Breaking News
Home / News / Jharkhand / जंगलों को साफ़ व पहाड़ों को बेआबरू करने वाली एक और शाजिश का पर्दाफास
जंगलों के वासी

जंगलों को साफ़ व पहाड़ों को बेआबरू करने वाली एक और शाजिश का पर्दाफास

Spread the love

जंगलों को साफ़ व पहाड़ों को बेआबरू करने वाली भाजपा का एक और शाजिश का पर्दाफास

मोदी जी ने सत्ता में आते ही ‘मेक इन इण्डिया’ के तहत दुनिया-घूमकर देशी-विदेशी लुटेरी पूँजीपतियों को बेरोकटोक कच्चे माल व खनिज सम्पदा को जमकर लूटने व मुनाफ़ा पीटने के सारे रास्ते खोलने का आश्वासन दिया। कोई अड़चन आये, कोई आवाज़ उठाये, तो हमें बताइये – हमारे पास हर मर्ज की दवा है। केरल से लेकर तमाम प्रदेशों में प्राकृतिक प्रलय से मची भयंकर तबाही खुद में सबूत बने कि सरकार ने किस कदर अतिसंवेदनशील पर्यावरण की अनदेखी करते हुए “विकास” के नाम पर झारखंड सरीखे तमाम राज्यों में पर्यावरण सन्तुलन बिगाड़ने की चेतावनी देने वाली रिपोर्टों को धत्ता बताते हुए अन्धाधुन्ध जंगल कटायी, खनीज सम्पदा की लूट की सहमती देते हुए तबाही के सारे रास्ते खोल दिए हैं। मुनाफ़ा कमाने के पागलपन में सरकार और उनके चहेते पूँजीपति और ठेकेदारों ने जंगलों को साफ़ करते हुए पहाड़ों को नंगा कर दिया है।

वन अधिकार क़ानून 2006 का संसद में 18 दिसम्बर, 2006 को सर्वसम्मति से अनुसूचित जाति एवं अन्य पारम्परिक वनवासियों के अधिकारों के संरक्षण के लिए पारित होने के बाद पूंजीपतियों, ठेकेदारों व उनकी मीडिया की आलोचनाओं के बावजूद जंगलों में इस कानून का अच्छा असर पड़ा। इस पर अभी अमल शुरू भी नही हुआ था, वन क्षेत्रों में अमूल बदलाव नजर आने लगे। 1876 से 1927 तक पारित कानूनों का पर्यावरण संरक्षण से कोई लेना-देना नहीं था। ब्रिटिश शासकों ने इस क़ानून को केवल इमारती लकड़ी का इस्तेमाल एवं वनवासियों के अधिकार समाप्त करते हुए प्रबन्धन को अपने हाथ में लेने के लिए बनाया था।

लेकिन, मोदी सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एम ओई एफ सी सी) ने वनवासियों पर और क्रूरता भरा कुठाराघात करते हुए वर्तमान अधिनियम में संशोधन करते हुए वन अधिनियम, 1927 से भी अधिक अहित करने वाला मसौदा तैयार कर अंतिम रूप दे दिया है। यह 123 पन्नों के मसौदे में आदिवासियों-वनवासियों-मूलवासियों-ग्रामीणों के सुरक्षा प्रदान करने वाले वह तमाम अहम मुद्दे व मूल कानून गायब हैं। ज्ञात रहे कि यह मसौदा मंत्रालय द्वारा गठित एक कोर समिति के इनपुट के आधार पर तैयार किया गया है। इस मामले के अंतर्गत वन महानिरीक्षक (वन नीति) नोयल थॉमस ने 7 मार्च को राज्यों को पत्र लिखकर राज्य को वहां के लाभकारी संगठन और सिविल सोसायटी के सदस्यों से परामर्श कर 7 जून तक उनकी राय मांगी है।

बहरहाल, मसौदे के अनुसार वर्तमान वन कानून में संशोधन कर भाजपा यहाँ निवास करने वाली जनता के विरुद्ध एक खतरनाक काला कानून थोपते हुए अपने चहेते पूंजीपतियों के फायदे के लिए एक बार फिर साजिशाना तरीके से वनवासियों-आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन को लूटवाने के लिए कानूनी अमलीजामा पहना हमला करने को पूरी तरह तैयार है। यदि मौजूदा भाजपा सरकार अपनी मंशा में सफल हो जाता है तो इन वनवासियों को बेघर होने से और यहां के बचे-खुचे वनों को पूंजीपतियों द्वारा भक्षण किये जाने से कोई भी ताकत नहीं बचा सकता
हालांकि, इस गंभीर मामले को देश के कई सामाजिक संगठन एवं अंग्रेजी मीडिया ने प्रमुखता से उठाया है झारखंड के नेता प्रतिपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया है

  • 242
    Shares

Check Also

महा बदलाव रैली

महा बदलाव रैली को जनता ने मेघदूत को धोबी पछाड़ दे सफल बनाया 

Spread the love19 अक्टूबर को झारखंड की राजधानी राँची का पूरा दिन थम जाना-ठहर जाना,  …

क़ानून

क़ानून व्यवस्था ठीक है – साहेब ने इधर कहा और उधर अपराधियों ने दो को मारी गोली

Spread the loveझारखंड राज्य की फासीवादी सरकार ने अपनी नीतियों से सामाजिक ताने-बाने में जनवादी …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.