Breaking News
Home / News / Jharkhand / सवाल जनता के अब समाधान चाहते हैं, लेकिन सत्ता इन्हें उलझाना चाहती है 
सत्ता की ढाई चाल

सवाल जनता के अब समाधान चाहते हैं, लेकिन सत्ता इन्हें उलझाना चाहती है 

Spread the love

आपके सवाल अब सत्ता को डराने लगे हैं, दरअसल आपके सवाल अब समाधान चाहते है। आपके सवाल उस रास्ते को टटोल रहे हैं, जिस रास्ते देश व राज्य की स्थिति ठीक हो सके। आपके सवाल अब मौजूदा सत्ता पर निशाना साधने से चूकते, क्योंकि आपके सवाल अब सत्ता के उस चरित्र को समझना चाहती है जिसे सत्ता अब तक छुपाये हुए है। जिसका अर्थ है आप अब न्यायपालिका, विधायिका व कार्यपालिका को समझाना चाहते हैं। 

हम उस दौर में पहुँच चुके हैं जहाँ अब केवल बेरोज़गारी दर ही हमारी समस्या नहीं, बल्कि देश के इतिहास में पहली बार ‘जॉबलेस’ होने की दर भी बढ़ गयी है। साथ ही इसमें इजाफ़े के आसार तत्व मौजूदा राजनीतिक सत्ता के अर्थव्यवस्था में साफ़ दिखता है। लेकिन सत्ता आपके सवालों के समाधान नहीं बल्कि छुपने के लिए, राम मंदिर, 370, 35 A जैसे परदे की ओंट का सहारा ले रही है। 

आम लोगों पर बेरोज़गारी, महँगाई, क़दम-क़दम पर निजी कंपनियों की बढ़ती लूट, ज़मीन लूट और डूबते पैसों की जो मार पड़ रही है वह उन्हें असलियत का अहसास कराने लगी है। हक़ीक़त यह है कि सत्ता के कारगुज़ारियों से उत्पन्न इस संकट ने अब गंभीर रूप ले लिया है।

इसी फ़ेहरिस्त में अब की बार सत्ता जो राह चलना चाहती है वह डगर हमारी आवाज़ का गला निर्ममता से घोंट सकती है।

सवाल है कि तीनों सेना को एक बिंदु क्यों बनाना चाहती है सत्ता

सत्ता लोकतंत्र का गला घोट हमें सीधे ‘मिलिट्री शासन’ मुहाने खड़ा देना चाहती है। दरअसल अभी हमारे देश में जल सेना के अलग चीफ़ हैं, उसी प्रकार थल, व वायु सेना के भी अलग-अलग चीफ़ हैं, लेकिन सत्ता अब इन तीनों चीफ़ को केन्द्रित करने की मंशा से इन तीनों के ऊपर भी एक सुपर चीफ़ बिठाना चाहती है।

मसला, अब तक के सत्ता के तमाम सरकारी संस्थानों पर नियंतर का मिजाज देखते हुए कहा जा सकता है कि इसके दुष्प्रभाव खतरनाक हो सकते हैं।

Check Also

जीएसटी

जीएसटी की भरपाई केंद्र ने अक्तूबर माह से नहीं किया है

Spread the love जीएसटी की भरपाई केंद्र ने अक्तूबर माह से नहीं किया है  केंद्र …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.