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भाजपा शासित तीन नगर निगमों में है भ्रष्टाचार का बोलबाला

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राँची, धनबाद और गिरीडीह तीनों भाजपा शासित नगर निगमों के कार्यशैली पर उठते रहे हैं कई सवाल

राँची : पूर्ववर्ती रघुवर सरकार के दौरान राज्य के राँची, धनबाद और गिरीडीह नगर निगमों में सबसे अधिक भ्रष्टाचार हुए हैं। यहाँ हुए भ्रष्टाचारों की ख़बरें मीडिया जगत में हमेशा चर्चा में रही है। वर्तमान में इन तीनों ही निगमों के कई महत्वपूर्ण पदों पर भाजपा का कब्ज़ा है। राँची और गिरीडीह नगर निगम में मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर भी भाजपा काबिज है। धनबाद के मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल भाजपा के ही है। इन तीनों ही निगमों में बीते कुछ सालों के कार्यकालों को देखे, तो साफ पता चलता है कि भ्रष्टाचार के खेल में भाजपा ने सारी हदें पार कर दी है। 

स्पेरो के कमीशन में कई भाजपा नेताओं को हुआ है फायदा

राँची नगर निगम में पिछले पांच वर्षों में जितने भी कार्य हुए हैं, वह हमेशा से विवादित रहे हैं। बात चाहे निगम के कामों के लिए कंपनी आउटसोर्सिंग की बात हो या शहर के विकास की, मेयर आशा लकड़ा और डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय हमेशा कटघरे में रहे है। राजस्व वसूली का काम कर चुकी स्पेरो सॉफ्टेक के कमीशनखोरी का खेल अब सामने आ चुका है। 

स्पेरो सॉफ्टेक 7 वर्षों के कार्यकाल में निगम के हिस्से का करीब 176 करोड़ रूपये वसूल चुका है। जब नवनिर्वाचित हेमंत सरकार द्वारा राजस्व वसूली के लिए स्पेरो से कम रेट पर नयी कंपनी का चयन किया गया है, तो मेयर आशा लकड़ा इसका विरोध कर रही है।

दरअसल वह जानती हैं कि नयी कंपनी के आने से भाजपा को मिल रहे कमीशन के खेल का गणित  बिगड़ जाएगा। ज्ञात हो कि कमीशन के इस काले खेल में तत्कालीन नगर विकास मंत्री सीपी सिंह समेत कई भाजपा नेताओं के शामिल होने की बात सामने आ रही है।

सिवरेज ड्रैनेज के नाम पर हुआ है भ्रष्टाचार का खेल 

सिवरेज ड्रैनेज सिस्टम में भी निगम के भ्रष्टाचार का खेल सामने आया है। 2006 में, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के नगर विकास मंत्री रहते सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम के डीपीआर का ज़िम्मा कंसल्टेंट कंपनी मैनहर्ट को दिया गया।

मैनहर्ट ने चार फेज में काम पूरा करने डीपीआर बनाया था। इसमें कार्य के लिए 1200 करोड़ की राशि तय की गयी थी। पहले फेज के काम के लिए ज्योति बिल्टडेक कंपनी का चयन भी किया गया था। कुल 359 करोड़ खर्च करने की बात हुई, लेकिन पहले फेज में 84 करोड़ खर्च कर मात्र 113 किमी सीवरेज-ड्रेनेज का काम किया गया। 

हाल ही में पहले फेज के लिए फिर से टेंडर निकाला गया है। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कई बार इस भ्रष्टाचार के काले खेल को लेकर अपनी नाराज़गी जता चुके है।

भ्रष्टाचार : पद का दुरूप्रयोग कर संजीव विजयवर्गीय ने दिलाया बेटे को ठेका

डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय का भी पद का दुरूप्रयोग करने का मामला सामने आया है। लोकायुक्त की अदालत में उनके खिलाफ अपने बेटे की कंपनी को गलत तरीके से ठेका दिलाने का आरोप लगा था। उनके खिलाफ शिकायत की गयी थी कि उनके बेटे हर्षित विजयवर्गीय की कंपनी मेधा कंस्ट्रक्शन एवं दोस्त विपिन कुमार वर्मा की कंपनी पीयूष कंस्ट्रक्शन को निगम का ठेका गलत तरीके से मिला था। दोनों ही टेंडरों में डाले गए बैंक ड्राफ्ट संजीव विजयवर्गीय की कंपनी मेसर्स एस के सप्लाई व‌र्क्स के खाते बनाया गया था। जो दर्शाता है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए सरकारी पद का दुरुपयोग किया है।  

चंद्रशेखर अग्रवाल पर भी लगे है भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप 

धनबाद के नगर आयुक्त चंद्रशेखर अग्रवाल भी भ्रष्टाचार के खेल से अछूते नहीं हैं। उनपर भी संगीन आरोप लग चूके है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के करीबी माने जाने वाले चंद्रशेखऱ अग्रवाल पर नवंबर 2018 में आरोप लगा था। उनके गार्डन सिटी अपार्टमेंट के सीवरेज ड्रैनेज की खराब हालत से आसपास के लोग बेहाल है। 

जून 2020 में, उनपर 14वें वित्त आयोग के 200 करोड़ रुपये के घोटाला का भी आरोप लगा है। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले में एसीबी को पीई (Preliminary Enquiry) दर्ज करने की अनुमति दी है। आरोप है कि उनके द्वारा बेहतर पीसीसी सड़कों को तोड़ कर, प्राक्कलित राशि कई गुणा बढ़ौतरी कर, फिर से सड़क का निर्माण किया गया। और बढ़ी हुई राशि का 50 प्रतिशत उन्होंने ले ली। 

भ्रष्टाचार : फ़र्ज़ी जाति प्रमाण पत्र के लिए सुनील पासवान को हुआ है शोकॉज

गिरीडीह मेयर सुनील पासवान पर फ़र्ज़ी जाति प्रमाण पत्र पर चुनाव लड़ने का आरोप सिद्द हुआ है। हालांकि सोमवार को हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। बीते दिनों नगर विकास विभाग ने उनपर लगे आरोप पर उन्हें शोकॉज नोटिस भेजा है। उन्हें सात दिनों के अंदर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। पक्ष नहीं रखने पर सरकार एकतरफा कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी। संतोषजनक जवाब दाखिल नहीं करने पर उनकी सदस्यता भी जा सकती है.

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