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#बेरोज़गारी की विकराल स्थिति और सरकार की झूठी जुमलेबाज़ियाँ .

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वास्तव में काम का अधिकार ही जीने का अधिकार है और यदि किसी भी देश या राज्य के युवा बेरोज़गार हों तो उसका जीवन आर्थिक, सामाजिक के साथ राजनैतिक रूप से भी असुरक्षित होता है। झारखंड में आज बेरोज़गारी का जो आलम है वह पिछले 15 वर्षों  में कभी नहीं देखा गया। एक ओर सरकार अपने ज़रख़रीद कॉर्पोरेट मीडिया से अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पर तालियाँ बजवा रही है, तो वहीं दूसरी ओर देश के युवा #बेरोज़गारी के आलम में ख़ाली थालियाँ बजा रहे हैं। सरकारी आँकड़ों के पैमाने और उनको जुटाने का तरीक़ा जानबूझकर ऐसा बनाया गया है कि प्रथम दृष्टया में #बेरोज़गारी कम प्रतीत हो। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की हालिया रिपेार्ट ने दावा किया है कि देश का बेरोज़गारी दर पिछले 45 साल का रिकॉर्ड तोड़ 6.1 प्रतिशत पर काबिज़ हो हुका है।

वैसे तो भाजपा सरकार ने युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के नाम पर गाजे-बाजे के साथ अपने ज़रख़रीद कॉर्पोरेट मीडिया के माध्यम से कौशल विकास मंत्रालय का गठन तो किया लेकिन पर्दा उठने पर पता चला कि सरकार् की यह योजना कौशल विकास प्रशिक्षणार्थियों (युवाओ) को ना तो रोजगार दे पायी और ना ही प्रशिक्षण के उपरांत उन युवाओं को प्रमाण पत्र दे रही है। इन परिस्थितियों में बिना किसी संकुचाहट के कहा जा सकता है कि मौजूदा सरकार ने युवाओं का समय, उद्देश्य, साल के साथ-साथ जनता के खून-पसीने का रुपया सब बर्बाद किया। जबकि झारखंड के कई प्रशिक्षण केन्द्रों के प्रशिक्षनार्थी का साफ़ तौर पर कहना है कि संस्थान ने अपने वायदे के अनुरूप ट्रेनिंग के उपरान्त न तो उन्हें रोजगार दिया और न ही सत्यापित प्रमाण, जिससे उनकी हालत बेहाल है।

सरकार की झारखंडी युवाओं को नौकरी देने की हक़ीकत

सरकार ने विश्व युवा दिवस पर तकरीबन 1 लाख छह हजार बेरोजगार युवाओं को नौकरी देने का वायदा किया, लेकिन सरकार की ही आंकड़ो की माने तो पता चलता है कि राज्य सरकार द्वारा विभागवार लक्ष्य तय करने के बावजूद अब तक महज 5420 युवाओं ने ही नौकरी ज्वाइन की है। जबकि सरकार ने दावा किया था कि देश-विदेश के तकरीबन 2380 कंपनियों ने 41 सेक्टर में झारखंडी बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया है। वहीं युवा कहते हैं कि 1 लाख छह हजार में से 84458 युवाओं को महज 8 से 12 हजार वेतनमान पर राज्य के बाहर के लिए ऑफर लेटर बांटा गया था। अब इस महंगाई में इतने कम वेतनमान पर कोई युवा बाहर जा कैसे नौकरी कर सकता है इसलिए इतने कम युवाओं ने ही नौकरी ज्वाइन की। विधानसभा में जब विपक्ष द्वारा बेरोजगारों को #बेरोज़गारी भत्ता देने की मांग हुई तो सरकार ने अपना जवाब रखते हुए कहा कि उनके पास बेरोज़गारी भत्ता देने का कोई प्रावधान नहीं है क्योंकि हाल ही में एक लाख छह हजार युवाओं को नौकरी दी गई है।

हालांकि नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने अपने facebook पेज पर लिखा है कि झारखंड के तानाशाह सरकार के झूठे विकास व झूठे जुमलों का पोल जनता के समक्ष खुल चूका है। इन्होंने यहाँ के आदिवासी-मूलवासी-दलितों-गरीबों और पिछड़ों को न पानी, न अनाज, न बिजली और न ही रोज़गार दिया। केवल झूठे सपने दिखा युवाओं को ठगा है और उनके बेशकीमती वक्त के साथ-साथ मेहनत पर पानी फेरा है। उन्होंने अपने अगले पोस्ट पर यह भी कहा है कि इस सरकार में थोड़ी भी शर्म-हया और हिम्मत बची है तो युवाओं के बीच जा उनके सवालों का जवाब दे कि क्यों आज तक एक भी JPSC, JSSC की परीक्षा नहीं करवा सकी है।

#लिंक Fb

बहरहाल,  जिस राज्य के 77 प्रतिशत परिवारों के पास कोई नियमित रोज़गार का साधन नहीं हो और 67 प्रतिशत परिवारों की प्रति माह आमदनी जीवनयापन करने लायक न हो। बहुतेरे डिग्रीधारी युवा इस #बेरोज़गारी के आलम में  ठेला-फेरी लगाने व रिक्शा चलाने पर भी अपने परिवार का पेट न भर पाता हो, (उदाहरण के तौर पर आप राजधानी स्थित मोरहाबादी में पार्क के बाहर युवाओं से स्थिति का पता खुद लगा सकते हैं) तो आप समझ सकते हैं कि रोज़गार की क़ानूनी गारंटी का हक़ माँगना रोज़गार के अधिकार की लड़ाई का कितना अहम हिस्सा हो सकता है।

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