Breaking News
Home / News / Jharkhand / झारखंडी संघी की दुःख भरी दास्ताँ, रघुवर अंतिम भाजपाई मुख्यमंत्री 
झारखंडी संघी मुख्यमंत्री

झारखंडी संघी की दुःख भरी दास्ताँ, रघुवर अंतिम भाजपाई मुख्यमंत्री 

Spread the love

झारखंडी संघी: रघुवर झारखंड के अंतिम भाजपाई मुख्यमंत्री  

( मुख्यमंत्री से दुखी झारखंडी संघी …जय माँ भारती )

नाम न जाहिर करने की अपील करते हुए अपमानित महसूस करते संघी कहते हैं, मुख्यमंत्री जी के आगे आत्मसमर्पण करनेवाले संघ के नीति-निर्धारकों व पदाधिकारियों को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए, क्योंकि इन्होने संघ के निष्ठावान व संघ के लिए मर-मिटनेवाले स्वयंसेवकों से ज्यादा दूसरे दलों से आयतित दलबदलूओं, यौन-शोषकों, हत्या व दवा घोटालों के आरोपियों पर ज्यादा भरोसा जताया। जबकि अपमानित उसे किया जिन्होंने संघ की जड़ें फैलाते हुए भाजपा को उस स्तर तक पहुंचाया, जिसकी छाँव में ये आज खुद के वारे-न्यारे कर रहे हैं। यहाँ तक जिन भाजपा और संघ से जुड़े लोगों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आवाज़ उठा भाजपा व संघ का मान बढ़ाया, उसे एक अदना सा टिकट के लिए नाक रगड़ने की बात आ गयी।

इसके जीते जागते प्रमाण सरयू राय है जिन्होंने कभी भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष रहकर भाजपा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2019 में यह क्या हो रहा है, निरसा के भाजपा प्रदेश प्रशिक्षण प्रमुख गणेश मिश्र को टिकट न देकर, दो बार जमानत गवां चुकने वाले फारवर्ड ब्लॉक से आयातित अपर्णा सेन गुप्ता को सीएम के इशारे पर उम्मीदवार बनाया गया। 

” अल्लाह मेहरबान तो गधा पहलवान ”  2014 में एक तरफ गणेश मिश्र जो खट्टर के समान कद रखते थे, और दूसरे तरफ खरसावां से अर्जुन मुंडा हरा दिए गये। विकल्परहित स्थिति पैदा कर रघुवर दास को मुख्य मंत्री बना दिया गया, क्योंकि ये कठपुतली की तरह नाचने को तैयार थे। मुख्यमंत्री बनते ही साहेब ने जातीय प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने प्रतिद्वदियों को चुन-चुनकर ठिकाने लगाया, जिसमे टॉप के नेता भी शामिल हैं, जैसे औरंगज़ेब ने सत्ता के लिए अपने भाइयों के साथ किया था, आला कमान ने भरपूर मदद किया।

झारखंडी संघी: क्यों दरकिनार कर दिए गए निष्ठावान कार्यकर्ता

दरकिनार किये गए फेहरिस्त में, कभी संघ निष्ठ रहे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दुखा भगत, अभयकांत प्रसाद, डा. यदुनाथ पांडेय, डा. दिनेशानन्द गोस्वामी, रवीन्द्र राय जैसे नेता हैं। लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक प्रभाव में भी बरकट्ठा में भाजपा का झंडा लहरानेवाले स्व.चितरंजन यादव के बेटे अमित यादव का भी यही हश्र हुआ। टिकट किसे दिया जा रहा है, जिसकी अश्लील वीडियो बड़े पैमाने पर वायरल हैं, जिन पर भाजपा के ही जिला मंत्री कमला कुमारी ने यौन शोषण का आरोप लगाया हैं। जिन पर करोड़ों रुपये के दवा घोटाले का आरोप है। जिन पर एक महिला की हत्या कराने का आरोप है। 

ऐसे में झारखंडी संघी का गंभीर सवाल यह है कि संघ के नीति-निर्धारक तथा अन्य पदाधिकारी धृतराष्ट्र क्यों बने हुए हैं। राजनीतिक शुचिता एवं शुद्धता की बात करने वाली संघ की चुप्पी यह दर्शाती है कि इनके पदाधिकारी अब अपनी आत्मा को चंद सिक्कों के ख़ातिर बेच चुके है। जिनके कुकृत्यों से पूरा झारखण्ड न केवल शर्मसार हैं, बल्कि झारखंड के संघी व भाजपा इकाई मात्र रघुवर के अनुषंगी दल व पार्टी बन कर रह गयी है।

अलबत्ता, लोगों के बीच रघुवर दास को लेकर जिस प्रकार का गुस्सा इन दिनों झारखण्ड में देखा जा रहा है, निस्संदेह रघुवर दास राज्य के अंतिम भाजपाई मुख्यमंत्री होंगे।

Check Also

सी पी सिंह

सी पी सिंह जी झारखंडी पत्रकार भाजपा के कर्मचारी नहीं 

आज मंत्री सी पी सिंह साहब को लोकतंत्र की मर्यादा का इतना भी ख्याल नहीं रहा कि जब हालात बदलेंगे तो ये कौन सी पत्रकारिता के शरण में जायेंगे।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.