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झारखंड स्थापना दिवस की शुभकामनाएं

ब्राह्मणवाद विचारधारा सदियों से दुनिया की सबसे निर्मम, निष्ठुर, हिंसक और बर्बर

ब्राह्मणवाद विचारधारा का हेमंत सोरेन पर सुनियोजित हमला, जनता की उम्मीदों व शुभकामनाओं ने की उनकी रक्षा

शंबूक, कर्ण तो हर युग में मारा गया और मारा जाता रहा है। क्योंकि वह अध्ययन करने की हिम्मत करते है और शिक्षा और कौशल के बल पर जन कल्याण की दिशा में इतिहास रचते हैं। यही कारण है कि एकलव्य का अंगूठा तो कटकर रहता है। इस विचारधारा को यह कभी पचता नहीं कि कैसे कोई दलित-आदिवासी व पिछड़ा सर्वोच्च स्थान पा सकता है।

मनुवाद ब्राह्मणवाद का पर्याय है , और संघ विचारधारा से निकली पार्टी भाजपा जब से देश के सत्ता में आयी है। स्पोर्ट्स में चैंपियन बनना, उच्च शिक्षा पाना, पीएचडी एंट्रेंस का टॉपर होना, घोड़े पर बैठ कर बाराती जाना, महिलाओं का अपने अधिकार के लिए आवाज़ उठाना, आदिवासियों को अपना अपनी पहचान मांगना, दलित-आदिवासी व पिछड़ों (शूद्रों) के लिए एक समस्या बन गया है।

दलितों की खाल खींचे जा रहे हैं, पारसनाथ का बास्कि हो या बकोरिया का मासूम, नक्सल बता मारे जा रहे है। चाहे विकलांग लड़की सुमन हो या रोहित बेमुला हो उसे मरना पड़ता है। अति तो तब हो जाती है जब झारखंड जैसे राज्य का मुख्यमंत्री, जो आदिवासी हैं उन्हें भी बक्शा नहीं जाता है। आप कहां तक बच सकोगे। या तो रीढ़ की हड्डी निकाल कर उनके फायदे में साथ दो, या फिर मरो।

ब्राह्मणवाद विचारधारा दलित-आदिवासी व पिछड़ों को कभी नहीं छोड़ती

ये ब्राह्मणवाद है, ये किसी को नहीं छोड़ते, ये अपने फायदे के लिए धर्म के आड़ में मावता को कुचलकर मिटा देता है। और इसकी यही विचार मौजूदा दौर में ब्राह्मणवाद को दुनिया की सबसे हिंसक विचारधारा बनाती है। ब्राह्मणवाद की विचारधार एक बर्फ की छुरी की तरह है जो कलेजे में उतर जाती है और ठंडक के साथ मौत देती है। 

मसलन, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बस इतनी गलती है कि वह बिना हिम्मत हारे कोरोना महामारी में गरीबों का साथ देते हैं। अपनी मातृभूमि के संसाधन को लूटेरों से बचाने के लिए दीवार बन कर खड़ा हो जाते हैं। झारखंड को आत्मनिर्भर बनाने हुए राज्य के गरीब जनता के पक्ष में योजना लाते हैं। महिलाओं के अधिकारों को तरजीह देते हैं। आदिवासी कोड की मांग को अंजाम तक पहुंचाते हैं, राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास व रोजगार के नए आयाम जोड़ते हैं।

पहले तो कई बार इन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिली, फिर भी वह डेट रहे। उन्होंने एक-एक कर राज्य में हुए घोटालों की जांच के आदेश दिए। ब्राह्मणवाद ने अपनी दूसरी चाल चली, उनपर गलत ओछे आरोप लगाए। महज चंद दिनों पहले ही दूध का दूध और पानी का पानी हुआ है। जब इससे भी बात नहीं बनी तो आज उनपर सुनियोजित तौर पर हमला करवाया गया। जनता के उम्मीदों व शुभकामनाओं ने उन्हें बाल-बाल बचाया है।     

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