आदिवासी अस्मिता के लिए पहली सजग सरकार, सरना कोड लागू हो, मुख्यमंत्री कर रहे हर प्रयास

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मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन आदिवासी अस्मिता के लिए कर रहे हर संभव प्रयास. सरना धर्म कोड पर केंद्र की भाजपा सरकार साथ दें, तो झारखण्ड सहित अलग राज्यों में रह आदिवासियों को मिल सकेगी अपनी पहचान

रांची : आदिम परम्परा के तहत ईमानदारी से सादा जीवन जी रहे झारखण्ड के जनजातीय समाज. इस समाज के लोग विकास की मुख्य धारा से जुड़कर हर क्षेत्र में स्वयं को साबित कर रहे हैं. राजनीति से लेकर प्रशासनिक क्षेत्रों तक में इस समाज के लोगों ने अपनी अनूठी छाप छोड़ी है. लेकिन विडंबना है कि इसके बावजूद भी यह समाज अपनी पहचान के लिए लम्बे वर्षों से अपने अस्तित्व के संघर्ष कर रहे हैं. इनके संघर्ष में प्रमुखता से शामिल हैं, जनगणना कॉलम में अलग सरना धर्म कोड की मांग. 

राज्य गठन को करीब 21 वर्ष पूरे होने को है. इस लम्बे कालखण्ड में शायद ही किसी झाऱखंड की किसी सरकार ने आदिवासी अस्मिता के लिए सरना धर्म कोड लागू कराने की दिशा में कोई प्रयास किया हो. लेकिन, मौजूदा सत्ता पूरी तरह से समर्पित हो जनजातीय जनमानस के भविष्य व अस्तित्व के लिए काम करती दिख रही है. हेमन्त सरकार राज्य के इतिहास में पहली ऐसी सरकार है, जिन्होंने इस दिशा में निःस्वार्थ समर्पित प्रयास किया है. यदि केंद्र की भाजपा सरकार हेमन्त सरकार के इस फैसले में साथ देती है, तो झारखण्ड सहित अन्य राज्यों में रह रहे आदिवासियों को उनकी संस्कृति-परंपरा के मद्देनजर अपनी पहचान मिल पाएगी. 

सीएम अब राष्ट्रपति को अवगत करायेंगे कि आदिवासी अस्मिता के लिए सरना धर्म कोड है जरूरी

सरना धर्म कोड जल्द लागू हो, इसके लिए झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं. प्रयास की शुरूआत तो विधानसभा के  विशेष सत्र में पारित एक प्रस्ताव से हुई है. लेकिन, सरना धर्म कोड की मांग के आलोक में वकालत तो वे विपक्ष के नेता रहते हुए करत रहे हैं. मुख्यमंत्री अब राष्ट्रपति को भी यह संदेश देना चाहते हैं कि आदिवासी अस्मिता के लिए सरना धर्म कोड जरूरी है. इसी कड़ी में गुरूवार को सीएम के निर्देश पर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल रमेश बैस से मिलकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा हैं.

भाजपा ने बनायी दूरी, तो सदस्यों ने कहा, जनगणना कॉलम में हो सरना कोड

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में भाजपा को छोड़ कमोवेश राज्य की सभी राजनीति पार्टियों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए. प्रतिनिधिमंडल में जेएमएम से स्टीफन मरांडी, दीपक बिरूआ, विकास मुंडा, कांग्रेस से बंधु तिर्की, राजेश कच्छप, नमन विक्सल कोंगाड़ी, आजसू से लंबोदर महतो, आजसू के केंद्रीय प्रवक्ता देवशरण भगत के अलावा आरजेडी और वाम दल के लोग उपस्थित थे. प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों ने एक स्वर में राज्यपाल से कहां, कि आदिवासियों की भाषा-संस्कृति, उनकी अस्मिता, उनके सरना स्थल की सुरक्षा और पहचान बचाए रखने के लिए जनगणना कॉलम में अलग सरना कोड की आवश्यकता है.

सही जनगणना होने के साथ विकास फंड का हो सकेगा सही उपयोग

बता दें कि झाररखण्ड राज्य का अपना एक अलग इतिहास रहा है. जल-जंगल-जमीन के लिए आदिवासियों द्वार लड़ी गयी लड़ाई ने पूरे देश में एक अलग छाप छोड़ी है. लेकिन इस छाप के बावजूद भी जनजातीय समाज को अपनी अलग पहचान नहीं मिल पायी है. ऐसे में अब जरूरत है कि जनजणना में अलग सरना कॉलम हो. जनगणना में अलग सरना कॉलम आने से जनजातीय समाज को उनकी समस्याओं के निराकरण में लाभप्रद साबित होगा. आदिवासियों की सही जनगणना हो पाएगी. जिससे केंद्र सरकार द्वारा जनजातीय समाज के विकास के लिए दिया जाने वाले फंड में पारदर्शिता आएगी और उसका सही उपयोग हो पाएगा. 

सरना धर्म कोड के लिए मुख्यमंत्री ने किये हैं कई व्यक्तिगत प्रयास. जनजातीय समाज के पहचान के मद्देनजर मुख्यमंत्री द्वारा बीते एक वर्ष में लिए गए अहम फैसले 

  • 11 नवंबर 2020, झारखण्ड विधानसभा के बुलाये एक दिवसीय विशेष सत्र में ‘सरना आदिवासी धर्म कोड’ का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था. जिसे बाद में केन्द्र के पास विचार के लिए भेजा गया. केंद्र अलग आदिवासी समाज के हित में फैसला लेगी, तो आगामी जनगणना में सरना आदिवासी धर्म कोड का अलग से कॉलम शामिल किया जा सकेगा.
  • 26 सितम्बर 2021, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मिले. इस दौरान जातीय जनगणना और सरना धर्म कोड को जनगणना में शामिल करने की मांग हुई.
  • बीते कुछ माह पहले हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में भी सरना धर्म कोड का मुद्दा उठा था. उस दौरान यह फैसला हुआ था कि अब राष्ट्रपति को सरना कोड के लिए एक ज्ञापन सौंपा जाएगा. इसी कड़ी में गुरूवार (23 दिसम्बर) को सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मिलकर एक ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम सौंपा है.

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