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सरकार बहादुर के पास रोजगार के आँकड़े तक नहीं जबकि देश के युवा बेरोजगार हैं!

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बेरोज़गारी दर 7.2% हो गयी, सरकार बहादुर के पास नौकरियों के आँकड़े तक नहीं

झारखंड के नौजवानों के सामने आज सबसे बड़ी समस्या रोज़गार है। जबकि यहं किसी भी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा की भी कमी नहीं है। एक-एक नौकरी के पीछे हज़ारों-हज़ार आवेदन किये जाते हैं पर नौकरी तो कुछ को ही मिलती है। इसी प्रकार साल दर साल इन आवेदन करने वाले युवाओं की संख्या भयंकर रूप से बढ़ती जाती है। इससे इनकार नहीं कि पहले ऐसा नहीं होता था लेकिन चौकीदार काल में यह सरपट दौड़ रही है। विडंबना देखिये जिन पदों के लिए योग्यता 5वीं या 10वीं ही थी उनमें आवेदन करने वाले पीएचडी, एमटेक, एमफि़ल, बीटेक, एमबीए जैसे डिग्रीधारक थे। यह  बेरोज़गारी की भयंकरता को ही तो दर्शाते हैं।

एनएसएसओ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में बेरोज़गारी की दर 6.1% हो गयी है, लेकिन साहेब आज भी कह रहे हैं कि देश में रोज़गार की कोई कमी नहीं है, बस आँकड़ों की कमी है। जबकि सीएमआईई की रिपोर्ट ने सरकारी दावों की पोल खोलते हुए बताया कि दिसम्बर 2017 से दिसम्बर 2018, केवल एक वर्ष में 1 करोड़ 10 लाख लोगों को अपनी नौकरी गँवानी पड़ी और फ़रवरी 2019 में बेरोज़गारी की दर 7.2% हो गयी है और साहेब व उनकी सरकार रोज़गार से जुड़े आँकड़ों को सार्वजनिक ही नहीं होने दे रही है।

पहले एनएसएसओ के आँकड़े, उसके बाद केन्द्र सरकार की माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेण्ट एण्ड रिफ़ाइनरी एजेंसी (मुद्रा) योजना के तहत कितनी नौकरियाँ पैदा की गयीं, इससे जुड़े लेबर ब्यूरो के सर्वे के आँकड़ों को सार्वजनिक नहीं होने दिया गया। स्थिति इतनी बुरी हो गयी कि दुनिया भर के जाने-माने 108 अर्थशास्त्रियों और समाजिक वैज्ञानिकों ने सरकार बहादुर को चिट्ठी लिखकर केन्द्र सरकार पर आरोप लगाया है कि उनकी सरकार जानबूझकर रोज़गार के आँकड़ों को छुपा रही है और आँकड़ों के साथ छेड़छाड़ कर रही है। इससे अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सांख्यिकी संस्थानों की साख भी धूमिल हो रही है।

बहरहाल, ये सारे तथ्य साबित करने के लिए खाफी हैं कि सरकार बहादुर जो छाती पीट-पीटकर करोड़ों रोज़गार देने का दावा करती रही है, सब सफ़ेद झूठ है और इस झूठ की पोल जनता के बीच न खुल जाए इसके डर से रोज़गार से सम्बंधित आँकड़े सार्वजनिक नहीं कर रही या करने से रोक रही है। हमारे देश में 28-29 करोड़ युवा बेरोज़गार हैं। जिनमें से 6 करोड़ डिग्रीधारक हैं। और ऐसा तब है जब देश की जीडीपी बढ़ रही है पर नौकरियाँ जनसंख्या के अनुपात में ही नहीं, संख्या के आधार पर भी साल दर साल घट रही हैं। इन स्थितियों के बीच साहेब ताम-झाम के साथ झारखंड आये लेकिन इन विषयों पर एक भी शब्द नहीं बोले ?

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