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सीवरेज-ड्रेनेज योजना: रघुबर सरकार के शासन में एक और बड़ा घोटाला
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सीवरेज-ड्रेनेज योजना: रघुबर सरकार के शासन में एक और बड़ा घोटाला

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सीवरेज-ड्रेनेज योजना की शक्ल में एक और बड़ा घोटाला

रघुवर सरकार का पिछले साढ़े चार वर्षों का शासनकाल बड़ा ही भयावह है। झारखण्ड में सरकारी योजनाओं को निजी एजेंसियों के द्वारा ठेकाकरण कर अपनी नियत झारखण्ड के प्रति साफ़ कर दी है। देखा जाए तो भाजपा सरकार ने पूँजीपतियों को अपने संरक्षण में क़ानूनी तौर पर लूट की इजाज़त दे दी है। नतीजन सरकार की लगभग सभी योजनाएं घोटाले से लिप्त हैं। हालांकि सरकार सभी घोटाले सहित अपनी नाकामियों को पोस्टर एवं फोटोशोप की छवियों से ढकने की नाकाम कोशिश भी करती रही है। परन्तु सच्चाई किसी न किसी शक्ल में उजागर हो ही जाती है।

हाल ही में राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने यह दावा किया है कि राँची के नौ वार्डों में चल रहे सीवरेज-ड्रेनेज योजना के क्रियान्वन में भारी गड़बड़ी है। राँची-जमशेदपुर हाईवे उच्च पथ की तरह यह भी एक बड़ा घोटाला साबित होगा। राज्यसभा सांसद ने इस परियोजना में बरती गयी अनियमितता के सन्दर्भ में चर्चा करते हुए भविष्य की चिंता जताई है। सीवरेज-ड्रेनेज योजना के तहत रांची नगर निगम क्षेत्र के नौ वार्डों में सीवरेज का पाइप लाइन बिछायी जानी थी। लेकिन बनी-बनायी सड़कों को खोद कर उसमें पाइप लाइन बिछाकर सड़क को जस के तस हालत में छोड़ दिया गया है। जिसकी वजह से आम जनता का चलना मुहाल है। ऊपर से निर्धारित प्राक्कलन कर सड़कों की कोम्पेक्टिंग नहीं की गयी है। और न ही सड़कों को कंक्रीट द्वारा पूर्ववत समतल कर क्यूरिंग ही की गयी है। इस हिसाब से सड़क का भविष्य संदिग्ध दिखता है। साथ ही भविष्य में जनता को किसी हादसे का कोपभाजन बनने की ओर संकेत भी करता है।

बहरहाल अवैधानिक तरीके से किये जा रहे सीवरेज-ड्रेनेज योजना की नाकामी रघुबर सरकार को सवालिया घेरे में ले आती है। इतने दिनों तक नगर विकास मंत्री इस मामले से बेखबर बेसुध थे, लेकिन महेश पोद्दार के पत्र के बाद इनकी नींद खुली है। हालांकि मंत्री ने स्वयं रांची नगर निगम के आयुक्त और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले में समुचित कार्रवाई की बात कही है। बावजूद इसके अब तक किसी व्यक्ति को जिम्मेदार मान कर कोई कार्यवाही नहीं की गयी  है और एजेंसी को लगातार भुगतान किया जा रहा है। इससे जाहिर होता है कि परियोजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ी करनेवालों को शायद कहीं न कहीं सरकार का अप्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त है। शायद इसी वजह से उनके विरुद्ध कार्रवाई के बजाय भुगतान में तत्परता दिखायी जा रही है। दूसरी बात यदि सरकार द्वारा एजेंसी के खिलाफ जाँच जारी है, तो फिर इस परियोजना का इतने धड़ल्ले से प्रचार क्यों किया जा रहा है?

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