विकास की शुरूआत कर चुके हैं सीएम

स्थानीय को 25 करोड़ का टेंडर, उद्योग और व्यापार से जोड़कर विकास की शुरूआत कर चुके हैं सीएम

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जानिये, 27 प्रतिशत आबादी वाली जनजाति समाज को लेकर हेमन्त सोरेन की क्या है सोच? सत्ता में रहकर कैसे करना चाहते हैं इनका विकास

इससे पहले शिक्षा, जनजाति भाषा विकास, आदिम जनजातियों तक विकास पहुंचाने का कार्य कर अपनी सोच स्पष्ट कर चुके है मुख्यमंत्री

रांची : विकास के तमाम दावों के बावजूद झारखण्ड की जनजाति समाज आधुनिकता से काफी पीछे है. जनजातियों की शिक्षा, इनकी भाषा की क्या स्थिति हैं, यह किसी से छिपी नहीं है. ऊपर से आधुनिकता की पहचान माने जाने वाले उद्योग और व्यापार से भी जनजाति समाज पूरी तरह से अछूते है. स्वंय जनजाति समाज से आने वाले मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन इस दर्द को भलीभांति जानते हैं. यही कारण है कि सोमवार को उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया है, जो पिछले 20 वर्षों में किसी भी सीएम ने सोच भी नहीं था. फैसला है, राज्य के वंचित जनजाति समाज के लोगों को व्यापार एवं उद्योग क्षेत्र से जोड़ कर उन्हें अपने भविष्य सुधारने के लिए बेहतर अवसर प्रदान करने का. 

हालांकि मुख्यमंत्री ने अपनी इस सोच को विधानसभा चुनाव के ठीक पहले अपने चुनावी घोषणापत्र से ही दे दिया था. जब उनकी पार्टी झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने सत्ता में आने पर स्थानीय लोगों को 25 करोड़ तक का टेंडर देने की बात की थी. सत्ता में आने के बाद सीएम हेमन्त ने जनजातियों के शिक्षा, इनकी भाषा का विकास और विशेषकर आदिम जनजाति तक पहुंचने का जो काम किया है, वह उनकी सोच को और भी प्रमुखता से स्पष्ट करती है. 

सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए वंचित आदिवासी समाज के लोगों को व्यापार एवं उद्योग क्षेत्र से जोड़ना चाहते है सीएम

मंगलवार को एक सेमिनार में सीएम ने कहा है कि राज्य में एक बड़ी आबादी (करीब 27 प्रतिशत) होने के बाद भी जनजाति समाज की व्यापार या उद्योग के क्षेत्र में भागीदारी मात्र 2.5 प्रतिशत है. लेकिन उनकी सरकार अब इसकी समीक्षा कर रही है कि कैसे इस कमी को पाटने का काम हो. सरकार का ध्यान आदिवासियों और स्थानीय लोगों के विकास पर केंद्रित है. इसमें एक प्रयास तो यह है कि सरकार सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए वंचित आदिवासी समाज के लोगों को व्यापार एवं उद्योग क्षेत्र में अवसर प्रदान करना चाहती है. साथ ही सरकार का लक्ष्य है कि आदिवासियों को खनिज आधारित उद्योगों, पर्यटन, संस्कृति, कृषि और खेल, जहां विकास की ज्यादा संभावना है, उससे जोड़ा जाए. 

25 करोड़ तक टेंडर स्थानीय को देने से भी मिलेगा फायदा

इससे पहले हेमन्त सरकार में 25 करोड़ रुपये तक का टेंडर स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित करने की पहल हो चुकी है. मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण विभाग अंतर्गत इस प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति बीते वर्ष जुलाई माह में ही कर दी थी. सीएम का मानना है कि ऐसा कर टेंडर कार्यों में स्थानीय निवासियों (विशेषकर जनजाति लोगों) की भागीदारी सुनिश्चित करने और उनको रोजगार का उचित अवसर प्रदान करके उनके सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान किया जा सकेगा. 

बेहतर शिक्षा देकर जनजातियों को उत्थान चाहते है हेमन्त सोरेन

सीएम हेमन्त सोरेन का मानना है कि राज्य गठन के बाद से जनजाति व दलित समाज के लोगों को बेहतर शिक्षा नहीं मिल सकी है. शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी सुधार की काफी आवश्यकता है. उनकी सरकार सभी के सहयोग से इनके लिए बेहतर शिक्षा को प्रयासरत है. आदिवासी समुदाय के बच्चों को बेहतर शिक्षा के उद्देश्य से राज्य में पहली बार ट्राईबल यूनिवर्सिटी की स्थापना की जा रही है. झारखण्ड देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां जनजाति समाज के होनहार छात्र-छात्राएं को उच्च शिक्षा हेतु विदेशों में पढ़ाई के लिए भेजने की पहल की है. मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय स्कॉलरशिप के तहत सरकार यह पहल कर रही हैं. 

यहां के एसटी-एससी युवाओं को रोजगार से जोड़ने निमित्त 50,000 से लेकर 25 लाख रुपये तक का ऋण बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है. सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी बेहतर शिक्षा सुविधा मुहैया हो, इसके लिए 4500 स्कूलों को नए रूप से सुसज्जित करने का काम किया जा रहा है.

पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को संरक्षित करने के साथ कई तरह हेमन्त सरकार में हुए है पहल. 

जनजाति भाषाओं के संरक्षण को लेकर भी हेमन्त सोरेन ने बड़ी पहल की है. सीएम ने पहले ही कहा है कि जनजाति समुदाय की कला, संस्कृति, परंपरा और भाषाओं को संरक्षित करने के प्रति उनकी सरकार प्रतिबद्ध है. इसके लिए उनकी सरकार में जनजातियों की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को और मजबूत की जाएगी. 

जानिये, इसके लिए सीएम क्या-क्या पहल करने का काम किये हैं.

  • जनजातीय भाषाओं के लिए स्वतंत्र एकेडमी का गठन किया जाएगा. 
  • कोल्हान पोड़ाहाट क्षेत्र में मानकी और मुंडा के बंदोबस्ती का अधिकार यथावत रहेगा. इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी. 
  • जनजातियों भाषाओं को विकसित और संरक्षित करने के लिए सीएम ने “हो”, “मुंडारी” और “उरांव/कुडूख” को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने को लेकर पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिख चुके हैं. 
  • पहली बार हेमन्त सरकार में ही जनजाति समाज के लिए जनगणना में अलग सरना कोड की मांग का प्रस्ताव विधानसभा से पास कर केंद्र को भेजा गया है. 
  • तथाकथित भाजपा नेताओं के विरोध के बावजूद जनजाति सलाहकार परिषद नियमावली बनायी गयी है. 
  • पहली बार संथालपरगना स्थित गोपीकांदर प्रखंड की पहाड़ियों पर निवास करनेवाली पहाड़िया जनजाति तक विकास का काम पहुंचाया जा रहा है. लुप्तप्राय पहाड़िया जनजातियों गांवों की मैपिंग की गयी है, ताकि इनकी जरूरतों की प्राथमिकता तय किया जा सके.
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