बंद फैक्ट्रियों को मिलेगा पुनर्जीवन – मुख्यमन्त्री बदलेंगे राज्य की औद्योगिक तस्वीर

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बंद फैक्ट्रियों को मिलेगा पुनर्जीवन

राज्य में तकरीबन 3000 फैक्ट्रियां बंद पड़ चुकी है. मुख्यमन्त्री ने कहा है कि इनमें से जितनी फैक्ट्रियां चल सकती है उन्हें चलाया जायेगा.

रांची : मुख्यमन्त्री हेमन्त सोरेन की एक महत्वपूर्ण घोषणा ने राज्य के मृतप्राय: उद्योगों में नयी आशा की किरण भर दी है. ज्ञात हो, राज्य में तकरीबन 3000 फैक्ट्रियां बंद पड़ चुकी है. मुख्यमन्त्री ने कहा है कि इनमें से जितनी फैक्ट्रियां चल सकती है उन्हें चलाया जायेगा. गौरतलब है कि राज्य सरकार ने नयी औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति की घोषणा की है. इस नीति के तहत राज्य में विभिन्न सेक्टरों को चिन्हित किया गया है. जिसमें राज्य में उद्योग-धंधों को लगाने के लिए निवेशकों को कई तरह की सुविधाएं प्रदान कर जायेगी. इनके जरिये राज्य में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य तय किया गया है. 

इससे भी एक कदम आगे बढ़ते हुए मुख्य़मन्त्री ने पुरानी और बंद पड़ी फैक्ट्रियों के जीर्णोद्धार की भी घोषणा की है. जिससे राज्य को फायदा होगा. क्योंकि एक नयी फैक्ट्री को स्थापित होने में जितना पैसा, संसाधन और समय लगता है, उससे कम पैसे, संसाधन व समय में पुरानी बंद फैक्ट्री को पुनर्जीवित किया जा सकता है (इसमें कुछ अपवाद हो सकते हैं). इससे जहां लोगों को रोजगार मिलेगा. वहीं राज्य के औद्योगीकरण माहौल को भी ठोस दिशा मिलेगी. जिससे राज्य के आर्थिक विकास को बल मिलेगा.

बंद फैक्ट्रियों के संचालन से, उससे जुड़े लोगों को फिर एक बार मिलेगा रोजगार

ज्ञात हो, राज्य भर में बंद प़ड़ी कई फैक्ट्रियों के जीर्णोद्धार के लिए लंबे समय से मांग होती रही है. ऐसी फैक्ट्रियां तकरीबन सभी जिलों में मौजूद है. इन फैक्ट्रियों के पुनर्जीवन से राज्य के हजारों परिवार व कामगार रोजगार से जुड़ेगे. ज्ञात हो पूर्व की सरकारी नीतियों व कोरोना संक्रमण के कारण राज्य भर में कई फैक्ट्रियां बंद हुई है. जिससे बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हुए हैं. जाहिर है कि जब फिर से इनका संचालन होगा तो उन फैक्ट्रियों से जुड़े लोगों को भी फिर एक बार रोजगार मिलेगा. 

रघुवर सरकार मोमेंटम झारखंड के बजाय बंद फैक्ट्रियों के पुनर्जीवित करने की इच्छाशक्ति दिखाई होती, तो राज्य की तस्वीर अलग होती 

झारखंड गठन को 21 साल पूरे होने को है. लेकिन अभी तक किसी भी सरकार ने बंद पड़ी फैक्ट्रियों के पुनरूद्धार के बारे में नहीं सोचा. भाजपा की पूर्व की रघुवर सरकार ने मोमेंटम झारखंड, हाथी उडा़ने में करोडों रूपये फूंक दिए. लेकिन बंद फैक्ट्रियों के ऊपर एक रूपये भी खर्च करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखा पाए. ना ही इस सम्बन्ध में कोई नीति ही बनाई गयी. अगर इस दिशा में पहले सोचा गया होता तो राज्य में औद्योगिक परिदृश्य कुछ और होता. 

बहरहाल, मुख्यमन्त्री हेमन्त सोरेन ने अपने नेतृत्व और साहासिक फैसलों से राज्य में विकास की एक नयी मोटी लकीर खींची है. निसंदेह इससे राज्य में औद्योगिक विकास को बल मिलेगा. और राज्य के लोगों को राज्य में ही गुणवत्तायुक्त रोजगार प्राप्त होंगे. 

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