कोरोना, नोटबंदी, कृषि क़ानून, निजीकरण, अग्निवीर – बीजेपी सत्ता के 8 वर्ष में भारत की तस्वीर

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2014 चुनाव के दौर में देश में गरीबी आबादी को लोकतांत्रिक अधिकार मुहैया कराने के दावे करने वाले भाजपा आइडियोलॉजी ने 8 वर्षीय शासन में देश को कोरोना, नोटबंदी, कृषि क़ानून, निजीकरण, अग्निवीर जैसी तस्वीर दिखाए है.   

रांची : भारत में जब एक खास आइडियोलॉजी को कायम रखने हेतु केंद्र में फ़ासिस्ट सत्ता लाई गयी है. देश के मूल अधिकारों का हनन की तस्वीर खुले तौर पर सामने आया है. ज्ञात हो, 2014 चुनाव के दौर में देश में बहुसंख्यक गरीबी आबादी को लोकतांत्रिक अधिकार मुहैया कराने के मद्देनजर लम्बे-चौड़े दावे हुए थे. लेकिन केंद्र में भाजपा सत्ता आने के बाद दावों से उल्टे, देश की असल तस्वीर महँगाई, बेरोज़गारी, नोटबंदी, कृषि कानून,कॉरपोरेट लूट-खसोट, निजीकरण के रूप में उभरा है. जन-जीवन त्रासदी के दौर से गुरजर ही रहा था कि अब अग्निपथ योजना के माद्यम से युवाओं के भविष्य को अन्धकार में धकेलने का सुनियोजित प्रयास हुआ है. 

कोविड संक्रमण से 47.4 लाख लोगों की मौत अकेले भारत में हुई – WHO रिपोर्ट

डब्लू एच ओ WHO की रिपोर्ट – कोविड संक्रमण ने दुनियाभर में लगभग 1.5 करोड़ लोगों की जाने ली. जिसमे एक तिहाई, यानी 47.4 लाख लोगों की मौत अकेले भारत में हुई. -नदियों में गुमनाम लाशें बह रही थीं और श्मशान घाटों के बाहर लोग प्रियजनों की लाशें लिये लाइनों में खड़े थे, न भूलने वाला दृश्य है. लेकिन, भाजपा आइडियोलॉजी द्वारा कोविड महामारी की पहली-दूसरी लहर में क्वारण्टाइन व उपचार के बजाय ताली-थाली बजवाई गई. साथ ही और अरबों रुपये ख़र्च के झूठे प्रचार हुए. यही नहीं मरने वालों की असली संख्या छिपाने के भी प्रयास हुए. लेकिन मृत्यु प्रमाण पत्र की संख्या में पोल खोल दी. 

नोटबंदी से बैंकों की लाइनों में खड़े लोग शहीद हुए 

ज्ञात हो, मोदी सरकार द्वारा एक आँकड़ा जारी कर बताया गया कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था की विकास दर तेज हुई है! लेकिन, कॉर्पोरेट कारोबारी मीडिया कोई स्वीकार नहीं कर पा रहा था कि दिसम्बर तिमाही में जीडीपी में 7% की बढ़ोत्‍तरी हुई है. हर कंपनी के तिमाही नतीजे बता रहे थे कि बिक्री में कमी आयी थी और भारी मात्र में लोग बेरोजगार हुए, सरकार कहती रही कि निजी खपत 10% बढ़ गई है! शायद देश की जनता नोटबंदी में बैंकों की लाइनों में खड़े हो खरीदारी कर रही थी. जिसमे भरी संख्या में उन्हें शहीद भी होना पड़ा. और सरकार बिना जरुरत ही 25 लाख टन गेहूँ का आयात महँगे दामों पर कर रही थी.

भारतीय ग़रीब किसानों पर कॉर्पोरेट को सहयोग करने वाली तीन कृषि कानून लादने का प्रयास हुआ  

जून 2020 में उस आइडियोलॉजी द्वारा कृषि-सम्‍बन्‍धी तीन अध्‍यादेश पेश किये गए, जो कॉर्पोरेट को लाभ पहुंचाने वाली बताया जाता है. सितम्‍बर 2020 में लोकसभा और राज्‍यसभा में पारित किया गया. भाजपा के अनुषंगी संस्थाएं-पार्टियाँ किसानों के विरुद्ध खड़ी हो गयीं. गोदी मिडिया भी खुले तौर पर किसान के विपरीत खड़ी रही. लेकिन, किसानों का आन्‍दोलन एक वर्ष चला. देशद्रोही जैसे अपमान तक झेलते हुए देश के पालनहार अस्तित्व की लड़ाई में डटे रहे. कई शहीद हुए, अंततः प्रधानमंत्री द्वारा गाल बजाय गया कि कुछ किसान उनकी तपस्या को, दिए के प्रकास जैसा सत्य देख नहीं पाए. नतीजतन, केंद्र सरकार को तीनो कृषि कानून वापस लेना पड़ा.

देश की गरीब बहुजन को एक ख़ास आइडियोलॉजी द्वारा निजीकरण की महत्ता समझाया जाने लगा है

ज्ञात हो, देश में जब से ओबीसी वर्ग संविधान में प्राप्त अपने अधिकारों के प्रति जाग रहा है, तब से देश में एक ख़ास आइडियोलॉजी द्वारा निजीकरण की महत्ता समझाया जाने लगा है. इससे सम्बंधित नीतिया भी लाई जाने लगी है. और कोरोना आपदा को मोदी सरकार द्वारा संभावना तलाशा गया है. वित्त मंत्री द्वारा वर्ष 2021-22 के बजट में, महँगाई और बेरोज़गारी से त्रस्त आम जनता को राहत देने के नाम पर सार्वजनिक संसाधनों की अन्धाधुन्‍ध नीलामी की योजना पेश की गयी है. और अमृत काल में, देश में रेलवे जैसे रोजगार देने वाले संस्था तक में निजीकरण ला सरकारी नौकरी खत्म करने के प्रयास को देख रहा हैं.

अग्निपथ योजना देश के युवाओं बिना भविष्य वाला बनाने का प्रयास 

इस फेहरिस्त में भाजपा आइडियोलॉजी द्वारा UPSC में लेटरल एंट्री लाकर पद समाप्त कर दिए गए हैं. राज्यों में प्रशासनिक नियुक्तियां थम गई है. और अब आगे कदम बढाते हुए सेना जैसे देश के महत्वपूर्ण आयाम में अग्निपथ योजना के तहत अस्थाई अग्निवीर का प्रावधान किया जाना न केवल संविधान में अंकित अधिकारों के खात्मे का प्रयास है, देश के रक्षा प्रणाली के साथ खिलवाड़ करते हुए पढ़े-लिखे गरीब बेरोज़गार यवा के भविष्य के साथ सुनियोजित खिलवाड़ हुआ है. और बिना भविष्य वाले देश के युवाओं को अग्निवीर नाम दिया गया है. भाजपा आईटी सेल व तथाकथित बुद्धिजीवी अब देश को योजना का फायदा भी समझाने में जुट गई है.

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