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Editorial

samadiya

January, 2019

  • 25 January

    गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) किसके लिए ?

    गणतंत्र दिवस

    गणतंत्र दिवस के उलझे रास्ते  मुड़कर चंद बरस पहले के वक्त को देखना और यह सोचना कि तब आजादी का मतलब यह तो नहीं था जो आज हो चला है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का तमगा पाने का हक छाती से लटकाए जिस राग को संविधान पारित के बरस …

  • 25 January

    मतदाता दिवस पर विकास मंत्र एवं हिन्दु राष्ट्रवाद का सपना फुस

    मतदाता दिवस

    25 जनवरी मतदाता दिवस बीते वर्षों में भाजपा ने साबित किया कि राजनीतिक सत्ता ही उनके लिए वंदे मातरम है और इस देश का राजनीतिक सच ही लोकतंत्र हो गया है। यहाँ कुल लोकसभा और राज्यसभा सदस्य 786 हैं और कुल विधायकों की संख्या 4120 है। साथ ही देश के …

  • 23 January

    बजट : चुनावी महासमर में रघुबर के फेंके बजटीय पासे की चौसर छोटी!

    बजट

    वित्त मंत्री जेटली के कैंसर इलाज हेतु न्यूयार्क चले जाने की स्थिति में सवाल है कि केन्द्रीय बजट एक फरवरी को पेश कौन करेगा? ऐसी स्थिति में 31 जनवरी को पेश होने वाले आर्थिक समीक्षा के आंकडे क्या मैनेज होगें? आर्थिक सलाहकार ने अपने पद से इस्तीफ़ा देकर इसके संकेत …

  • 22 January

    हेमन्त सोरेन का झारखंड प्रदेश के साथ-साथ देश के पटल पर बढ़ता कद 

    हेमन्त सोरेन

    आगामी महासमर 2019 के चुनावों को लेकर झारखण्ड के नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन जिस लकीर को खींच रहे है वह केवल राजनीति भर नहीं है, बल्कि चुनावी महासमर या महाभारत की गाथा का ऐसे दस्तावेज तैयार कर रहे हैं, जिसमे संविधान और लोकतंत्र की परिभाषा सत्ता के चरणो में नतमस्तक …

  • 15 January

    स्कूलों का विलय झारखंडियों को सस्ता मजदूर बनाने की साजिश

    झारखंड में रघुबर सरकार राज्य के प्राथमिक व मध्य विद्यालयों को बंद कर पास के किसी स्कूल में विलय करने की घोषणा की है। इसका एक मात्र कारण इन स्कूलों में छात्रों की संख्या कम होना बताया जा रहा है। लेकिन ये यह नहीं बता रहे कि आखिर इन प्राथमिक …

December, 2018

  • 21 December

    सम्मान राशि सामाजिक अगुवाओं के लिए सम्मान या अपमान!

    सम्मान राशि

    सम्मान राशि के नाम पर सामाजिक अगुवाओं का अपमान! शिबू सोरेन के नेतृत्व एवं लड़ाका झारखंडियों के संघर्ष और बलिदान के बदौलत वर्ष 2000 में झारखंड राज्य भारत के मानचित्र का एक अभिन्न अंग बना अलग झारखंड राज्य के आन्दोलन में आदिवासियों के बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने की मुख्य वजह जल, जंगल …

  • 19 December

    राष्ट्रीय-दल अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करें

    राष्ट्रीय-दल

      भारत एक प्रजातान्त्रिक देश है। प्रजातान्त्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा जनता के कल्याण के लिए एवं जनता द्वारा शासन किया जाता है। प्रजातान्त्रिक शासन प्रणाली में सभी नागरिकों को यह अधिकार होता है कि उनकी आवाज को सुना जाए चाहे वे किसी भी धर्म, जाति, लिंग या क्षेत्र के …

  • 13 December

    मानदेय के नाम पर आदिवासियों को आपस में लड़ाने की साजिश

    मानदेय के नाम आदिवासियों को आपस में लड़ाने का प्रयास

    मानदेय के नाम पर सरकार भ्रम फैलाने की स्थिति में  प्रागेतिहासिक काल में मनुष्य जब घूमते हुए थक गए होंगे तब उन्हें ख़याल आया होगा बसेरा बना कहीं एक ही जगह थम जाया जाए। उस स्थान पर घर बनाये होंगे, सुरक्षा एवं आपसी कलह के अनुभवों से नियम बनाये होंगे। …

  • 12 December

    चुनावों में क्यों राष्ट्रीय दलों का क्षेत्रीय दलों के आगे दम फूल रहा है  

    विधानसभा चुनावों के परिणाम

    विधानसभा चुनावों में मिले जनादेश का अलग मिज़ाज  देश में पहली बार किसान-मजदूर-बेरोजगारी जैसे मुद्दे सतह पर आये तो विकास का रंग फिका पड़ गया। यह कहना आसान हो गया कि 2014 में उगा सितारा 2019 में डूब जायेगा। साथ में यह भी उभरा कि आकड़ो के लिहाज से विस्तार …

  • 10 December

    अलग झारखण्ड में वन अधिकार अधिनियम की ज़मीनी हकीकत

    वन अधिनियम 2006

    वन अधिकार अधिनियम की ज़मीनी हकीकत किसी कवि ने अपने शब्दों में कितना सुंदर झारखण्ड का चित्र उकेरा है। सम्पूर्ण छोटा नागपुर एक लम्बा लहरदार-घुमावदार पहाड़ की तरह है…, इसके केंद्र में पठार है…, यह पूरा इलाका कमोवेश घने जंगलों से पटा है…, जब निचले और लहरदार ढलान में असंख्य …