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आवेदन रद्द, छटनी, रिजल्ट न निकालने वाली सरकार क्या 25 हजार नौकरी दे सकती है

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क्या आवेदन रद्द व छटनीकरने वाली, रिजल्ट न निकालवा पाने वाली सरकार का 25 हजार नौकरी देने का वायदा करना, जुमले वाजी से कम है?

बढ़ती बेरोज़गारी के मामले में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट की माने तो भारत में बेरोज़गारी दर 8.0 प्रतिशत पार कर गयी है जो एशिया में पहला स्थान रखता है। वैसे भी उप-राष्ट्रपति वंकैया नायडू ने बयान दिया था कि सभी को सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती, इसलिए स्वरोज़गार को भी काम के रूप में माना जाना चाहिए। साथ में यह भी कहा था कि चुनाव में तो हर पार्टी रोज़गार देने जैसे वादे कर ही देती है। मतलब भाजपा ने भी सत्ता में आने के बाद इसी गौरवशाली परंपरा को दोहरा रही है! इसलिए ‘न्यूज़ रूम’ से लेकर राज्यसभा और वहाँ से लेकर नेताओं-मंत्रियों तक पकौड़े का बखान होना महज संयोग मात्र नहीं माना जा सकता। 

झारखण्ड से सम्बंधित कुछ रिपोर्टों को देखते हैं जिससे सरकार के इस मंशा समझने में आसानी होगी। हालांकि पिछले कुछ हफ़्तों से प्रदेश में मौजूदा सरकार द्वारा ऐसा माहौल बनाया जा रहा है मानो इस राज्य में महँगाई, बेरोज़गारी, शोषण, भ्रष्टाचार, पुलिसिया अत्याचार, स्त्रियों पर हिंसा जैसी समस्याएं समस्याएँ हल हो चुकी हैं। हाल के दिनों में रघुबर सरकार ने चुनाव को मद्देनज़र रखते हुए  महज चार महीने में 25 हजार से अधिक नौकरियाँ देने का वादा कर दिया है। लेकिन पिछले आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि यह भी महज जुमले के अतिरिक्त और कुछ नहीं हो सकता है।

ताज़ा आँकड़ों के अनुसार झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग (जे. एस. एस. सी. ) ने एक्साइज़ कांस्टेबल (उत्पाद सिपाही) भर्ती प्रतियोगिता परीक्षा में भरे गए 22 हजार आवेदन पत्रों को रद्द कर दिया है। ऐसा केवल इसलिए किया गया है क्योंकि यह भरती जेइसीसीई 2018 के माध्यम से होना था, जिसके अनुसार हर प्रकार के आरक्षण का लाभ केवल यहाँ के आदिवासी व मूलवासियों को मिलने वाला था। वहीँ दूसरी रिपोर्ट के अनुसार शिक्षक नियुक्ति परीक्षा के अभ्यार्थी अपने परीक्षा फल के प्रकाशन हेतु धरना प्रदर्शन व कर्मचारी आयोग के कार्यालय घेराव करने को मजबूर हैं। उनकी मांग है कि जल्द से जल्द से जल्द परीक्षा फल प्रकाशित किये जाएँ। तीसरी रिपोर्ट में सरकार ने कार्यरत ई-मैनेजरों को अवधि विस्तार देने पर रोक लगा दी है।

मसलन, जो सरकार ली गयी परीक्षा का अब तक परिणाम प्रकाशित न कर सकी हो, जो सरकार इतनी बड़ी मात्रा में आवेदन रद्द कर रही हो, जो सरकार कार्यरत मैनेजरों की अवधि विस्तार पर रोक लगा दी हो मतलब उन्हें नौकरी से निकाल रही हो, ऐसे में अगर वह चुनाव के वक़्त कहती है, वह 25 हजार नौकरियाँ देने जा रही है तो यह बस जुमले के अलावा और क्या कहा जा सकता है।       

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