जनआकांक्षाओं

हेमंत सरकार का जीरो टॉलरेंस नीति कर रही है भ्रष्टाचार पर सीधा वार

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जीरो टॉलरेंस नीति के मातहत 28 दिन भीतर गिर चुकी है कई भ्रष्ट सरकारी बाबूओं पर गाज 

रांची। झारखंड में हेमंत सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति भ्रष्टाचार पर नकेल कसने लगी है। हेमंत सरकार जीरो टॉलरेंस के मद्देनज़र भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐक्शन मोड में है। इस नीति के मातहत कुछ ही माह में, कई भ्रष्ट अफसरों को निलंबन, बर्ख़ास्तगी, मुकदमे व जांच जैसी सख्त कार्रवाई के दौर से गुजरना पद रहा है। इसमें अधिकारी से लेकर आईएएस रह चुके चेहरे भी शामिल हैं। 

जीरो टॉलरेंस के मद्देनजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भ्रष्टाचार के मामलों में कार्यवाही को तेज और त्वरित करने का निर्देश, निश्चित रूप से बतलाता है कि अब राज्य में भ्रष्ट नेता हो या भ्रष्ट अधिकारी, बख्शे नहीं जायेंगे। बीते दिनों देवघर जिले के दो पदाधिकारियों के निलंबन का आदेश, पुष्टि करता है कि अब राज्य में भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं होगा। ज्ञात हो कि हेमंत सरकार के 13 माह के कार्यकाल में कई भ्रष्ट अधिकारियों पर निरंतर गाज गिरना इसी कड़ी का हिस्सा है।

गोड्डा सांसद की पत्नी को मदद पहुंचाने के आरोप में देवघर जिला अवर निंबधक संस्पेड 

ज्ञात हो कि बीते दिनों मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने देवघर के जिला अवर निबंधक राहुल चौबे की निलंबन प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। राहुल चौबे पर जिले के देवीपुर अंचल में 31 एकड़ जमीन के निबंधन में नियमों की अवहेलना करने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है। देवघर जिला अवर निंबधक पर गोड्डा सासंद निशिकांत दूबे की पत्नी की कंपनी के नाम गलत रजिस्ट्री करने का आरोप है। 

लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड हुए देवघर सीओ 

ज्ञात हो कि इसी कड़ी में देवघर अंचल अधिकारी, अनिल कुमार सिंह के सस्पेंड प्रस्ताव को भी  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा स्वीकृति दी गयी थी। सीओ पर कार्यों में लापरवाही बरतने के साथ कई अन्य गंभीर आरोप है। जैसे:

  • राजस्व कार्यों में अनियमितता। 
  • देवघर अंचल में पिछले एक साल में हुए राजस्व संबंधी कार्यों की जांच समिति को सहयोग न करना।
  • बिना स्वीकृत अवकाश के अनाधिकृत तौर पर कार्यालय व मुख्यालय मर अनुपस्थित रहना।
  • उच्चाधिकारियों द्वारा दिए गए आदेश की अवहेलना व कर्तव्यहीनता।
  • आम जनों के प्रति असंवेदनशीलता एवं विधि व्यवस्था में निष्क्रियता।   

निलंबित आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता पर कार्रवाई के निर्देश 

महज एक बरस के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने कई उदाहरण पेश कर सिद्ध किया है कि वे भ्रष्टाचार पर सख्त हैं और अपने कदम कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटायेंगे। दो माह पहले ही उन्होंने, राज्यसभा चुनाव में गड़बड़ी करने के आरोप में निलंबित आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई शुरू का आदेश दिया है। इनके खिलाफ The Prevention Of Corruption Act, 1988 और IPC की धारा 120 (b) के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। 

ज्ञात हो कि आईपीएस अनुराग गुप्ता पर 2016 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान गड़बड़ी करने का आरोप लगा था। निर्वाचन आयोग की जांच और निर्देश के बाद 29 मार्च 2018 को रांची के जग्गनाथपुर थाना में गुप्ता के खिलाफ IPC की धारा 171 B और 171 C के तहत FIR दर्ज है। चुनाव आयोग ने FIR करने के अलावा ADG अनुराग गुप्ता के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई चलाने का भी निर्देश दिया था। मुख्यमंत्री ने इन्हें फरवरी 2019 को सस्पेंड किया था।

रिश्वत के आरोप वाले दो अधिकारियों को निलंबन के प्रस्ताव पर सहमति

मुख्यमंत्री ने ठेकेदार से रिश्वत लेने के आरोप में बुंडू प्रखंड के तत्कालीन बीडीओ और वर्तमान में निलंबित ललन कुमार को सेवा से बर्खास्त करने के प्रस्ताव सहमति दी थी। साथ ही ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत सिमडेगा के कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार को निलंबित करने के प्रस्ताव पर भी सहमति दी थी। 

माफियों से मिलीभगत कर 535 पेड़ कटवाने के आरोपी के खिलाफ FIR की अनुमति  

मुख्यमंत्री ने बीते माह पहले मेदिनीनगर वन प्रमंडल के कुंदरी प्रक्षेत्र के वन क्षेत्र पदाधिकारी जितेंद्र कुमार हाजरा के खिलाफ FIR दर्ज कराने की अनुमति दी थी। उनके खिलाफ माफियाओं की मिलीभगत से 15 हेक्टयर से ज्यादा वनभूमि से लगभग 535 पेड़ों का अवैध तरीके से काटने का आरोप है। 

कंप्यूटर सामग्रियों को खऱीदने में अनियमितता बरतने के आरोप में कई अधिकारी के खिलाफ FIR

इसी तरह धनबाद नगर निगम के पूर्व नगर आयुक्त मनोज कुमार, पूर्व उप नगर आयुक्त प्रदीप कुमार प्रसाद और अनिल कुमार यादव के खिलाफ अलग-अलग FIR दर्ज करने की अनुमति भी मुख्यमंत्री ने दी थी। इन तीनों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश मुख्यमंत्री ने दिया था। इनके खिलाफ ई-गवर्नेंस कार्यों के लिए कंप्यूटर सामग्रियों और अन्य उपकरणों की आपूर्ति में अनियमितता बरतने का आरोप है। 

एसीबी करेगी कई आरोपों की जांच 

कई गंभीर आरोपों में फंसे अधिकारियों के खिलाफ भी मुख्यमंत्री ने एसीबी को जांच करने का निर्देश दिया है। इसमें प्रमुखता से शामिल हैं।

  • दुमका के तत्कालीन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश ओम प्रकाश सिंह के खिलाफ दुमका नगर थाना में भारतीय वन अधिनियम-1927 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम –1988 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दर्ज मामले। 
  • निरंजन कुमार (इंडियन पोस्ट एंड टीसी एकाउंट्स एंड फाइनांस सर्विस) के खिलाफ गंभीर आरोप।
  • झारखण्ड राज्य सहकारी बैंक के रांची शाखा और सरायकेला शाखा में वित्तीय अनियमितता, राशि का गबन और दुरुपयोग मामले की जांच।
  • धनबाद नगर निगम में 14वें वित्त आयोग की योजना में लगभग 200 करोड़ रुपए के प्राक्कलन घोटाले की जांच।
  • देवघर प्रखंड स्थित मसनजोरा ग्राम पंचायत के मथुरापुर ग्राम में मनरेगा योजनाओं में बरती गई अनियमितता।

सीबीआई से जांच हस्तांतरित करने के प्रस्ताव की स्वीकृत 

ज्ञात हो कि गिरिडीह डिविजन के अंतर्गत गिरिडीह के प्रधान डाकघर और गिरिडीह टाउन उप डाकघर में जमा 11.64 करोड़ की फ़र्ज़ी निकासी की जांच के लिए सीबीआई को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव की स्वीकृति दे दी गयी है।

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This Post Has 2 Comments

  1. दीपक कुमार उपाध्याय

    माननीय मुख्यमंत्री जी,गिरिडीह के सीओ रविन्द्र कुमार सिन्हा झारखंड के सबसे बड़ा लूटेरा के ऊपर तो कोई कार्यवाई नहीं हुई।लगातार भ्रष्ट सीओ के खिलाफ सिकायत के बावजूद जाँच एजेंसियों,पदाधिकारियों का संरक्षण प्राप्त हुआ जिसमें सबों की संलिप्तता है,आग्रह है गिरिडीह सीओ के सम्पूर्ण कार्यकाल की जाँच कर संलिप्त सभी पदाधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई एवं संपति की जाँच करायें।

  2. दीपक कुमार उपाध्याय

    माननीय मुख्यमंत्री जी,गिरिडीह के सीओ रविन्द्र कुमार सिन्हा झारखंड के सबसे बड़ा भ्रष्ट एवं लूटेरा के ऊपर तो कोई कार्यवाई नहीं हुई।लगातार भ्रष्ट सीओ के खिलाफ सिकायत के बावजूद जाँच एजेंसियाँ ,पदाधिकारियों का संरक्षण प्राप्त हुआ जिसमें सबों की संलिप्तता है,आग्रह है गिरिडीह सीओ के सम्पूर्ण कार्यकाल की जाँच कर संलिप्त सभी पदाधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई एवं संपति की जाँच करायें।

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