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Biography

देश के वैसे विभुति/धरोहर/ महानआत्माओं की जीवनी ( biography ) जिन्होंनेअपन जीवन निछौवर कर देश/राज्य को आज़ादी दिलाई हो अत्याचार से. जिसके कर्म से देश/राज्य ऋणी हों.

झारखंड मुक्ति मोर्चा के आन्दोलन का परिणाम है अलग झारखंड

आन्दोलन

झारखंड मुक्ति मोर्चा के शंघर्ष से भरे आन्दोलन का परिणाम है अलग झारखंड शिबू सौरेन ने बिनोद बाबू के निधन के तुरंत बाद ही 27-28 जनवरी 1992 को धनबाद सराइढेला में रखे झामुमो केन्द्रीय समिति बैठक में, यह तय हुआ कि राँची मोराबादी मैदान से 15 मार्च को एक विशाल …

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लोकसभा: युगपुरुष दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने 10वीं बार पर्चा भर रचा इतिहास

लोकसभा

युगपुरुष दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने 10वीं बार लोकसभा का पर्चा भरने को आवाम ने त्यौहार के रूप में मनाया  यह ऐतिहासिक सत्य है कि कोई भी व्यवस्था सनातन नहीं होती, हर शोषित समाज बदलता है और उस जैसा ही जुझारू इंसान बदलता है, जिनके आन्दोलन के दम पर ही …

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संथाल नवोदय को गुरूजी ने गठा, बाद में वह आदिवासी सुधार समिति कहलाया -4

संथाल किंग शिबू सोरेन

‘ज़िंदगी तल्ख़ सही लेकिन दिल से लगाए रखना’ – संथाल किंग गुरूजी -भाग 4 भारत के बड़े पूँजीपति वर्गों ने अपनी लूट-खसोट पर केन्द्रित मुनाफे को गति देने के लिए करोड़ों बहाकर 2014 में भाजपा-मोदी को कोंग्रेस का विकल्प साबित करते हुए जनता में अच्छे दिन का उम्मीद जगा दाँव …

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गुरूजी शिबू सोरेन का सहयोगियों के साथ सामजिक आन्दोलन का आरम्भ

गुरूजी शिबू सोरेन

गुरूजी शिबू सोरेन का सफ़रनामा कितना अहम है। बेशक, आँखों देखे बिना यक़ीन नहीं हो सकता कि गुरूजी शिबू सोरेन के लिए झारखंड आन्दोलन का सफ़रनामा ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक एतबार से कितना अहम है। जो साक्ष शेष हैं – वह उनके गुज़रे हुए इंक़लाबी दौर से रुबरु करवाता है। …

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गुरु जी रूपी विचार एक जिद्द का नाम है जिससे खौफ खाती है रघुबर सरकार

गुरु जी

गुरु जी एक विचार है … अगला भाग  …घंटों माँ के गोद में सर रखे सोते रहे… जब आँख खुली तो आँसू सूख चुके थे और नयी सुबह ने दस्तक दी थी। मुझे याद है, जमशेदपुर निर्मल महतो शहीद स्थल – “झारखंड संघर्ष यात्रा” के हरी झंडी दिखाए जाने वाले दिन, …

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गुरूजी एक “विचार” है -जन नेता से पहले एक समाज सुधारक

शिबू सोरेन (गुरूजी)

इतिहास सिखाता है कि कोई भी व्यवस्था सनातन नहीं होती। हर शोषित समाज बदलता है और उसे इंसान ही बदलते हैं। इसके जीते जागते उदाहरण हैं हमारे दिशोम गुरु शिबू सोरेन ( गुरूजी )। इन्हीं के आन्दोलन के दम से हम आज अलग झारखंड में सांस ल रहे हैं । …

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निर्मल दा (निर्मल महतो) तुम बहुत याद आये…

निर्मल दा

अंत में बस इतना ही कहना चाहता हूँ कि यह निर्मल दा जैसे नेताओं का अथक प्रयास का परिणाम था कि 15 नवंबर 2000 को झारखण्ड अलग राज्य बना, लेकिन आज एक सवाल हर झारखंडी के मन में है कि "क्या वाकई निर्मल दा के सपनों का झारखण्ड बना है?

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