Breaking News
Home / News / Jharkhand / मीडिया अब कहने लगी है कि गो तस्करों को पुलिस का शह! 
मीडिया

मीडिया अब कहने लगी है कि गो तस्करों को पुलिस का शह! 

Spread the love

मीडिया अब कहने लगी है कि गो तस्करों को पुलिस का शह  प्राप्त है 

अख्लाक, फिर अबू हनिफ़ा, फिर आर. सूरज, फिर अलीमुदीन अंसारी, जुनैद, पहलू ख़ान से लेकर न जाने कितने और! 2017 के साल के पहले 6 महीने में क़रीब 20 गौरक्षा से सम्बन्धित हमलों की रिपोर्टें सामने आयी, जो 2016 के साल के आँकड़ों से भी 75 फ़ीसदी ज़्यादा है! इन हमलों में मॉब लिंचिंग, गौरक्षकों द्वारा हमले, हत्या व हत्या की कोशिशें, उत्पीड़न और यहाँ तक की कुछ मामलों में सामूहिक बलात्कार जैसे नृशंस अपराधों तक को अंजाम दिया गया है!

जून 2017 तक मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) की जो भी घटनाएँ सामने आयी हैं, उनमें गाय सम्बन्धी हिंसा के प्रतिशत में एक आश्चर्यजनक वृद्धि देखने को मिली। यदि हम ग़ौर से देखें तो उस हिंसक भीड़ के पीछे हमें एक सुनिश्चित विचारधारा और राजनीति दिखाई देगी। यह महज़ कोई क़ानून-व्यवस्था की समस्या नहीं! बल्कि 2014 के बाद से मॉब लिंचिंग की घटनाओ में जिस आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि हुई है और जिस प्रकार मुस्लिमों, दलितों व आदिवासियों को टारगेट किया गया है, साफ़ दिखता है कि सत्ता में बैठी सरकार ने ही इन्हें खुली छूट दी है।

बिकी हुई कॉरपोरेट मीडिया यह प्रचारित करने से नहीं चुकती है कि मॉब लिंचिंग की घटनाएँ पहले भी होती रही हैं और इसका भाजपा सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही अब वाही मीडिया यह भी कहने लगी है कि यह प्रशासन के मिली भगत से होती है। इससे इनकार नहीं कि पहले ऐसी घटनाएँ नहीं हुई हैं, पर सोचने वाली बात है कि क्यों गौ-हत्या से सम्बन्धित हमलों में हुई मौतों में 86% मुस्लिम हैं और उसमें भी 96.8 प्रतिशत मामले 2014 के बाद हुए हैं! क्यों 63 में से 32 ऐसी घटनाएँ भाजपा-शासित राज्यों में ही घटित हुई हैं? भाजपा शासित राज्यों में मीडिया द्वारा इन घटनाओं का केवल प्रशासन पर ठीकरा फोड़ना पचने वाली बात नहीं लगती।

Check Also

बच्ची

बच्ची ट्विंकल की निर्मम हत्या पर देश में फिर एक बार उबाल

Spread the loveसमाज में इन दिनों बच्ची व स्त्रियों पर अत्याचार तेजी से बढ़े हैं। …

भीड़ तंत्र

भीड़ की आड़ में आदिवासियों को निशाना बनाया जा रहा है

Spread the loveभीड़ तंत्र के रूप में समाज में बढ़ती हिंसा का सामाजिक संरचना से …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.