आरक्षण

केंद्रीय सत्ता के लिए आरक्षण के मायने नहीं तो कोयला-लोहा भी नहीं 

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केंद्रीय सत्ता सरकारी संस्थानों को बेच आरक्षण ख़त्म करना छाती है

केंद्रीय सत्ता द्वारा जनता के कमाई पर खड़ी सरकारी संस्थाओं को बेचने के फैसले ने, देश के ग़रीब जनता व राज्यों के समक्ष आरक्षण को लेकर दसियो सवाल खडे कर दिये है। बुद्धिजिवियों का मानना है कि, संविधान की थ्योरी को बीजेपी पलटना चाहती है, जहाँ हाशिये पर पडे कमजोर तबके को मुख्यधारा से जोड़ने के लिये आरक्षण ज़रुरी है। तो कुछ का मानना है कि अगड़ों को 10 फीसदी आरक्षण पांसे फेंके जाने के बावजूद भी भाजपा को फ़ायदा न मिल पाना है, क्योंकि अंबेडकर की थ्योरी के अनुसार आरक्षण की लकीर सीधे सीधे नौकरी से जा जुडती है, और भाजपा की नीतियाँ नौकरी के तमाम रास्ते बंद करती है। 

इसलिए भाजपा तमाम लकीरों के सामानांतर बेरोज़गार युवा आक्रोश से खुद का पीछा छुड़ाने के लिए देश में ऐसी लकीरें खींच रही है। ऐसे में उन युवाओं के भविष्य पर सवाल खड़े होते हैं, जो अपनी पाई-पाई जोड़ कर सरकारी नौकरियों के फार्म भरते रहे हैं। और वही सत्ता जिसके वे वोटर हैं, पूरे सिस्टम को हड़प कर सरकारी संस्थाओं में सृजित होने वाली नौकरियों के तामाम लकीरें मिटाने की दिशा बढ चुकी है, वह अपने भविष्य को कैसे देखे। यानी जिंदगी जीने की जद्दोजहद करती इन देश के संभावनाओं को मोदी की राजनीतिक सत्ता ने विराम लगा दिया। 

एक तरफ देश का भविष्य तो केंद्रीय सत्ता ने अपनी विलासिता तले हडप लिया। और मंदी तले सत्ता की विलासिता बरकरार रहे इसके लिए, भारत का तकदीर बदलने के लिए ज़रुरी बता देश की तमाम सरकारी संस्थाओं को बेचने की दिशा में सत्ता बढ़ चली है। तो ऐसे में गंभीर सवाल है कि देश के आधे से अधिक आरक्षण की श्रेणी में आने वाले उन पढे लिखे बेरोज़गार युवाओं का क्या होगा, जिसे संरक्षण हमारा संविधान देता है। जब निजी संस्थाओं में आरक्षण का जिक्र ही नहीं है, तो यह कैसे संभव होगा जहाँ देशवासियों को बिना फायदा पहुँचाए निजी संस्थाएँ देश का संसाधन का प्रयोग करने की स्थिति में आ जाए।  

मसलन, इन सवालों ने देश के राज्यों के समक्ष एक कशमकश जैसी परिस्थितियां उत्पन्न कर रही है। जहाँ वे अपने संसाधन देश हो देशवासियों के हित में देते थे, लेकिन अब भविष्य में वह स्थितियाँ नहीं रहने वाली है। ऐसे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुला कह दिया है कि यदि आरक्षण नहीं तो झारखंड भी अपने कोयला, लोहा जैसे तमाम सम्पदा व संसाधन केंद्र को नहीं देंगे।

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