छात्र-छात्राओं की पढ़ाई

छात्र-छात्राओं की पढ़ाई से लेकर बच्चियों के जीविकोपार्जन में मदद मुहैय्या करने में आगे रहें हैं मुख्यमंत्री

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  • पढ़ाई के क्षेत्र में टॉपर को 3 लाख, तकनीकी शिक्षा लेने वाली गरीब छात्राओं को 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद देना प्रमुखता से हैं शामिल 
  • मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना के तहत आदिवासी छात्र-छात्राएं ले सकेंगे विदेशों में शिक्षा 
  • तस्करी की शिकार हुई 45 नाबालिग बच्चियों को व्यस्क होने तक जीविकोपार्जन के लिए मुख्यमंत्री दे रहे हैं 2000-2000 रुपये 

रांची. गरीबी के कारण झारखण्ड के कई बच्चें शिक्षा से वंचित होते जा रहे थे. राज्य गठन के बाद जितनी भी सरकारें आयी, केवल उत्थान का दावा किया. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और रही. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन सच्चाई भली-भांति जानते थे. नतीजतन, उन्होंने शुरूआती दौर से ही, झारखंडी बच्चों, छात्र-छात्राओं की बेहतर पढ़ाई सहित उनके जीविकोपार्जन के लिए आर्थिक मदद मुहैय्या कराने के रूप में काम शुरू किया. जो झारखंड के लिए नयी सोच बनी और अब कई महत्वाकांक्षी पहल के रूप में देखा जा सकता है. 

टॉपरों को आर्थिक मदद देकर पढ़ाई जारी रखने को प्रोत्साहित कर रहे हैं हेमन्त सोरेन 

पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए हेमन्त सरकार ने टॉपरों को आर्थिक मदद देने का फैसला किया है. राज्य सरकार ने टॉपर को 3 लाख रुपये आर्थिक मदद देने का फैसला लिया है. दिसम्बर 2020, स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार वितरण तथा मैट्रिक-इंटरमीडिएट के राज्यस्तरीय टॉपरों को नगद पुरस्कार सह प्रोत्साहन राशि वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा था कि मैट्रिक के टॉपर को 1 लाख, सेकेंड टॉपर को 75,000 एवं थर्ड टॉपर को 50,000 रुपये की मदद राज्य सरकार करेगी. वहीं इंटरमीडिएट के हर संकाय के टॉपर को 3 लाख, सेकेंड टॉपर को 2 लाख एवं थर्ड टॉपर को 1 लाख रुपये की मदद की जाएगी.

10 आदिवासी छात्र-छात्राएं सरकार के खर्च पर विदेशों में कर सकेंगे उच्च शिक्षा ग्रहण  

विदेशों में पढ़ाई की चाह रखने वाले आदिवासी छात्र-छात्राओं को आर्थिक मदद देने के लिए हेमंत सरकार ने योजना शुरू की है. योजना का नाम है ‘मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना’. योजना के तहत हर साल झारखण्ड के 10 आदिवासी छात्र-छात्राएं 22 विषयों में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए विदेश जा सकेंगे. चयनित 10 छात्र-छात्राओं को उच्चस्तरीय शिक्षा, मास्टर डिग्री, एमफिल के लिए राज्य सरकार की तरफ से छात्रवृत्ति दी जाएगी. सभी को जलवायु परिवर्तन, अर्थशास्त्र, विधि, पर्यटन, मीडिया एंड कम्युनिकेशन, मानव विज्ञान, कृषि, कला और संस्कृति समेत कुल 22 विषयों में एक और दो वर्ष के कोर्स या शोध के क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए आर्थिक मदद मिलेंगी. 

गरीब छात्राओं के शिक्षा में महंगी फीस बाधा ना बने – सरकार देगी 1 लाख की आर्थिक मदद 

राज्य की गरीब मेधावी छात्राओं को तकनीकी शिक्षा की पढ़ाई में उनकी आर्थिक स्थिति बाधक न हो, इसके लिए हेमन्त सरकार उन्हें 1 लाख रुपये आर्थिक मदद देगी. यह आर्थिक मदद राज्य के बाहर अथवा राज्य के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में एडमिशन लेने के बाद दी जाएगी. आर्थिक सहायता प्रदान करने संबंधी योजना के प्रस्ताव पर बीते दिनों ही मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दी है. श्री सोरेन का मानना है कि गरीब मेधावी छात्राओं को तकनीकी शिक्षा अर्जित करने में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बाधक न रहे, इसके लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता दिए जाने की कवायद की जा रही है. 

दो बच्चों की पढ़ाई के लिए सीएम ने लिया फैसला

सीएम द्वारा दो गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए भी अहम फैसला लिया गया था. फैसले के तहत 2019 में झारखण्ड इंटरमीडिएट की परीक्षा में घाघरा प्रखंड की अमीषा कुमारी को आर्थिक मदद नहीं मिलने से पढ़ाई बाधित हो रही थी. मामला प्रकाश में आते ही सीएम द्वारा संज्ञान लिया गया. गुमला डीसी को ट्वीट कर अमीषा की पढ़ाई में मदद करने का निर्देश दिया गया और बच्ची आगे की पढ़ाई जारी रखने में सक्षम हो सकी. ज्ञात हो, तस्करी से मुक्त कराये गये राजमहल, सुंदरपहाड़ी निवासी एक नौंवी कक्षा के बच्चे की पढ़ाई का खर्च वहन करने का जिम्मा भी हेमन्त सोरेन ने उठाया है. बच्चे की पढ़ाई में राजमहल सांसद विजय हांसदा भी सहयोग कर रहे हैं. 

बच्चियों को 2000-2000 रुपये की आर्थिक मदद देने का फैसला

बीते साल नवंबर में तस्करी से मुक्त हुए 45 नाबालिग बच्चियों के साथ सीएम ने मुलाकात किया था. और उनके भविष्य के सम्बन्ध में बड़ा फैसला लिया था. ज्ञात हो, सीएम ने वयस्क होने तक सभी 45 बच्चियों को प्रतिमाह 2000-2000 रुपये भत्ता देने देने की शुरुआत की है. उन्होंने कहा था कि मुक्त होने वाली सभी बच्चियों को राज्य सरकार रोजगार से जोड़ेगी, ताकि वे  आत्मनिर्भर बन सके.

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