अग्निपथ : शुक्रवार-जुम्मा, देश जलता रहा, सीएम हेमन्त ही अपने राज्य को शांत रखने में हुए सफल

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अग्निपथ : झारखण्ड की शांति जहां राज्य के युवाओं की वैचारिक सोच को परिभाषित करती है तो वहीँ हेमन्त शासन के लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता भी दर्शाती है. नतीजतन,  शुक्रवार-जुम्मा को केवल सीएम हेमन्त ही अपने राज्य को शांत रखने में हुए सफल.

रांची : जुम्मा! यानी शुक्रवार को अग्निपथ योजना के विरुद्ध देश में हालात बेकाबू रहे. युवाओं की नाराज़गी दूसरे दिन भी देश भर में भयावह रूप लेती रही. युवाओं का आक्रोश चरम पर रही. लेकिन पहले दिन की हिंसा के बाद भी पुलिस व्यवस्था गंभीर नहीं दिखी. नतीजतन, प्रदर्शन की व्यापकता में देश में पुलिस बल कम नज़र आयी. देश धुधक-धुधक कर जलने को मजबूर था. और केंद्र सरकार युवाओं से बात करने के बजाय अग्निपथ योजना के बचाव में ज़ोर लगाती रही. जिसके कारण इसके विरोध में देश के युवा और उग्र हुए. 

लेकिन, देश में झारखण्ड एक ऐसा राज्य भी रहा, जहाँ युवाओं में योजना के प्रति आक्रोश होते हुए शान्ति कायम रही. ज्ञात हो, शुक्रवार (जुम्मा) के दिन किसी अप्रिय घटना की सम्भावना सिरे से ख़ारिज हुई. मुख्यमंत्री के आह्वान पर युवा भी शांत रहे और पुलिस व्यवस्था भी चाक चौबंद रही. हालांकि, इस सफलता पर भी भाजपा आइडियोलॉजी राजनीती से परे, हेमन्त सरकार की पीठ थपथपाने की हिम्मत नहीं जुटा पायी. झारखण्ड की शांति व्यवस्था जहाँ एक तरफ युवाओं की वैचारिक सोच को परिभाषित करती है तो वहीँ हेमन्त सरकार के शासन के प्रति लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से दर्शाती है.

झारखण्ड के गरीब-बहुजन युवा को हेमन्त सरकार की नीतियों पर भरोसा 

ज्ञात हो, जहाँ एक तरफ देश भर में प्रशासनिक सेवा की नियुक्तियों को सुनियोजित समझ के तहत रोका गया है या अधर में लटकाया गया, तो वहीं हेमन्त सरकार में जेपीएससी परीक्षा को समय पर संपादित कर, 01 जून 2022, की तारीख को ऐतिहासिक बनाते हुए, 32 साल, लगभग तीन दशक के बाद, नियमावली दुरुस्तीकरण करते हुए कृषि सेवा में 129 पदाधिकारियों की नियुक्ति करना, साथ ही इस प्रक्रिया को एक शुरुआत बताते हुए 1047 पदों पर नियुक्ति जल्द करने का एलान किया जाना और हजारों नियुक्तियों के विज्ञापन भी जल्द निकलने की कवायद, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत 3976 युवाओं को मिले 59.61 करोड़ ऋण, युवाओं में भरोसे को जन्म दिया हैं. 

झारखण्ड राज्य के युवा अब अज्ञानी नहीं रहे जिसे कोई भटकाने वाली आइडियोलॉजी अपने हिडन एजेंडों के आड़ में ढपोरशंखी वादा के तहत ठग सके. नतीजतन, राज्य के बहुसंख्यक गरीब व बहुजन युवाओं को हेमन्त सरकार की नीतियों पर भरोसा हो चला है. राज्य के युवाओं को विश्वास है कि सरकार स्वयं उनकी लड़ाई संवैधानिक लकीरों के तहत लडेगी. जिसका स्पष्ट उदाहरण देश ने शुक्रवार को राज्य की शांति व्यवस्था के रूप में देखा. मसलन, तमाम सुनियोजित षड्यंत्रों के बीच हेमन्त सरकार का एक सफल युवा खेवनहार के रूप में सामने आना स्पष्ट रूप से झारखण्ड में भाजपा आइडियोलॉजी की हार को दर्शाता है.

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