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विपक्ष के कटौती प्रस्ताव का ज़ोरदार विरोध

जनकल्याण योजनाओं पर विपक्ष के कटौती प्रस्ताव का झामुमो विधक द्वारा ज़ोरदार विरोध 

सरकार द्वारा चलाये जा रहे जनकल्याण योजनाओं पर विपक्ष के कटौती प्रस्ताव पर गिरिडीह के झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का जोरदार विरोध। प्रस्तुत है उनके द्वारा रखे गए तथ्य :

फरवरी 2019, सीपीआर की रिपोर्ट के अनुसार झारखण्ड की एक भी एचएससी (HSC), पीएससी (PSC) व सीएससी (CSE) इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैण्डर्ड की नियूनतम आहर्ता पूरा नहीं करती है। पिछले 5 वर्षों में स्थिति यह है कि 8000 में केवल 5500 एचएससी (HSC), 1200 में महज 650 पीएससी (PSC) व 320 में सिर्फ 260 सीएससी (CSE) ही हैं। जिसके मायने हैं कि पिछले 5 वर्षों में चिकित्सा व स्वास्थ्य के साथ केवल खिलवाड़ हुआ है।

पिछले वित्त वर्ष में 4131 करोड़ का प्रावधान हुए, लेकिन बाद में उसे पुनारक्षित कर 3636 करोड़ कर दिया गया। जबकि अनुमानित व्यय 3200 करोड़ का ही रहा, 500 करोड़ मोमेंटम झारखंड के हाथी की तरह उड़ा दिया गया। बजट का संरचना निर्माण में महज 25-30 प्रतिशत की खर्च किये गए और जो भवन बने उनमें पद सृजित ही नहीं किया गया। मेरे क्षेत्र गिरिडीह में 17 पीएससी (PSC) हैं,  लेकिन एक भी पद सृजित नहीं हैं, एएमएम के माध्यम से उसे संचालित करने का प्रयास जारी है। वर्ल्ड विजन व आईएमएफआर (IMFR) की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार चाइल्डवेलबीइंग के मामले में झारखण्ड नीचे से दूसरे स्थान पर है। कुपोषित बच्चे संस्थागत प्रसव के मामले में भी राज्य अतिपिछड़ा है। यहाँ तक कि 108 एम्बुलेंस की भी स्थिति बदतर है।

अगस्त 2018 में शुरू हुए आयुष्मान योजना की स्थिति – प्रीमियम प्रति परिवार – 900 रूपए, कुल परिवार – 6041931, विमाकृत परिवार – 5715501 और 612 अस्पताल। जबकि प्रीमियम देय राशि  – 515 करोड़ रूपए प्रति वर्ष, लाभ लेने वाले लोग 451000 हैं। और योजना के तहत अस्पतालों को दी गयी राशि मात्र 444 करोड़ है। बचे हुई अंतर की राशि की क्या स्थिति है जांच के विषय हैं। साफ़ है कि पिछली सरकार ने केवल कॉर्पोरेट व पूँजीपतियों को ही लाभ पहुंचाने का काम किया है। 

आयुष्मान योजना के अंतर्गत 8 लाख तक के आय वालों तक को छुट दे छूटे हुए लोगों को इससे जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री का आभार प्रकट किये। क्योंकि उनका मानना है कि यह झारखण्ड के गरीब जनता के हित में है और यह 92 फीसदी जनता को इस योजना से जोडती है। साथ ही चिकत्सकों को अधिक भुगतान देना डिमांड व सप्लाई के गैप को भी पूरा करती है, जो जनता के लिए हितकर है। 

विपक्ष पर चुटकी लेते हुए कहा कि विपक्ष कोरोना पर सदन में बड़े व्याकुल व परेशान दिखे, लेकिन इससे निपटने के लिए केंद्र से कोई सहायता का आग्रह न करना जनता के प्रति इनके संवेदना को स्पष्ट करने के लिए काफी है। जबकि इन्हें सरकार से यह कहना चाहिए था कि यह राष्ट्रीय आपदा का विषय है चलिए मिलर केंद्र से सहायता की आग्रह करते हैं, यह नहीं कर ठीक इसके उलट कटौती का प्रस्ताव लाये हैं। यह दिलचस्प इसलिए भी है कि इन्डियन स्टैण्डर्ड के अनुसार 1000 लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए जबकि 18000 लोगों पर एक है। 

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