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रामचरण मुंडा

रामचरण मुंडा की भूख से हुई मौत को बीमारी से हुई बताने की जुगत में सरकार

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रामचरण मुंडा की पत्नी का ब्लडप्रेशर जांच कर एसडीओ साहेब ने बता दिया कि मौत भूख से नहीं हुई 

गरीबी रेखा और ग़रीबों का मज़ाक उड़ाना ही झारखंड सरकार की सच्चाई बन गयी है। मूल प्रश्न तो यह है कि देश में अनाज की बहुलता होने के बावजूद भूख से क्यों मर रहे हैं? अधिकतर लोग इस सवाल का जवाब यही देते हैं कि यह सरकार की नालायकी व लापरवाही का नतीजा है। वे यह भी कहते हैं कि अगर यह सरकार ढंग से काम करती तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। लेकिन समस्या के मूल में सरकारों की इस नालायकी, लापरवाही या सही ढंग से काम न करने की वजह तो अपने चहेते पूँजीपतियों के मुनाफ़े पर बट्टा न लगने देना ही हो सकता है। हमारे देश में अन्य पैदावारों की तरह अनाज की पैदावार भी मुनाफ़े के लिए ही होती है और मौजूदा सरकार इस मुनाफाखोर व्यवस्था बचाने और मजबूत बनाने के सिवा और कुछ करती नहीं दिखती।

महुआडांड़ प्रखंड की दुरूप पंचायत के लुरगुमी कला गांव में वृद्ध रामचरण मुंडा (65) की मौत के बाद आखिर प्रशासन की नींद अब खुल चुकी है एसडीओ साहेब ने प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा मृतक के जगह उसकी पत्नी चमरी देवी का ब्लडप्रेशर की जांच करवा एक तरफ यह तो बता दिया कि रामचरण मुंडा की मौत भूख से नहीं हुई है, लेकिन दूसरी तरह उन्होंने आननफान में सरकारी नियमों की अवहेलना करते हुए ऑफलाइन राशन का वितरण भी करवाया यदि सब ठीक था तो फिर उन्हें ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी। नाराज ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था पहले कर दी गयी होती तो शायद रामचरण मुंडा उनके बीच जिन्दा होते ग्रामीणों का कहना है कि रामचरण के घर में अनाज न होने की स्थित में तीन दिनों से चूल्हा तक नहीं जला था और प्हैरशासन मानने को तैयार नहीं है

झारखंड मुक्ति मोर्चा व विपक्ष का कहना है कि यह सरकार मानवता कि हत्या करने पर उतारू है इसलिए  पूरे मामले को रफा-दफा करने में जोर शोर जुट गयी है इस राज्य में संतोषी के भूख से शुरू हुई मौत का सिलसिला अब तक थमने का नाम नहीं ले रहा है यह सरकार इस व्यवस्था को दुरुस्त करने बजाय केवल इस बात पर ध्यान केन्द्रित की हुई है कि किसी तरह अन्य भूख से हुई मौतों की भांति इस मौत को भी बीमारी से हुई बता दिया जाए

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