झारखण्ड : देश में महंगाई पर सीएम के स्पष्ट बोल – लोगों को भूखों मरने को होना पड़ेगा तैयार

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झारखण्ड : देश मेंमहंगाई पर फैसले लेने बजाय केन्द्र का आम चुनाव की तैयारी में राज्य सरकारों पर शिकंजा कसने का कुप्रयास. प्रोपोगेन्डा में प्रदेश भाजपा भी भागीदार. 10 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में सफाईकर्मी के साथ हुए अमानवता पर आंसूं नहीं दिए गए कार्रवाई के आदेश

राँची ; झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन केन्द्रीय सत्ता के नीतियों के अक्स में, देश में कीर्तिमानों को लाँघ चुकी महंगाई पर न केवल लगातार सवाल उठा रहे है, देश में इससे उत्पन्न विभीषिका पर भी प्रकाश डाल रहे हैं. ज्ञात हो बजट सत्र के दौरान भी मुख्यमंत्री द्वारा महिला सशक्तिकरण के राहों में महंगाई से उत्पन्न समस्याओं पर प्रकाश डाला गया था. उनके द्वारा झारखण्ड जैसे गरीबी राज्य में भयावह रूप ले चुके कुपोषण के रोक-थाम में राज्य सरकार के प्रयासों पर महंगाई के असर पर ध्यान केन्द्रित कराया गया था. 

मौजूदा दौर में भी सीएम द्वारा बढ़ती महंगाई समस्या पर स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि वर्ष 1998-99 के बाद शायद देश में सबसे अधिक महंगाई बढ़ी है. देश में स्थिति यह हो चली है कि लोगों को अब भूखों मरने के लिए तैयार होना होगा. ज्ञात हो, विडंबना है कि केन्द्र बढ़ती देश में महंगाई पर लगाम लगाने के बजाय, आगामी आम चुनाव की तैयारी के मद्देनज़र राज्य सरकारों पर शिकंजा कसने के प्रयास में दिखते है. जिससे इक्के-दुक्के राज्यों में महंगाई समेत अन्य जन विरोधी नीतियों के विरुद्ध उठते आवाज़ दबाया जा सके. प्रोपोगेनाडा में प्रदेश भाजपा भी बराबर के भागीदार है और भाजपा नेता वाहक.  

भाजपा ने पिछले 20-22 वर्षों में इतना खा लिया है कि इन्हें अब हो गया है अपचसीएम 

ज्ञात हो, झारखण्ड में केन्द्र के जन विरोधी नीतियों व् महंगाई के विरुद्ध उठते आवाज को दबाने के प्रयास में, धन-बल के प्रभाव में भाजपा अपने कार्यकर्ताओं-अंधभक्तों के माध्यम से राज्य की शांति भंग कने का प्रयास हो रहा है, सड़कों पर हो-हल्ला मचाया जा रहा है. आरोप और हाईकोर्ट में सुनवाई के सवाल पर सीएम हेमन्त सोरेन द्वारा भाजपा प्र तंज कसते हुए कहा गया कि भाजपा ने पिछले 20-22 वर्षों में इतना खा लिया है कि इनको अब अपच हो गया है. और उसे पचाने के लिए इन्हें सड़क पर उतरना पड़ रहा है. 

ज्ञात हो, सफाई कर्मी को थप्पड़ मारने के मामले में मुख्यमंत्री द्वारा नामकुम के अंचलाधिकारी पर कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं. मुख्यमंत्री द्वारा कहा गया है कि अगर कोई अधिकारी अपने कर्तव्य से विमुख होकर काम करता है, तो उसके किलाफ कार्रवाई की जाएगी; मसलन, देश में पिछले 10 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में किसी सफाईकर्मी के साथ हुए अमानवीय व्यवहार पर किसी संविधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा मगरमच्छ के आंसू नहीं बहाए गए बल्कि कार्रवाई के आदेश दिए गए है. जो लोकतंत्र के लिए राहत की खबर हो सकती है. 

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