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नए रोज़गार तो दूर झारखण्ड में कार्यरत कर्मियों की छटनी हो रही है 

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झारखण्ड में नए रोज़गार तो दूर कार्य कर्मियों को हटाया जा रहा है 

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के चेयरमैन समेत दो सदस्यों ने इस वर्ष जनवरी में इस्तीफ़ा दे दिया, क्योंकि राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएसओ/NSSO) के आवर्ती श्रम शक्ति (PERIODIC LABOUR FORCE) सर्वेक्षण को आयोग द्वारा मंज़ूरी दिये जाने के बावजूद केंद्र की सरकार उसे जारी नहीं कर रही थी। इस सर्वेक्षण के मुताबिक़ वर्ष 2017-18 के दौरान भारत में बेरोज़गारी दर पिछले 45 वर्षों के मुक़ाबले सबसे ज़्यादा दर्ज की गयी है। सरकार अपनी बदनामी के डर से चुनाव के पहले इस रिपोर्ट को जारी नहीं करना चाहती थी। 

रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 के वित्तीय वर्ष में भारत में बेरोज़गारी दर 6.1 प्रतिशत थी। यह दर पिछले 45 वर्षों में सबसे ज़्यादा थी। शहरी क्षेत्रों में बेरोज़गारी दर ग्रामीण क्षेत्रों से ज़्यादा है, जहाँ शहरी क्षेत्र में यह दर 7.8 प्रतिशत वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 5.3 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 15 से 29 वर्षीय युवाओं में शहरी क्षेत्र में बेरोज़गारी दर 22.9 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 15.5 प्रतिशत थी। शहरी क्षेत्र के पुरुष युवाओं में यह दर 18.7 प्रतिशत और महिला युवाओं में 27.2 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्र में पुरुष युवा 17.4 प्रतिशत और महिला युवा 13.6 प्रतिशत की दर से बेरोज़गारी का सामना कर रहे थे। राज्यों में देखें तो झारखण्ड की स्थिति काफी खराब है। राज्य की सरकार ने इस विषय को अब तक गम्भीरता से नहीं लिया। 

ऐसे समय में राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा रोज़गार पैदा करने की बातें लोगों को मूर्ख बनाने के सिवा और कुछ नहीं है। पूँजीपतियों के कम होते मुनाफ़े के संकट को हल करना ही इसका मक़सद रहा। वर्ष 2017-18 के मुक़ाबले बाद में अब हालात सुधरने के बजाय और ख़राब है। इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि मोदी-सरकार के डिजिटल इंडिया जैसी महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत झारखण्ड में नए रोज़गार तो दूर कार्यरत 300 से ज्यादा इ-मैनेजरों को हटा दिया गया। अब राज्य कैसे भ्रष्टाचार से मुक्त होगा? कैसे कैशलेस झारखण्ड का सपना पूरा होगा? इसी प्रकार पंचायत स्वयंसेवक संघ की भी हालत राज्य में खराब है। साथ ही पारा शिक्षकों के सर पर पहले से तलवार लटकी हुई है। इन स्थितियों से यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में बेरोज़गारी और भी भयावह रूप लेने जा रही है और मौजूदा सरकार राज्य को चलाने में पूरी तरह से विफल है। 

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