बिजली कटौती की धमकी बार-बार देना बंद करे डीवीसी : हेमंत सोरेन

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बिजली कटौती

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय विद्युत मंत्री राजकुमार सिंह के सामने डीवीसी को दो टुक कहा “ज़मीन, पानी, कोयला हमारा और हमें व हमारे उपभोक्ताओं को बिजली नहीं, बिजली कटौती की धमकी हमें बार-बार न दें।

केंद्रीय विद्युत मंत्री राजकुमार सिंह ने विद्युत संशोधन विधेयक पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश भर के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत की। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वार्ता में मसौदे पर आपत्ति जताई। उनकी दलील थी कि अधिनियम के मसौदे में पिछड़े राज्यों के बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुरक्षित की जानी चाहिए।

श्री सोरेन ने केंद्रीय मंत्री को याद दिलाया कि राज्य के अधिकांश लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। इसलिए उन्हें सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराना नितांत आवश्यक है। इसलिए, विद्युत नियामक आयोग के साथ क्रॉस सब्सिडी और सब्सिडी का प्रावधान सुरक्षित रखा जाना चाहिए। जिससे घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के टैरिफ निर्धारण किया जा सके। राष्ट्रीय टैरिफ नीति के तहत, टैरिफ का निर्धारण राज्य के अधिकारों का उल्लंघन होगा।

बिजली कटौती की धमकी देना बंद करे डीवीसी

मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने डीवीसी के मामले में बार-बार बिजली कटौती की धमकी देने पर अधिक जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि डीवीसी राज्य के सात जिलों को बिजली की आपूर्ति करता है, जो राज्य के औद्योगिक क्षेत्र हैं। लेकिन, बकाया राशि की बात कर घंटों बिजली बाधित कर देते हैं।

मुख्यमंत्री ने डीवीसी को याद दिलाया कि वे राज्य के भूमि, बिजली, पानी का उपयोग करते हैं। इसलिए, डीवीसी को बार-बार बिजली कटौती जैसे धमकी पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। क्योंकि जो बकाया है वह उनकी सरकार का नहीं बल्कि पिछली भाजपा सरकार का है। उन्होंने 2014 के अपने आंकड़े भी पेश किए और कहा कि तब भी उनकी सरकार का कोई बकाया नहीं है और अब भी। यदि बाज नहीं आता, तो राज्य सरकार भी कड़े निर्णय ले सकती है।

केंद्र अपनी नीतियों से गैर भाजपा शासित राज्यों को अस्थिर करना चाहती है

मसलन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आरोप युक्तिसंगत हो सकता है। केंद्र सरकार अपनी नीतियों से गैर भाजपा शासित राज्यों को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है। क्योंकि, केंद्र की कथनी-करनी में अंतर है। एक तरफ वह रेलवे के लिए कुछ घोषणाएँ करती है, तो दूसरी तरफ रेलवे के निजीकरण की भी बातें करती हैं।

उदाहरण के लिए, नयी विद्युत नीति नये स्वरूप में गैर भाजपा शासित राज्यों थोपना उन्हें अस्थिर करने का प्रयास नहीं तो और क्या हो सकता है। क्या नए नियमों से देश के संघीय ढांचे को ढहाने का प्रयास नहीं है। देश में जो सिस्टम चल रहा है, उसमे क्या बुराई है जिसे केंद्र खत्म करना चाहती है।

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