बाबूलाल झारखण्ड व स्वंय के लिए फजीहत उतपन्न कर रहे हैं, भाजपा रिटर्न जैसे प्रोपगेंडा के बाद अब डीजीपी पर लगाया अनर्गल आरोप

Share on facebook
Share on telegram
Share on twitter
Share on whatsapp

झारखण्ड व स्वयं के लिए फजीहत उतपन्न करने वाले बाबूलाल को क्या पता नहीं – चुनी हुई 48 विधायकों का समर्थन बहुमत के 41 से ज्यादा होता है? बाबूलाल क्यों भूल गए कि उनकी ऐसी ही झारखण्ड विरोधी सोच के कारण JVM के 6 विधायकों को भाजपा द्वारा खरीदा गया था. 

राँची : झारखण्ड प्रदेश में स्थिर व लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई एक संवेदनशील सरकार के लिए प्रदेश भाजपा व उसके नेतागन फजीहत उत्पन्न करने से नहीं चुक रहे. सरकार गिराने के संदर्भ उनके द्वारा होने वाले कई प्रयासों से झारखण्ड के मूल समस्याओं के स्थाई निदान खतरे में पड़ता रहा है. नतीजतन एक तरफ झारखण्ड के आदिवासी समेत सभी वर्गों मूलवासियों के हक अधिकार के लिए शुरू हुए अभियान खटाई में पड़ती रही है तो वहीं बेरोजगार समेत झारखण्ड में विकास की खिंची जा रही रेखाओं की गति में भी गिरावट हुआ है.

इस सन्दर्भ में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का प्रयास तो फिर भी समझ में आता है, क्योंकि वह झारखंडी नहीं हैं. लेकिन, बाबूलाल मरांडी जैसे झारखंडी नेता का ऐसा प्रयास चौंकाने वाला है. ऐसे में राज्य के लिए गंभीर सवाल है क्या किसी झारखंडी नेता में झारखंडी परम्परा व संस्कारों से अधिक प्रबल मौकापरस्ती हो सकता है ? ज्ञात हो, तत्कालीन भाजपा सरकार और उनके मंत्री – विधायकों की कार्यशैली से सोशल मीडिया में लगातार फजीहत हुई है. कभी किसी भाजपा विधायक पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा, तो किसी विधायक के वायरल अश्लील वीडियो से राज्य की फजीहत हुई है.

भाजपा के स्वघोषित विधायक दल नेता बाबूलाल मरांडी झारखण्ड के विकास की रोकने में सबसे आगे 

इनसे अलग भाजपा के स्वघोषित विधायक दल नेता बाबूलाल मरांडी इस फेहरिस्त में ज्यादा ही आगे निकल गये. बाबूलाल अपने ही कामों से अपनी फजीहत कराने का रास्ता अख्यितार कर चुके हैं. 2006 के बाद भाजपा नीतियों के विरोध में जब उन्होंने झारखण्ड विकास मोर्चा (जेवीएम) का गठन हुआ, तो उनके कामों की तारीफ हुई. 2014 में राज्य की जनता ने उनकी पार्टी से 8 विधायकों को सदन में भेजा. बाद में विशवास खो चुके बाबूलाल अपनी महत्वाकांक्षा की पूर्ति में दोबारा भाजपा में रिटर्न हुआ.

वर्तमान हेमन्त सोरेन के स्थिर सरकार पर अनर्गल आरोप लगा वह खर्खंड के विकास की गति का फजीहत क्र करने से नहीं चुक हैं. लेकिन अपने मंशा में नाकामयाब अब राज्य के पुलिस मुखिया यानी डीजीपी को वेतन न मिलने का आरोप लगाकर पूरा कर दिया. जो नैतिकता के परिधि में एक झारखंडी नेता के विचारधारा पर प्रश्न चिन्ह अंकित कर सकते है.

भाजपा पर अपने विधायकों को खरीदने और कुतूबमीनार से कूदने वाले बाबूलाल हमेशा हुए हैं ट्रोल

सर्वविदित है कि जेवीएम सुप्रीम रहते बाबूलाल मरांडी ने भाजपा नेताओं पर क्या-क्या बयान दिए हैं. मई 2017 का उनका बयान शायद झारखण्ड नहीं भूल सकता. उन्होंने कहा था कि वह कुतूबमीनार से कूदना पसंद करेंगे, लेकिन दोबारा भाजपा में शामिल नहीं होंगे. 2014 में जब उनके पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ जीतने वाले छह विधायकों को भाजपा द्वारा खरीदा गया, तो उन्होंने भाजपा पर विधायकों के खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया. जनवरी 2020 के पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कई विवादित बयान दिये. लेकिन फरवरी 2020 में दोबारा भाजपा में शामिल हने के बाद वे लगातार ट्रोल हुए हैं और उनकी फजीहत होती रही है. 

सरकार और मुख्यमंत्री हेमन्त पर अनर्गल आरोप लगाने से उन्हें लगातार हो रहा फजीहत

बाबूलाल भाजपा में क्या गये, मानो उनके लिए भाजपा पाक-साफ़ दल हो गया. उसके बाद बिना लोकतांत्रिक पद्धति से मुख्यमंत्री बनाने के आस में वह लोकतांत्रिक गठबंधन सरकार और मुख्यमंत्री पर अनर्गल आरोप लगाते रहे हैं. सारी मर्यादाओं को तार-तार करते हुए वे मुख्यमंत्री के परिवार तक पहुंच गये हैं. लेकिन उनके पूर्व की करतूतों को कारण जनता उनकी बातों को गंभीरता से नहीं ले रही है. अब जब उन्होंने मुख्यमंत्री पर खनन लीज मामले में कथित अनर्गल आरोप लगाकर गांव-गांव जाकर यह बोलना शुरू कर दिया है कि हेमन्त सरकार कभी भी गिर सकती है. तो उनका फजीहत होना तय है. 

बाबूलाल शायद भूल गये कि उनकी सोच के कारण ही उनके तत्कालीन पार्टी के 6 विधायकों ने धोखे से उन्हें छोड़कर भाजपा का दामन थामा. इससे रघुवर दास सरकार के पास 43 विधायक हो गये. यह सरकार पांच साल सत्ता में रही. वहीं, हेमन्त सोरेन सरकार के पास तो कुल 48 विधायक है. ऐसी सरकार जो राज्य की जनता के लिए काम कर रही है. तय है कि सरकार न केवल पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी, बल्कि 2024 का चुनाव भी प्रचंड बहुमत से जीतेगी. 

डीजीपी के वेतन और उनके कार्यकाल पर सवाल उठाने से मिले बयान से फजीहत होना तय था 

अब अपनी व झारखण्ड की फजीहत कराने हेतु बाबूलाल ने डीजीपी पर अनर्गल आरोप लगाया है. उनहोंने कहा है कि ‘DGP बिना वेतन काम कर रहे हैं तो कोयला– बालू की ही चोरी होगी’. उन्हें जैसा जवाब मिला, उससे उनका फजीहत होना तय था. राज्य सरकार की ओर से बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह जजमेंट के तहत ही वर्तमान डीजीपी नीरज सिन्हा को 2 वर्षों का निर्धारित कार्यकाल दिया गया है. यह कार्यकाल आगामी 31 फरवरी 2023 तक प्रभावी है. इस तरह डीजीपी की रिटायरमेंट की तारीख 11 फरवरी 2023 है. सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट कहा गया है कि डीजीपी को अप्रैल महीने तक के वेतन का भुगतान हो चुका है.

Leave a Replay

DON’T MISS OUT ON NEW POSTS

Don’t worry, we don’t spam. Click button for subscribe.