झारखण्ड : सीएम – ईडी कार्रवाई गीदड़ भभकी, लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए

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झारखण्ड : IAS पूजा सिंघल मामले में JMM ने ईडी कार्रवाई का सपोर्ट किया है. आधिकारिक बयान में कहा कि यह कार्रवाई भाजपा राज में हुई गड़बड़ी पर हुई है. भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए. हेमन्त सरकार केंद्र से अच्छे अधिकारियों की मांग करती रही हैं.

राँची : झारखण्ड में रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में जनसंवाद का आयोजन होता था. उस दरम्यान धनबाद से आये फरियादी ने गुहार लगाता था कि धनबाद मार्केटिंग बोर्ड में उसकी दुकान है. अधिकारी पैसे मांगता है. और साफ शब्दों में कहता है की पैसा उपर तक जाता है. रांची में कोई मैडम हैं पूजा सिंघल पुरवार, उनको भी पैसा पहुंचाना पड़ता है. यह संयोग था कि उस वक्त पूजा सिंघल उस फरियादी के एकदम बगल में बैठी थीं. सिंघल उस समय कृषि विभाग की सचिव थी. जब उस बुर्जुग ने अपनी बातें रखी तो पूरा कक्ष ठहाके से गूंज उठा. थोड़ी देर के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास भी शांत हो गए. पूजा सिंघल की आखें फर्श देखने लगी थी. 

2000 बैच की आइएएस अधिकारी पूजा सिंघल का विवादों के साथ नाता झारखण्ड में भजपा काल से रहा है. उस सरकार में इनका रूतबा सबसे अधिक रहा. वर्तमान में मुख्यमंत्री की प्रधान सचिव, खान एवं भूतत्व सचिव और झारखण्ड राज्य खनिज विकास निगम की प्रबंध निदेशक हैं. ब्यूरोक्रेसी में इन्हें फिट फॉर एवरीथिंग के रूप में जाना जाता है. पूजा सिंघल खूंटी की डीसी थी, तब वहां ग्रामीण विकास विभाग के कार्यक्रमों में करोड़ों का घोटाला हुआ. उस समय ग्रामीण विकास विभाग के कनीय अभियंता रामविनोद सिन्हा के साथ इनका काफी नाम जुड़ा था. 

मोमेंटम झारखण्ड में भी कई दिनों तक सुर्खियों में रही

खूंटी में मनरेगा घोटाले के तहत कुल 16 प्राथमिकी दर्ज हुई. तब इन्हें विभागीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में क्लीन चिट दे दिया गया. तत्कालीन सीएम अर्जुन मुंडा का जांच से संबंधित आदेश निगरानी ब्यूरो (अब एंटी करप्शन ब्यूरो) तक पहुंचा ही नहीं. अर्जुन मुंडा ने सभी मामलों की जांच के आदेश दिये थे और निगरानी तक पहुंचते-पहुँचते  जांच के आदेश सिर्फ दो मामलों में मिली. चतरा में डीसी रहते पूजा सिंघल ने मनरेगा योजना से दो एनजीओ को 6 करोड़ रूपये दिये. वेलफेयर प्वाइंट नाम के NGO को चार करोड़ और दो करोड़ रुपये प्रेरणा निकेतन नाम के एनजीओ को. दोनों को मुसली उत्पादन के नाम पर यह राशि दी गयी. 

मनरेगा में मुसली उत्पादन के लिए पैसे दिये गये. पूजा सिंघल अगस्त 2007 से जून 2008 तक चतरा डीसी थी. इस मामले को भाकपा माले विधायक विनोद सिंह ने मामले को उठाया था. सरकार ने जांच कराने की बात कही थी. इस मामले में भी पूजा सिंघल को सरकार के अफसरों ने क्लीन चीट दे दी. हालांकि ईडी ने हाइकोर्ट में दिये हलफनामे में कहा कि वह इस मामले को देख रहे हैं. इतना ही नहीं लातेहार में कोयला ब्लाक के भूमि अधिग्रहण मामले में भी इनका नाम आया था. इस मामले को भी दबा दिया गया. 

राज्य में पूजा सिंघल कृषि और पशुपालन विभाग, उद्योग विभाग, पर्यटन विभाग में भी रही हैं. झारखण्ड में आयोजित मोमेंटम झारखण्ड में भी यह कई दिनों तक सुर्खियों में रही थी. साथ ही मोमेंटम झारखण्ड के दौरान एक दिन में सबसे अधिक रोज़गार दिये जाने का लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में नाम दाखिल होने. समेत देश भर के कई महानगरों दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और अन्य जगहों पर निवेशक सम्मेलन आयोजित करने में भी इनकी भूमिका रही थी.

मैडम से मदद लेकर कई पत्रकार बने व्यवसायी

सूत्र दावा करते हैं कि पूजा सिंघल के करीबी लोगों में झारखण्ड के कई पत्रकार भी शामिल हैं. यह लोग अलग-अलग संस्थानों में बड़े पदों पर बैठकर मैडम के लिए मीडिया मैनेजमेंट का काम करते हैं. मैडम के खिलाफ किसी भी तरह के आरोप-प्रत्यारोप आने पर यह लॉबी सक्रिय हो जाती है. मैडम की कृपा से यह लोग पत्रकारिता की आड़ में अपने अलग-अलग व्यवसाय का संचालन करते हैं. इसके लिए बकायदा अभियान तक तैयार किया जाता है. साथ ही पूजा सिंघल भाजपा के सभी मुख्यमंत्रियों के कर्रबी रही है. ऐसे में ऐसे में निशिकांत दुबे का एकतरफा जिक्र राजनीति से प्रेरित है. 

हेमन्त सरकार केंद्र से अच्छे अधिकारियों की मांग करता रहा है, अबतक अधिकारी नहीं मिले. अधिकारियों को बदलना केंद्र का काम

आईएएस पूजा सिंघल मामले में झामुमो ने ईडी कार्रवाई का सपोर्ट किया है. झामुमो के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ईडी कार्रवाई रूकनी नहीं चाहिए. भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए. हमने सुना है कि ईडी कार्रवाई में करोड़ों रुपये नकद मिले हैं. यह हमारे सरकार के कार्यकाल का मामला नहीं है. हम केंद्र से अच्छे अधिकारियों की मांग करते हैं, पर अबतक राही सरकार को अच्छे अधिकारी नहीं मिले हैं. अधिकारियों को बदलना केंद्र का काम है. हमारे यहां अब भी कई पद खाली हैं. केंद्र ने हमारे रिक्वेस्ट को बार-बार ठुकराया है.

भाजपा के राज में हुई थी गड़बड़ी, लेकिन मामले को किया जा रहा है पेंट

पार्टी महासचिव भट्टाचार्य ने कहा कि जिस गड़बड़ी पर ईडी कार्रवाई कर रही है, वह भाजपा राज में हुई थी. उनकी सरकार में कोई मनरेगा आयुक्त रहता है और लूट मचाता है तो किसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए. झामुमो के कार्यकाल में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है. हमारी सरकार में लूट की छूट किसी अधिकारी को नहीं मिलती है. लेकिन, ईडी कार्रवाई के पूरे प्रकरण को पेंट किया जा रहा है कि यह माइनिंग लीज घोटाला है. भाजपा सांसद का ट्वीट करना राजनीतिक अभद्रता है. जिसका साफ़ मतलब है भाजपा सीबीआई व ईडी का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए करती है. जांच रूकनी नहीं चाहिए और जवाबदेही तय होनी चाहिए.

सुप्रियो भट्टाचार्य – झामुमो केंद्रीय महासचिव का भाजपा पर हमला 

झामुमो केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ हमला बोला है. उन्होंने कहा रघुवर सरकार के कार्यकाल में मोमेंटम झारखण्ड का आयोजन किया गया था. इसमें 225 कंपनियों के साथ द्विपक्षीय समझौता (एमओयू) करने की बातें कही गयी थी. पर ये हुआ ही नहीं. मोमेंटम झारखण्ड के आयोजन के समय कुछ कंपनियों को बुला कर एमओयू कराया गया. मोमेंटम झारखण्ड, राज्य का सबसे बड़ा घोटाला है. वही बौखलाहट अभी भाजपा में देखी जा रही है. 

उस समय कुछ ऐसी कंपनियों के साथ एमओयू किया गया, जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं था. उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश पर भी कई आरोप लगाये. उन्होंने कहा कि जिस तरह पूर्व सीएम रघुवर दास, भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी झामुमो सरकार के मुखिया पर आरोप लगा रहे हैं. वह बौखलाहट का नतीजा है. बाबूलाल मरांडी ने देश और विदेश में क्या-क्या किया, इसकी सारी जानकारी जल्द मीडिया में लायी जायेगी. 

दो साल चार महीने के झामुमो कार्यकाल में विकास कार्य होने से भाजपा नेताओं में डर

झामुमो के दो साल चार महीने के कार्यकाल में जिस प्रकार विकास के कार्य हुए, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन का दायरा बढ़ा है. नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई है. उससे भाजपा नेताओं को डर है. उन्होंने भाजपा नेताओं को नसीहत दी कि राज्य के आदिवासी सीएम के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी न करें. उन्होंने कहा कि भाजपा यह बताये कि जिस तरह सीएम हेमन्त सोरेन के निर्वाचन को चुनौती दी जा रही है और उनके नाम पर आवंटित खदान को लेकर हो हल्ला मचाया जा रहा है, वह बेबुनियाद है. 

वह हाउस ऑफ प्रोफिट का मामला नहीं है, क्योंकि मुख्यमंत्री को इस खदान से एक रुपये की कमायी नहीं हुई. उन्होंने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग भी 9A के तहत पीपुल्स रीप्रेजेंटेशन एक्ट 1951 के तहत कोई कार्रवाई करेगी, तो पार्टी सुप्रीम कोर्ट का रूख करेगी. हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है. उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रवक्ता कोर्ट आफ कंटेम्प्ट का मामला उछाल रहे हैं. ऐसा राजनीतिक पागलपन पहले नहीं देखा. सरना स्थल पर पांच मंजिली इमारत के निर्माण होने से भी भाजपा नेताओं को आपत्ति है. 

हेमन्त सोरेन एक आदिवासी मुख्यमंत्री इसलिए यह दर्द भाजपा में काफी तेज हो गया है

आदिवासी मुख्यमंत्री हैं हेमन्त सोरेन इसलिए भाजपा में यह दर्द तेज हो गया है. पार्टी महासचिव ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा पर गंभीर आरोप लगाये. उन्होंने कहा अर्जुन मुंडा का राजनीतिक पाठशाला झामुमो रहा है. क्योंकि जेएमएम राजनीति का ‘किंडर गार्टेन’ स्कूल है. यहां बहुत से लोग आते हैं और जाते हैं. अर्जुन मुंडा को हम लोगों ने मुंडा आदिवासी समझा. बाद में सच सामने आयी. उन्होंने भोक्ता को अनुसूचित जनजाति बना दिया. राजनीति लड़ाई में बहुत बातें, आरोपों की बौछारें होती हैं. भविष्य में और चीजें सामने आयेंगी. अंतत: झारखण्डियों की ही जीत होगी. बाहरी ताकतें हारेगी.

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने ईडी कार्रवाई को बताया गीदड़ भभकी 

सीएम हेमन्त सोरेन मामले में भाजपा पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने ईडी कार्रवाई को गीदड़ भभकी करार दिया है. कहा कि भाजपा की स्थिति उस बच्चे की तरह हो गयी है, जो मैच हारने के बाद बैट-बॉल लेकर चला जाता है. राजनीतिक मैदान में जब भाजपा नहीं सकती है, तो संवैधानिक संस्थाओं का उपयोग करती है. इनका उद्देश्य सब जानते हैं. भाजपा गलत राजनीतिक परिभाषा गढ़ने का प्रयास कर रही है. राजनीतिक पटल पर वह संवैधानिक मिशनरी एजेंसियों का उपयोग करती है. लेकिन हम राज्य के अधिकार का मांग केंद्र से करेंगे, करते रहेंगे और अपना अधिकार लेंगे.

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