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1995 से रघुवर दास जमशेदपुर के विस्थापितों को उनका हक नहीं दिला पाए

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रघुवर दास ने विस्थापन मुद्दे को हवा दे विधायक से मुख्यमंत्री तक का सफ़र तो तय कर लिया लेकिन जमशेदपुर के विस्थापितों को उनका हक अब तक नहीं दिला पाए

झारखंड में मोदी-रघुबर के “श्रम सुधारों” के परिणामस्वरूप जिस प्रकार मज़दूरों के रहे-सहे अधिकार भी छिन लिए, जिसके कारण असंगठित मज़दूरों के अनुपात में बढ़ोत्तरी हो गयी। ठीक उसी प्रकार दिवा स्वप्न दिखा भूमि अधिग्रहण क़ानून में संशोधन कर जल, जंगल, ज़मीन, खदान: सब कुछ कई गुना बड़े पैमाने पर देशी-विदेशी कॉर्पोरेट मगरमच्छों को सौंपे गए और कवायद लगातार जारी भी है। यहाँ के भाजपा नेता-मंत्री विस्थापित जनता को मालिकाना हक़ दिलाने का वायदा तो किया, लेकिन लोगों को ज़मीन में गाड़ने की धमकी देकर विस्थापित कर दिया गया और उसके विरोध में उठी हर प्रतिरोध को बर्बरता पूर्वक कुचलने की कोशिश की गयी।

रिपोर्ट: जमशेदपुर में 86 बस्ती के मालिकाना हक के मुद्दे को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री अमर कुमार बाउरी ने मई 2016 में कहा था कि बहुत जल्द राज्य भर के लिए नीतियां बनेगी और इन विस्थापितों को मालिकाना हक़ जरूर मिलेगा। ज्ञात हो कि जमशेदपुर शहर के दो लाख से ज्यादा लोगों विस्थापित हैं और कई वर्षों से जमीन के मालिकाना हक का इंतजार है। जब उनसे पूछा गया था कि कि यह कब  होगा, तो गोलमोल जवाब देते हुए कहा था कि मामले को रघुवर दास देख रहे हैं और कोई भी कार्यवाही उन्हीं के दिशानिर्देश पर होगी। जबकि भाजपा के ही नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को सलाह दिया था कि जमशेदपुर नगर निगम के इस मसले का निर्णय उच्चतम न्यायालय से बाहर होना चाहिए। वही मुख्यमंत्री रघुवर दास के मीडिया के समक्ष खुले तौर पर बयान देना कि 86 बस्ती का मालिकाना हक कभी उनके लिए चुनावी मुद्दा रहा ही नहीं! सारी कहानी वयां कर देता है

बहरहाल, इस मुद्दे पर पहले से ही बिरसा सेवा दल, झामुमो आदि दल मालिकाना हक के लिए आवाज़ उठाता रहा है। 1995 से रघुवर दास इस मुद्दे को हवा देकर विधायक से मुख्यमंत्री तक का सफ़र तो तय कर लिये लेकिन विडम्बना देखिये वहां के विस्थापितों की स्थित जस की तस ही बनी हुई है। हालांकि उनके सी एम बनने पर इन विस्थापितों को बड़ी उम्मीद थी कि वे उन्हें जमीन का मालिकाना हक जरूर देंगे, लेकिन इसके ठीक उलट साहेब ने बिरसानगर के बैकुंठनगर में बुल्डोजर चलाकर लोगों को बेघर कर दिया यह भोली-भाली जनता नहीं जानती है कि वही पूंजीपति साहेब के आका हैं तो वह कैसे उसके विरुद्ध आवाज उठायेंगे।

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