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सरकार-बहादुर का कहना है की उन्होंने 35 लाख झारखंडी युवाओं को रोज़गार दिए 

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सरकार-बहादुर ने चुनाव को देखते हुए भरमाने वाला आँकड पेश की 

बेरोज़गारी की बढ़ती दर के मामले में भारत 8.0 प्रतिशत की दर के साथ एशिया में पहले स्थान पर पहुँच गया है, झारखण्ड खबर नहीं ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट कह रही है। जबकि लाइफ एजुकेशन एंड डवलेपमेंट सपोर्ट (लीड्स) की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि देश में सबसे अधिक गरीबी, अशिक्षा बेरोज़गारी झारखंड में है। जो कि केंद्र सरकार के संधारणीय विकास लक्ष्यों पर एक वॉलेंटरी राष्ट्रीय रिव्यू रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट को लीड्स सहित 62 अन्य संस्थाओं ने साथ मिलकर तैयार किया है।

इसके बावजूद झारखण्ड के सरकार-बहादुर ने अपने ट्विटर हेंडल पर अपने विकास के खांके के रूप में ट्विट करते हैं कि उन्होंने 35 लाख झारखण्डवासियों को रोज़गार व स्वरोजगार उपलब्ध कराए हैं। जबकि वंकैया नायडू ने बयान दिया था कि सभी को सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती हैसाथ ही यह भी कहते हैं कि चुनाव में तो हर पार्टी रोज़गार देने जैसे वायदे कर ही दिया करती है। अब आप ही तय करें कि कौन सच्चा है और कौन झूठा। 

“प्रभात खबर” की लेबर्स डे के अवसर पर एक स्पेशल रिपोर्ट के अनुसार बेरोज़गारी की मार झेल रहे झारखण्ड के लोगों को राज्य में काम न मिलने के स्थिति में उनका पलायन बदस्तूर जारी है। रोज़गार की तलाश में झारखण्ड के हजारों लोग महानगरों में अपना भविष्य तलाशने को मजबूर रहे हैं। जबकि यहाँ के युवा जिनके नाम इनकी राजनीति चमक रही है, वे रोज़गार न मिलने की स्थिति में लगातार डिप्रेशन का शिकार हो आत्महत्या कर रहे हैं। 

पलायन की भयावहता का अंदाजा केवल इससे लगाया जा सकता है कि पूर्व जिले के उपायुक्त आर के महाजन ने सरकार को भेजे एक रिपोर्ट में कहा था कि डेढ़ दशक में हज़ारीबाग़ रोड स्टेशन से प्रतिदिन औसतन 100 लोग मुंबई जाते हैं। वक्त के साथ यह आंकड़ा भी बढ़ता ही चला गया। जो सरकार इसे रोकने के लिए अब तक ठोस पहल तक न कर पायी हो, उनका ऐसे झूठे आँकड़े पेश करना केवल यहाँ के बेरोजगार युवाओं को फिर से बरगलाने का प्रयास मात्र ही हो सकता है।  

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