मोदी सरकार

काले एजेंडे को संकट के दौर में भी आगे बढ़ा रही है मोदी सत्ता

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काले एजेंडे
पुलिस अवैध रूप से पूछताछ के नाम पर लोगों को उनके घरों से रिमांड पर ले रही है।

संकट के दौर में भी अपने काले एजेंडे को बढ़ाती मोदी सत्ता

इस नाकाबंदी में, सामान्य लोग और राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ता अपने घरों में बंद हैं। इसका फायदा उठाते हुए मोदी सरकार लगातार अपने काले एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगों की आड़ में पुलिस अवैध रूप से पूछताछ के नाम पर लोगों को उनके घरों से रिमांड पर ले रही है। और जेल भेजने का यह सिलसिला लगातार जारी है।

इस मामले में अब तक जिन 800 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें ज्यादातर मुस्लिम हैं। 22 मार्च के बाद से, 25-30 लोग केवल पूर्वोत्तर दिल्ली से गिरफ्तार किए गए हैं। झूठे गिरफ्तारी की यह श्रृंखला न केवल दिल्ली बल्कि उत्तर प्रदेश में भी जारी है। जामिया से लेकर अलीगढ़ विश्वविद्यालय तक के कई छात्र गिरफ्तार किये गए हैं।

बिना वारंट के गिरफ्तारी

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस गुंडों के रूप में घरों में प्रवेश करती है और बिना वारंट के गिरफ्तार करती है। कई बार उस व्यक्ति को सीधे जेल लेकर जाती है जहाँ आज कल ड्यूटी मजिस्ट्रेट लगातार बैठा रहता है। जो पुलिस के मुताबिक़ आदेश जारी करती है। उनके वकीलों तक को जानकारी नहीं होती है कि गिरफ्तार व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है या औपचारिक तौर पर गिरफ़्तार किया गया है।

दूसरी ओर, (on the other hand,) जिन लोगों ने दंगों को भड़काने में स्पष्ट भूमिका निभाई थी, जिनके आग लगाने वाली बयानों के दर्जनों वीडियो हैं, प्रेस की रिपोर्ट है, सैकड़ों गवाह, जिनमें खुद पुलिस भी शामिल है, गिरफ्तार होने से बहुत दूर हैं, उन्होंने नोटिस तक जारी नहीं किये गया है। दूसरे शब्दों में, (in other word,) कहें तो उनसे पूछताछ करना शायद पुलिस के “स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल” में शामिल नहीं है।

मसलन, (In conclusion,) मोदी सत्ता के लिए, देश के लाखों लोगों के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करना पहली प्राथमिकता नहीं है। वह सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने और अपने काले एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कोरोना जैसे संकट का भी उपयोग करने से नहीं चुक रही है। वास्तव में, यह दंगों की जांच की आड़ में सीएए-एनआरसी आंदोलन को शांत करने का मामला है। क्योंकि वह जानते हैं कि जैसे ही नाकाबंदी खत्म होगी, एनपीआर-एनआरसी की आवाज़ फिर से सामने आएगी।

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