स्थानीय नीति, निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत पद स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित और सामान्य वर्ग के बच्चों को छात्रवृत्ति देने जसे सामाजिक उत्थान से जुड़े हैं। पहले दो की घोषणा तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा चुनाव के ठीक पहले अपने चुनावी वादे के दौरान किया था। हालांकि, कोरोना संक्रमण ने प्रक्रिया को थामा जरुर, लेकिन युवा नेता हेमंत सोरेन अपने संकल्प की ओर क्रांतिकारी कदम बढ़ा चुके हैं। 

तीसरे तोहफे के रूप में सामान्य वर्ग के बच्चों को छात्रवृत्ति देने का मसौदा मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रभार वाले स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग द्वारा तैयार किया गया है। ज्ञात हो कि झारखंड के जुझारू शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो कोरोना को मात देने की लड़ाई में अस्वस्थ हो गए थे। ऐसे मे मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रभार में रहे इस विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में पेश करने की तैयारी पूरी जा चुकी है। विश्वास है कि हर तबके के हितैषी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल इस प्रस्ताव पर भी अपनी सहमति देंगे।

हेमंत मानते है कि पूर्व की स्थानीय नीति से झारखंड के आदिवासी- मूलवासी का भला नहीं हो सकता  

झारखंड का मूल निवासी कौन? आज तक झारखंड की राजनीति के लिए  महत्वपूर्ण लेकिन उलझा सवाल रहा है। पूर्व की रघुवर सरकार की थोपी गयी गड़बड़ियों से भरी स्थानीय नीति का भार झारखंडी आदिवासी-मूलवासियों के लिए असहनीय है। शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने के हाईकोर्ट के निर्णय इसका स्पष्ट उदाहरण हो सकता है। हालांकि, मुख्यमंत्री बनने से पहले ही जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष रहे हेमंत सोरेन कह चुके हैं कि स्थानीय नीति में कई गड़बड़ियाँ हैं जिसे बदलने की जरूरत है। 

स्थानीय नीति को त्रुटिपूर्ण बताते हुए नेता प्रतिपक्ष के नाते हेमंत सोरेन का आरोप था कि तत्कालीन नीति के आड़ में शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया में 70 फीसदी बाहरी लोगों को नौकरी दी गयी। और गरीब आदिवासियों एक मात्र आस उसकी ज़मीन को अधिग्रहित कर निजी कंपनियों को दिए गए। जो साफ़ संकेत देते हैं कि मौजूदा स्थानीय नीति से आदिवासियों का भला नहीं होने वाला। नतीजतन  झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी इस अन्याय के प्रति संकल्पित हो बदलने के पक्ष में हैं। और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का इस दिशा में बढ़ाया गया कदम उसी संकल्प का अक्स भर है। 

75 प्रतिशत आरक्षण झारखंडियों के हित में,  जिसका फायदा अन्य राज्यों के बजाय झारखंड जल्द उठाएगा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा निजी क्षेत्र में झारखंडियों को 75 प्रतिशत आरक्षण की पहल एक स्वागतयोग्य कदम है। भाजपा शासित हरियाणा राज्य में भी ऐसी पहल हुई है। चूँकि हरियाणा की तुलना में झारखंड काफी पिछड़ा राज्य है, इसलिए झारखंड में ऐसे नीति की नितांत जरूरत थी। रोज़गार के मद्देनज़र राज्य के भविष्य, युवाओं के पलायन को रोकने के लिए कोई ओर बेहतर क्रांतिकारी कदम नहीं हो सकता। यही कारण है कि राज्य बनने के बाद से ही निजी क्षेत्रों में झारखंडियों के लिए 90 प्रतिशत आरक्षण की मांग गंभीरता से उठायी जाती रही है। 

झारखंड में मूल-निवासी सदानों की जनसंख्या 65 प्रतिशत है और अनुसूचित जनजाति की 26 प्रतिशत है। दोनों की जनसंख्या झारखंडियों की आबादी का करीब 91 प्रतिशत है। ऐसे में मौजूदा सरकार का निजी क्षेत्रों में झारखंडियों को 75 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना, झारखंडी मूलवासियों के अधिकारों के संरक्षण के मातहत लाभकारी सिद्ध होगा। पलायन रूकने से युवाओं की प्रतिभा का राज्य के हित में उपयोग हो सकेगा, जिसका लाभ अब तक अन्य राज्य बंधुआ मजदूरी के भाव में उठाते आये हैं। 

मुख्यमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना के तहत सामान्य वर्ग के बच्चों को छात्रवृत्ति देने की तैयारी

झारखंड की  हेमंत सरकार का 2021 में, तीसरे तोहफे के रूप में, सामान्य वर्ग के बच्चों को छात्रवृत्ति देने की पहल सिद्ध करता है कि मौजूदा सरकार शिक्षा के मामले में भाजपा सत्ता की भाँती भेद-भाव नहीं करती। स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग द्वारा ‘मुख्यमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना’ के तहत यह दूरगामी परिणाम पर आधारित प्रस्ताव तैयार किया गया है। जिसमे सरकारी स्कूलों में पढने वाले पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक के सामान्य वर्ग के बच्चों को भी छात्रवृत्ति के तौर पर प्रति वर्ष न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1500 रुपये छात्रवृत्ति देने का लक्ष्य है। 

मसौदे ने अपनी तैयारी के आख़िरी चरण को पार कर लिया है अब इस प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए कैबिनेट भेजने की तैयारी है। ‘मुख्यमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना’ शुरू करने की घोषणा वर्ष 2020-21 के बजट में की गयी थी। राज्य में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए पहली बार इस तरह की योजना तैयार की गयी है। आशा है कि मानवीय मूल्यों पर आधारित इस प्रस्ताव को समर्थन मिलेगा और राज्य के तमाम गरीब अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा के अधिकार से जोड़ा जा सकेगा। जो राज्य के बच्चों का हक भी है…. 

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