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आशीर्वाद तक नहीं दे रहे हैं बुजुर्ग बीजेपी नेता मोदी-शाह के प्रत्याशियों को

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इस दफा मोदी-शाह व व उनके प्रत्याशियों को भाजपा बुगुर्गों द्वारा आशीर्वाद के जगह शाप मिल रहा है 

झारखंड के राजनीति में मोदी-शाह की बात ही निराली है, बढती उम्र का बहाना बना रांची लोकसभा के पिछले साल के सीटिंग सांसद रामटहल चौधरी का पत्ता बढती उम्र का हवाला दे कर काट देती है तो वहीं धनबाद के पी एन सिंह को फिर से जवानी का घुट्टी पिला जवान कर मैदान में प्रत्याशी बना उतार देती है। तो वहीँ दूसरी तरफ कोडरमा लोकसभा में भी पिछले साल के जीते हुए प्रत्याशी का मटियामेट करते हुए राजद से प्रत्याशी छीन डम्मी प्लेयर को उतार दी है, जबकि गिरिडीह लोकसभा में भी सीटिंग प्रत्याशी को सिरे से नकारते हुए यह सीट को गठबंधन के भेंट चढ़ा देती है। ऐसे में जिस प्रकार मोदी-शाह के जोड़ी ने अपने बुजुर्गों की बेईजती की है, उनका दिल अंदर से इतना कलप गया है कि वे आशीर्वाद के जगह शाप दे रहे हैं, और भारतीय संस्कृति में कहावत है कि बुजुर्गों के शाप लेने वालों का अस्तित्व जड़ से समाप्त हो जाता है।  

इसका उदाहरणरविन्दर पाण्डेय, राम टहल सरीखे भाजपा के बुजुर्ग नेताओं के श्रीवचनों में महसूस किया जा सकता हैं। भाजपा सांसद रामटहल चौधरी उम्र के आधार पर टिकट काटने काे गलत बताते हुए मोदी-शाह के जोड़ी को चैलेंज दिया है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को दौड़ में हरा देंगे। संसद महोदय का यह भी दावा है कि इनके जैसा पद यात्रा कर चुनावी प्रचार भी यह जोड़ी नहीं कर सकती फिर कैसे इन्हें अनफिट घोषित कर की जानकारी जनता को देंगे और शाह के भाजपा को बताएँगे कि वे कितने फिट हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस जोड़ी ने उम्र के आधार पर मेरी अनदेखी कर एक निश्चित जीती हुई सीट को भंवर में फंसा दिया है। उन्होंने इशारा भी किया कि वे चुनाव लड़ेंगे।

बहरहाल, रामटहल चौधरी ने साफ़ कहा कि भाजपा टिकटधारी संजय सेठ उनसे मिलने आए थे। उन्होंने संजय सेठ को केवल टिकट मिलने की बधाई दी है, पर जीत का आशीर्वाद नहीं दिया। ठीक उसी प्रकार ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि गिरिडीह के सांसद रविन्दर पाण्डेय हाथी चुनाव निशान के चुनाव लड़ने जा रहे है। जबकि सूत्रों की माने तो कोडरमा लोकसभा संसद अपने दल की मदद न करते हुए अपने मित्र बाबूलाल जी को मदद कर जिताते का मन बना लिए है। भाजपा के इन सभी बुजुर्गों का यही कहना है कि इनके बिना पार्टी को नुकसान होगा। मसलन ये आज यह भी सोचते होंगे कि किन नालायकों को इन्होंने नेता बनाया!

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