झारखंडीबच्चियों की घर वापसी

बेटियों की सुरक्षा मामलों में हेमन्त दा अदा कर रहे हैं फर्ज, खुद करते हैं मॉनिटरिंग

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हेमन्त दा के खुद मॉनिटरिंग करने के कारण चलती बस से एक छह साल की मासूम बच्ची को मानव तस्करों की चंगुल से बचा लिया गया

झारखंडी बेटियों पर होने वाले अत्याचार मामले को त्वरित सुलझाने की दिशा में, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन संवेदनशीलता दिखाते हुए मॉनिटरिंग खुद कर रहे हैं। जिसका असर यह कि चलती बस से एक छह साल की मासूम बच्ची को मानव तस्करों की चंगुल से बचा लिया जाता है। निश्चित रूप से बेटी सुरक्षा मामले में हेमन्त सरकार के गंभीरता का ही परिणाम है कि, राज्य की बेटियां लगातार रेस्क्यू कर घर पहुंचायी जाती रही है। जहाँ एक तरफ हाथरस कांड ने देश-दुनिया को भाजपा शासन-व्यवस्था से अवगत कराया। वहीं झारखण्ड सरकार ने तमाम दुष्कर्म मामलों में तवरित उदद्भेदन करवा बेटियों को न्याय दिया है।

ज्ञात हो हेमंत सरकार के सकारात्मक प्रयास ने राज्य के कई माता-पिता के शीने के आग को ठंडक पहुंचायी है। पश्चिम सिंहभूम की मासूम हो या तमिलनाडु व अन्य राज्यों में फंसी झारखण्ड की बेटियां, सभी मामलों में मुख्यमंत्री में  व्यक्तिगत रूप उन्हें बचाने के ललक दिखी। ज्ञात हो कि कोरोना काल में लगी लॉकडाउन में भी मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु सरकार से आग्रहपूर्वक बात कर झारखंड की बेटियों को सुरक्षा प्रदान की। फिर समय रहते न केवल एयरलिफ्टिंग कर सुरक्षित झारखण्ड वापस लाया गया, रोजगार दे कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया।

ऐसी तमाम मामलों में हमेशा मुख्यनमंत्री की तत्परता दिखी, मानो उनकी अपनी बहन-बेटियां मुसीबत हों। जिसे झारखंडी संस्कृति का झलक माना जा सकता है। उस व्यस्त संकट काल में भी दिन हो या रात मुख्यमंत्री खूद मामलों पर संज्ञान लेते रहे। झारखंड प्रशासन को जब जहाँ उनकी जरुरत पड़ी, उन्हें एक अभभावक के रूप में खड़ा पाया। ऐसे ही मनोहरपूर की मासूम को बचाने को लेकर मुख्यमंत्री का यही रूप दिखा। जिससे फिर एक बच्ची मानव तस्करों की काल कोठरी में कैद होने से बच गयी। सरकार झारखंडी समाज से महिला प्रताड़ना को प्रश्रय देने वाली तमाम कुरीतियों के खिलाफ खड़ा हो पितृसत्तात्मक सोच पर जबरदस्त प्रहार किया है।

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