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गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र

गिरिडीह लोकसभा से अबतक भाजपा ने केवल वोट बटोर कर ठगा ही है

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उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला गिरिडीह लोकसभा भाजपा के 3/11 नियोजन नीति के जद में आने से  त्रस्त हैं इस लोकसभा ने लगातार विस्थापन के दंश झेले हैं, लेकिन भाजपा ने कभी भी यहाँ के प्रभावित जनता को समान अवसर उपलब्ध करवाने के लिये विस्थापन आयोग के गठन जरूरी मुद्दा नहीं समझा जबकि यह जिला खुद अन्धकार में डूब कर भी पूरे देश को अपने गर्भ से कोयला देकर रोशन किया है

गिरिडीह लोकसभा के इस क्षेत्र की जनता ने लगातार भाजपा के झोली में वोट भर पांच दफा सांसद दिए, लेकिन भाजपा ने कभी भी इसका मान न रखा,किसी को भी मंत्री पद तो न दिया, दिया तो केवल खनन से होने वाले प्रदूषण व बाहरी नेताओं की सरपरस्ती। साथ ही कभी न ख़त्म होने वाली हिन्दू-मुस्लिम की नफरत और इस नफ़रत के आड़ में इन भाजपाईयों ने यहाँ के सम्पूर्ण कोयला कारोबार को अपने घर का धंधा बना लिया जिस कारण इस क्षेत्र के व्यापारी दहशत में व्यापार करने को विवश हुए

भाजपा ने इस क्षेत्र में कुर्मियों से केवल उनका वोट बटोरा, बानगी देखिये इस दल ने कभी भी इस समाज से इन क्षेत्रों में विधायक या मंत्री नहीं बनाए, पूरे समाज को हाशिये पर रहने को विवश कर दिया यही नहीं बढई/कुम्हार/नट/कोयरी/कहार/घटवार जैसे समाज को तो इस दल ने अबतक उनके आबादी के अनुरूप प्रतिनिधित्व तक नहीं दिया है। इस परिस्थितियों में दलित-आदिवासी-अल्पसंख्यक समाज की बात ही करनी बेमानी होगी।

इस लोकसभा क्षेत्र की विडंबना देखिये नियम कहता है कि जितनों का नाम राशन कार्ड में होगा उतनों का आधार कार्ड होना अनिवार्य है लेकिन सरकारी आकड़ो के अनुसार राज्य में 2.62 करोड़ लोगों में से 68.8 लाख लोगों आधार अभी भी राशन कार्ड से नहीं जुड़ा पाए हैं, जिसमे अधिकांश लोग इस क्षेत्र से हैं ऐसे में यह कहना कतई अतिशोयोक्ति न होगी कि भोजन के अधिकार से इस क्षेत्र के अधिकांश लोग वंचित हैं

मसलन, यहाँ की जनता को उपरोक्त सभी बिन्दुओं पर ध्यान देते हुए, बाहरियों की और मुंह न करते हुए अपना दीपक आप बनने का प्रयास करना होगा।

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