झारखंडी किसान

झारखंडी किसानों को ना बीमा कंपनी पैसे दे रही है और न ही सरकार सुखाड़ का लाभ 

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झारखंडी किसानों को न बीमा कंपनी पैसा दे रही है और चूँकि इनकी ज़मीनों का बीमा हो गया इसलिए सरकार इन्हें सुखाड़ का लाभ भी नहीं देगी 

झारखंड की रघुवर सरकार के कथनी और करनी में कितना अंतर है, एक तरफ डींगे हाँक रही है कि अब राज्य के किसानों को दूसरे के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसानों को सरकार वह तमाम सुविधायें प्रदान कर रही है जिससे वे अपने खेतों को हरा भरा रख पाएंगे, कर पायेंगे। किसानों की माली हालत सुधरेगी, उनका विकास होगा…आदि। वहीं दूसरी तरफ प्रधान मंत्री कृषि बीमा योजना का किस्त किसानों से ही भरवा रही है, जबकि किसानों को बीमा का प्रीमियम  भुगतान सरकार खुद करने की बात कहती है। यह सरकार का बीमा के नाम पर किसानों के साथ केवल छल नहीं तो और है।

उदाहरण के तौर पर इसे ऐसे समझते हैं, वर्ष 2016-17 से 2019-20 तक किसानों के द्वारा किया गया निःशुल्क कृषि बीमा योजना, जिसमे सरकार कह तो रही है कि किसानों का बीमा का प्रीमियम  का वहन वह कर रही है, लेकिन वर्ष 2016 से अब तक किसानों को किसी प्रकार बीमा की राशि नहीं मिली है, जबकि चार वर्षों से लगातार पूरे चतरा में सुखाड़ जारी है। इस वर्ष तो सरकारी आंकड़ों में भी चतरा सहित कई जिलों को सुखाड़ घोषित किया गया तो, ऐसे में किसानों को सुखाड़ का लाभ मिलना चाहिए था। लेकिन इसके उलट सरकार का यह आदेश है कि जो किसान पूर्व में अपनी जमीन का बीमा करा चुके है,  उन किसानों को सुखाड़ का लाभ नहीं मिलेगा।

ऐसे में किसानों में यह सवाल उठना लाज़मी हैं कि सरकार वर्ष 2016 से वर्ष 2019-20 तक का बीमा राशि भी नहीं दे रही है और सुखाड़ से प्राप्त होने वाले लाभ से भी वंचित रख रही है। चतरा के किसानों ने सूबे के मुख्य मंत्री व संबंधित उपायुक्त से गुहार लगाया है कि उन्हें सुखाड़ के लाभ प्रदान करें।

क्या कहते हैं जिला सहकारिता पदाधिकारी 

चतरा के जिला सहकारिता पदाधिकारी का कहना है कि सरकार के निर्देशानुसार सुखाड़ की राशि का लाभ किसान के कुल ज़मीन में से बीमा कराये गए ज़मीन का रकवा काट कर भुक्तान होगा। जबकि किसानो को अब तक बीमा की भी कोई राशि नहीं मिली है।

मसलन, सरकार ने झारखंडी किसानों की स्थिति सांप-छछूंदर वाली कर दी है, न कठर पात झाड़ते न भूत भागते… न बीमा कंपनी ही इन झारखंडी किसानों को पैसा दे रही है और चूँकि इन किसानों ने बीमा करवा कर गलती कर लिया है, इसलिए सरकार भी इन्हें सुखाड़ का लाभ नहीं देगी। ऐसे में कोई सरकार कैसे दावा कर सकती है वह किसानों का विकास कर रही है। यह एक ढपोरशंखी छलावा है, जो किसानों को मौत के मुँह तक पहुँचाती है।

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