29 दिसम्बर 2020, एक वर्ष झारखंड अपने महापुरुषों के सपनों को पूरा करते हुए जिया

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सौगात

29 दिसम्बर, झारखंड राज्य के लिए ठीक वैसा ही महान पल हो सकता है जैसा आजादी के मतवालों का देश आज़ाद कराने वाली धुन में जीने वाले पल।

तेजस्वी सम्मान खोजते नहीं गोत्र बतला के,

पाते हैं जग में प्रशस्ति अपना करतब दिखला के।

हीन मूल की ओर देख जग गलत कहे या ठीक,

वीर खींच कर ही रहते हैं इतिहासों में लीक। 

-राष्ट्रकवि रामधारी सिह दिनकर

29 दिसम्बर 2020, झारखंड राज्य के लिए ठीक वैसा ही महान पल हो सकता है जैसा आजादी के मतवालों का देश आज़ाद कराने वाली धुन में जीने वाले पल। निस्संदेह झारखंड के मौजूदा सत्ता का पहला बरस कोरोना महामारी के अभेद चक्रव्यूह को भेदने का नाम रहा है। यह दिवस मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व राज्य की जनता का पोरुषगाथा का साक्ष्य है। यह तारीख न केवल झारखंड के 20 साल का व्यस्क होने का गवाह है बल्कि झारखंड के फिर से सँभल कर अपने लक्ष की ओर अग्रसर होने का ऐतिहासिक पग भी है।

बुनियादी बड़ी लकीरें खींचने ने कामयाब रही सरकार

झारखंड ने हेमंत सरकार के पहले बरस के कार्यकाल में न केवल कोरोना को संसाधन के अभाव में परास्त किया, कुछ ऐसे ऐतिहासिक व बुनियादी बड़ी लकीरें खींचने ने कामयाब रहा, जो झारखंड के भविष्य को सवारने में कारगर भूमिका अदा करेगी। पहली बार झारखंड में यह काल खंड इसलिए भी सुकून देता है कि कोई सरकार मज़बूती के साथ भगवान बिरसा मुंडा या आदरणीय दिशोम गुरू शिबू सोरेन जैसे तमाम महापुरुषों के सपनों-अरमानों को साकार करने के तरफ ईमानदारी व पारदर्शिता के साथ से बढ़ी है।

सामाजिक वर्गों के बंधन तोड़ते हुए दमित-दलित-गरीब के समस्याओं का हरण

इस युवा सरकार में झारखंड में पहली बार सामाजिक वर्गों के बंधन तोड़ते हुए दमित-दलित-गरीब के समस्याओं को हरण करने के तरफ निष्पक्षता से बढ़ी। निस्संदेह इस ‘युवा सरकार’ ने युवा शब्द के पर्याय संकल्प, शक्ति, बदलाव व विकास को चरितार्थ किया है। इस सरकार ने राज्य की मिट्टी में ट्रेन कनेक्टिविटी, पर्यटन की ऐसी लकीर खींची कर रोज़गार के सम्भावना पैदा किए गए, जहाँ राजनीतिक द्रोनाचार्यों को निशब्द होना पड़ा। और राज्य में यह पहला मौका है जब हम गर्व से कह सके कि भूख से एक भी मौतें नहीं हुई। 


झारखंड हर क्षेत्र में सदियों से परिपूर्ण रहा है। जरूरत थी तो केवल ऐसे नेतृत्व की जो इसे लूट से परे एक अलग गति व दिशा दे सके। मौजूदा युवा सरकार ने झारखंड में ऐसा वातावरण तैयार किया जहाँ तमाम वर्ग राज्य में नौकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, पर्यटन, महिला सुरक्षा, कुपोषण से मुक्ति जैसे उज्ज्वल भविष्य के सपने को साकार होता देख रहे हैं। जिस सच्चाई पर हार्वर्ड विश्वविद्यालय जैसे महान संस्थान ने हेमंत सोरेन को आमंत्रित कर मुहर लगाई है। साथ ही सरकार का अपने शपथ ग्रहण 29 दिसम्बर के दिन ही लेखा-जोखा प्रस्तुत करना दर्शाता है कि देश में अभी लोकतंत्र का सूर्य डूबा नहीं है।

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