झारखण्ड : हेमन्त सरकार डर से आगे जा राज्य में नयी व्यवस्था सुनश्चित करने के डगर बढ़ी 

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आम चुनाव से पहले भाजपा द्वारा चले गए आखिर दाव से हेमन्त सरकार ने मजबूती से निबटने का मन बनाया है. सरकार राज्य में नई व्यवस्था सुनिश्चित करने के डगर पर बढ़ चली है. सीएम की समझ – इस डर से आगे ही झारखण्ड की जीत 

रांची : इतिहास गवाह है कि वैचारिक बदलाव को लम्बे संघर्ष से गुजरना पड़ता है. क्योंकि पुरानी व्यवस्था आसानी से अपनी पकड़ नहीं छोड़ना चाहती. ऐसे में क्रान्ति का अंतिम चरण कठिनाई भरा होता है. लेकिन उसके पार ही नयी व्यवस्था की स्थाई जीत सुनिश्चित होती है. हमारे देश में भी महापुरुषों व विचारधारा को इस दौर से गुजरना पड़ा है. गौतम बुद्ध ने अंत में मारा को समाप्त किया तभी बौध बने, कृष्ण को भी कंश को मारना पड़ा था, कई उदाहरण हमारे समक्ष विद्यमान हैं. 

ऐसी ही कुछ तस्वीर झारखण्ड प्रदेश में देखी जा सकती है. ज्ञात हो, हेमन्त सोरेन के जुझारू संघर्ष के उपरान्त पहली बार राज्य में 14 बरस के भाजपा सत्ता व उसके जन विरोधियों नीतियों से, स्थायी तौर पर मूल जनता को राहत मिली है. लेकिन भाजपा जैसे बाहरी मानसिकता की बैसाखी पर खड़ी दल की जड़ें इस लम्बे काल खंड में काफी नीचे तक धस चुकी है. साथ ही, केंद्र में भी भाजपा की सत्ता है. मसलन, हेमन्त शासन के समक्ष शुरूआती दौर से ही उसके द्वारा कई कठिनाईयां उत्पन्न की गई है. लेकिन, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व हेमन्त सरकार ने हमेशा मुंहतोड़ जवाब दिया है. क्योंकि सीएम जानते हैं डर से आगे ही जीत है.

झारखण्ड में हेमन्त शासन की नीतियां भाजपा के कॉर्पोरेटिज्म प्रणाली से मेल नहीं खाती

हेमन्त शासन की नीतियां जनहित में होने के कारण भाजपा के कॉर्पोरेटिज्म प्रणाली से मेल नहीं खाते हैं. मसलन, भाजपा एक तरफ यह मानना नहीं चाहती कि उसकी ऐतिहासिक विरासत को प्रदेश में चुनौती मिली है. तो दूसरी तरफ पूर्व की कार्यप्रणालियों के अक्स में हुए घपले-घोटाले की जांच से बचने हेतु व सरकार के क़दमों को रोकने हेतु, विपक्ष के रूप में केन्द्रीय शक्तियों के प्रभाव से हेमन्त सरकार के समक्ष लगातार कठिनाईयां उतपन्न करती रही है. स्थिति यह हो चली है की भाजपा किसी भी सूरत में हेमन्त सरकार को सत्ता से दूर करना चाहती है.

मौजूदा दौर में भी ऐसी ही परिस्थितियों को उतपन्न कर राज्य में विकास की गतिविधियाँ धीमी करने का प्रयास हुआ है. मौजूदा मामले में दिलचस्प पहलू यह है कि एक तरफ केन्द्रीय भाजपा द्वारा दागी अधिकारियों के साथ राज्य सरकार को काम करने पर मजबूर किया गया. तो दूसरी तरफ अपने ही शासन में हुए घोटालों के आरोपी नेता-अधिकारी के खलाफ, ईडी कार्रवाई के आसरे हेमन्त सरकार से इस्तीफा मांगने से नहीं चुक रहे. आईटी सेल द्वारा भ्रामक प्रचार के माध्यम हेमन्त सरकार को बदनाम करने का प्रयास हुआ है.

भाजपा को देश के आम चुनाव में जाना है ऐसे में हेमन्त सरकार पर मजबूत वार कने का प्रयास किया है. लेकिन डर से आगे ही है जीत 

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि -चूँकि भाजपा को देश के आम चुनाव में जाना है. देश की गिरती अर्थव्यवस्था व बढती महंगाई के अक्स में उसका ग्राफ नवीनतम अस्तर पर है. और झारखण्ड जैसे प्रदेश से उसे चुनाव में मजबूत चुनौती मिल सकती है. मसलन, केन्द्रीय भाजपा ने अपने नेता – अधिकारी का बलि दे यह आखिरी दाव खेला है. लेकिन हेमन्त सरकार द्वरा उसके दाव के विरुद्ध मजबूती से खड़े हो पलट वार किया जाना भाजपा के मंसूबों पर पानी फेर दिया है. जिसकी झुंझलाहट भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के चेहरे पर साफ़ देखने को मिल रहा है.  

और ऐसे में कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी, विधायक सुदिव्य कुमार मुख्यमंत्री के पक्ष बयाना, जाता दिया है कि वह परिस्थिति से दो-चार करने के मूड में हैं. साथ ही यह भी जाता दिया है कि वह इस कठिनाई से उस पार जा राज्य में नयी व्यवस्था सुनिश्चित करेगी. इरफान अंसारी ने कहना कि कांग्रेस पार्टी बड़े भाई हेमन्त सोरेन व झामुमो के साथ है और भाजपा निर्वाचन आयोग के बहाने सत्ता में आने का सपना त्याग दे. इनका आशंका जताना कि भाजपा तंत्र का दुरुपयोग कर सकती है. भाजपा को निराश करने वाली खबर हो सकती है.

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