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February, 2019

January, 2019

  • 25 January

    गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) किसके लिए ?

    गणतंत्र दिवस

    गणतंत्र दिवस के उलझे रास्ते  मुड़कर चंद बरस पहले के वक्त को देखना और यह सोचना कि तब आजादी का मतलब यह तो नहीं था जो आज हो चला है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का तमगा पाने का हक छाती से लटकाए जिस राग को संविधान पारित के बरस …

  • 11 January

    आरक्षण से क्या लाभ होगा जब देश में नौकरियाँ ही नहीं बचेगी

    आरक्षण

    मोदी जी लगातार झूठी दाव चल रहे हैं। पहले झूठा दांव लगाया कि हर साल वे दो करोड़ नौकरियाँ पैदा करेंगे फिर चुनाव के बाद वह झूठ मक्कारी में बदल गई। मोदी जी ने बताया कि पकौड़ा तलना भी रोज़गार है और बेरोजगार युवाओं को नाले की गैस से चाय …

  • 11 January

    मंडल डैम : बाहरियों के फायदे के लिए भाजपा इतनी तत्पर क्यों?

    मंडल डैम

    लगभग 40 साल पहले कोयल नदी पर मंडल डैम (बांध) की बनने की प्रक्रिया शुरू हुई। ऊंचाई 64.82 मीटर तय की गयी है, जिसकी बिजली उत्पादन क्षमता 12 मेगावाट। पर आज तक उसका काम पूरा नहीं हुआ। हालांकि इस अधूरे बांध की वजह से उजड़े लोगों की जिंदगी हाशिये पर …

December, 2018

  • 19 December

    राष्ट्रीय-दल अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करें

    राष्ट्रीय-दल

      भारत एक प्रजातान्त्रिक देश है। प्रजातान्त्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा जनता के कल्याण के लिए एवं जनता द्वारा शासन किया जाता है। प्रजातान्त्रिक शासन प्रणाली में सभी नागरिकों को यह अधिकार होता है कि उनकी आवाज को सुना जाए चाहे वे किसी भी धर्म, जाति, लिंग या क्षेत्र के …

  • 12 December

    चुनावों में क्यों राष्ट्रीय दलों का क्षेत्रीय दलों के आगे दम फूल रहा है  

    विधानसभा चुनावों के परिणाम

    विधानसभा चुनावों में मिले जनादेश का अलग मिज़ाज  देश में पहली बार किसान-मजदूर-बेरोजगारी जैसे मुद्दे सतह पर आये तो विकास का रंग फिका पड़ गया। यह कहना आसान हो गया कि 2014 में उगा सितारा 2019 में डूब जायेगा। साथ में यह भी उभरा कि आकड़ो के लिहाज से विस्तार …

  • 7 December

    गुरूजी शिबू सोरेन का सहयोगियों के साथ सामजिक आन्दोलन का आरम्भ

    गुरूजी शिबू सोरेन

    गुरूजी शिबू सोरेन का सफ़रनामा कितना अहम है। बेशक, आँखों देखे बिना यक़ीन नहीं हो सकता कि गुरूजी शिबू सोरेन के लिए झारखंड आन्दोलन का सफ़रनामा ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक एतबार से कितना अहम है। जो साक्ष शेष हैं – वह उनके गुज़रे हुए इंक़लाबी दौर से रुबरु करवाता है। …

  • 3 December

    झारखंड की 13 ( तेरह ) नदियों में 6 ( छह ) नदियां मरने के कगार पर खड़ी

    झारखंड की नदियों का हाल

    झारखंड के आदिवासियों का जीवन ही नदियों से है  इस समय केरल की लगभग साढ़े तीन करोड़ आवाम ने 70 वर्षों की सबसे विनाशकारी तबाही झेली है। लाखों लोग बेघर और आजीविका के साधन से महरूम हो राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हुए। केरल को इससे उबरने में …

November, 2018