कोरोना व केंद्र के भेदभाव के बीच वादों को पूरा करना हेमंत के लिए नहीं था आसान

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देश भर के मजदूरों

कोरोना संकट व केंद्र के भेदभाव के बीच भ्रष्टाचार, रोजगार, मुफ्त बिजली सहित कई वादों को पूरा कर हेमंत ने पेश की नेतृत्व का मिशाल 

रांची। विधानसभा चुनाव में में हेमंत सोरेन ने राज्य की जनता से कुछ वादे किये थे। झारखंडी जनता ने भी इस युवा नेता के वादों पर भरोसा किया और चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता की चाबी सौंपी। मुख्यमंत्री बनने के बाद हेमंत सोरेन जनता से किये वादों के तरफ बढ़े ही थे कि कोरोना महामारी ने देश-दुनिया के साथ झारखंड राज्य को भी अपने जद में ले लिया। लेकिन वह न घबराएं और न कभी समस्या को एक्ट ऑफ़ गॉड कहा। बल्कि एक सच्चे झारखंडी की महान पारम्पर को निभाते हुए समस्याओं के आगे डट कर खड़ा हो गए।

रघुवर सरकार के कारिस्तानियों के कारण खाली हुए सरकारी खजाने का असर झारखंड के विकास पर पड़ना स्वाभाविक था। ऊपर से केंद्र ने इस वैश्विक संकट के दौर में भी झारखंड के साथ भेदभाव नीति अपनायी। हेमंत केंद्र से राज्य का हक मांग रहे थे, लेकिन केंद्र ठीक उलट मदद की जगह डीवीसी जैसे संस्थाओं के बकाये नाम पर करोड़ रूपये काट कर झारखंडी जनता के प्रति अपनी संवेदनाओं कोा परिचय दे रही थी। तमाम घटनाक्रमों के बावजूद हेमंत सोरेन राज्य की जनता से किये अपने किये वादों के तरफ अपनी विशेष नेतृत्व पद्धति के बल पर बढ़ते रहे। और इतिहास लिखे …      

365 दिन और रोजगार सृजन की पहल

अपने 365 दिनों के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने रोजगार सृजन की दिशा में कई बड़ी पहल किये। बिरसा हरित ग्राम योजना, नीलाम्बर-पीताम्बर जल समृद्धि योजना, पोटो हो खेल विकास योजना, शहरी अकुशल श्रमिकों के लिए एक वित्त वर्ष में 100 दिनों के रोजगार गारंटी की मुख्यमंत्री श्रमिक योजना, आजीविका संवर्धन हुनर अभियान, फूलो-झानो आशीर्वाद योजना, सखी मंडल की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को पलाश ब्रांड के तहत बाजार से जोड़ने की पहल रोज़गार सृजन की योजनाओं में शामिल हैं। 

संविदाकर्मियों के लिए कमिटी और 75 प्रतिशत आरक्षण का वादा

विभिन्न विभागों व कार्यालयों में अनुबंध/संविदा पर कार्यरत कर्मियों के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता एक उच्च स्तरीय समिटी का गठन किया गया। समिति ऐसे कर्मियों और उनके कार्यों से संबंधित सेवा शर्तों, अवधि और मानदेय की राशि आदि पर एकरूपता तय करने के लिए अपने राय देगी। निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत आरक्षण के लिए सभी विभागों को मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया।  

क्षेत्रीय भाषाओं को संविधान में जोड़ने की पहल

मुख्यमंत्री ने “हो” जनजाति भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का वादा किया था। इस बाबत हेमंत ने केंद्रीय गृह मंत्री को एक पत्र भी लिखा। पत्र की विशेषता यह थी कि “हो” के साथ अन्य दो प्रमुख जनजातीय भाषाओं “मुंडारी” और “उरांव/कुडूख” को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग हुई। सीएम इन तीन भाषाओं को संथाली भाषा की तरह ही विकसित करना चाहते हैं।

100 यूनिट बिजली मुफ्त देने का वादा

चुनावी वादों में राज्य की गरीब जनता को 100 यूनिट तक की बिजली मुफ्त देने की भी बात की गयी थी। हेमंत ने इस दिशा में भी कदम बढ़ाया। बजट में इसके लिए करोड़ की राशि भी आवंटित की गयी। हेमंत के निर्देश के बाद ऊर्जा विभाग अंतर्गत इस दिशा में प्रस्ताव की तैयारी की जा रही है।

हेमंत ने बेरोज़गारी भत्ता की दिशा में बढ़ा कदम

बेरोज़गारी भत्ता देने की दिशा में हेमंत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि पूरे राज्य में जिला से लेकर प्रखंड तक रोज़गार कार्यालय को तत्काल ही सक्रिय करें। ऐसा करने के बाद 16 वर्ष से अधिक वर्ष के रोज़गार तलाश रहे युवाओं का रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा। साथ ही जल्द ही बेरोजगार युवक-युवतियों को सरकार की ओर से दी जाने वाली प्रस्तावित प्रोत्साहन राशि तथा उन्हें रोज़गार के उपलब्ध अवसरों से जुड़ने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जा सकेगी।

आरक्षण बढ़ाने की पहल कर युवाओं को दी राहत

आरक्षण के अपने वादों को पूरा करने के लिए हेमंत ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा था कि गलत नियोजन नीति के कारण राज्य के युवाओं की नौकरी दांव पर लगी है। इसके लिए हेमंत ने राज्य में आरक्षण के दायरे में बदलाव का निर्णय लिया। अनुसूचित जनजाति को 26 से बढ़ाकर 28 फीसदी, ओबीसी को 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी और अनुसूचित जाति के लिए 10 से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का निर्णय लिया गया। 

हेमंत 25 करोड़ का ठेके स्थानीय को देकर करना चाहते है सामाजिक -आर्थिक उत्थान

झारखंडी जनता को हक मिले, उनका सामाजिक-आर्थिक उत्थान हो, इसके लिए हेमंत सरकार ने निर्णय लिया कि भवन निर्माण विभाग में 25 करोड़ रुपए तक के कार्य अब सिर्फ स्थानीय ठेकेदार ही कर सकेंगे। विभाग के इस प्रस्ताव पर हेमंत ने मुहर लगा दी। सीएम का मानना है कि निर्माण कार्य के लिए निकलेवाले टेंडर में स्थानीय निवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करना और उन्हें रोजगार का उचित अवसर देने ही इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य है।   

50,000 रूपए तक किसानों की ऋण माफी

सूबे में 9 लाख के करीब किसानों का कर्ज माफी का कदम भी मुख्यमंत्री ने उठाय़ा। यह कर्ज प्रति किसान 50,000 रूपये तक किया जाना है। इसके लिए किसान को मात्र एक रुपए का टोकन देना होगा। यानी एक रुपए खर्च कर 50 हजार के कृषि ऋण से झारखंड के किसान मुक्त होगें। कर्ज माफी के लिए सरकार ने 2,000 करोड़ रूपये राशि की भी स्वीकृति दे दी। 

भ्रष्टाचार पर हेमंत सरकार सख्त, कई मामलों में जांच का निर्देश

इन सभी वादों को पूरा करने के साथ हेमंत ने सबसे बड़ी पहल भ्रष्टाचार पर की। जीरी टॉलेरेंस की नीति पर चलने वाले हेमंत ने भ्रष्टाचार पर काफी सख्त दिखे। रघुवर राज में हुई सभी तरह के घोटाले व भ्रष्टाचार पर हेमंत सोरेन ने जांच के आदेश दिये। इसमें पूर्व आईपीएस अनुराग गुप्ता पर कार्रवाई, धनबाद नगर निगम में हुए वित्तीय अनियमितता पर तत्कालीन नगर आय़ुक्त मनोज कुमार सहित कई अधिकारियों पर जांच, झारखंड राज्य सहकारी बैंक की रांची और सरायकेला शाखा में वित्तीय अनियमितता और गबन की जांच एसीबी, रघुवर सरकार में हुए मोमेंटम झारखंड और 1.33 लाख को रोजगार देने के लिए स्किल समिट-2018 और ग्लोबल स्किल समिट- 2019 की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने का निर्णय प्रमुखता से शामिल हैं।

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