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स्वास्थ्य केंद्र

जमशेदपुर के स्वास्थ्य केंद्र भी देश भर के तरह वेंटिलेटर पर

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झारखंड की स्वास्थ्य केंद्र निजीकरण के राह पर 

मोदी जी ने सबके लिए स्वास्थ्य की ठोस व्यवस्था करने के बजाय देश भर के 10 करोड़ ग़रीब परिवारों के लिए बीमा योजना घोषित कर साफ़ कर दिया था कि आम लोगों जीवन से ज्यादा चिंता उनको बीमा कम्पनियों की फायदे कि थी। साथ यह स्वास्थ्य बीमा योजना स्वास्थ्य सेवाओं के पूर्ण निजीकरण का खुला ऐलान था। जिस प्रकार कृषि बीमा के नाम पर ऐसा 22 हज़ार करोड़ रुपये का प्रीमियम जमा हुआ था और 8 हज़ार करोड़ के भुगतान के दावे किये गए थे – बीमा कम्पनियों को 14 हज़ार करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ जिसका एक हिस्सा तो बैंकों ने किसानों के खातों से ज़बरदस्ती निकाला और दूसरा आम जनता के टैक्स के पैसे से गया। स्वास्थ्य बीमा में भी यही होने वाला है। सोचने वाली बात यह है कि अब सरकार इन विभागों में डॉक्टर समेत तमाम कर्मचारियों के नियुक्ति से पल्ला झाड़ लेगी और हमारे सरकारी स्वास्थ्य केंद्र  पूरी तरह ख़त्म हो जायेंगे बाद में आगे चलकर इन केन्द्रों को भी पूंजीपतियों को लूटा दिया जाएगा

उदाहरण के तौर पर जमशेदपुर जैसे शहर का सवास्थ्य-व्यवस्था इतनी लचर है कि अगर इलाज कराने यहाँ के जुगसलाई स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़े तो आपको यम द्वार तक का सफ़र करना पड सकता है। 30 बेड वाले इस स्वास्थ्य केंद्र को मात्र दो चिकित्सकों ही चला रहे हैं, वह भी बाकी कर्मचारी समेत ज्यादातर गायब ही रहते हैं। स्थिति तो यह है कि भर्ती मरीजों की तबीयत अधिक बिगड़ने पर भी न तो वक़्त पर डॉक्टर पहुंचते हैं और न ही नर्सिंग स्टाफ। जबकि इस केंद्र पर करीब एक लाख आबादी निर्भर करती है। लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा अपने शहर तक के स्वास्थ्य केंद्र निजीकरण का सपोर्ट करना ही तो दर्शाता है। 

बहरहाल, सरकार 50 करोड़ जनता के लिए तो बीमा येन-केन-प्रकारेण कर ही लेगी, लेकिन शेष 85 करोड़ गरीब जनता का क्या होगा? भविष्य में ये सब तो ख़ुद पर पूरी तरह से निर्भर हो जायेंगे या यूँ कहें कि निजी अस्पतालों द्वारा लुटे जाने के लिए मजबूर। बीमा के लिए 2 हज़ार करोड़ का प्रावधान बजट में है! ऐसे भी बीमा के लिए अनुमानतः प्रावधान बजट से कहीं अधिक धन की आवश्यकता होगी। यह कहाँ से आयेगा– एक हिस्सा तो यहाँ भी जनता से वसूल होगा और दूसरा हिस्सा केन्द्र व राज्यों द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बन्द करके बचाये गये ख़र्च या नये टैक्स लगाकर आयेगा। कुल मिलाकर यह भी आम लोगों की लूट और बीमा व निजी अस्पताल कम्पनियों के लिए बड़ी सबसिडी ही है।

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