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नीमहकीम बिरादरी दलों पर झामुमो-बसपा की गठबंधन भारी
नीमहकीम बिरादरी दलों पर झामुमो-बसपा की गठबंधन भारी

नीमहकीम बिरादरी दलों पर झामुमो-बसपा की गठबंधन भारी दिखती हुई

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नीमहकीम दलों को दरकिनार कर झामुमोबसपा गठबंधन नयी इबारत लिखने को तैयार

सभी नीमहकीम संज्ञा से परिचित होंगे, यह बिरादरी रोग के लक्षणों (symptoms) को ही मर्ज समझ बैठते हैं या फिर एकाध लक्षणों को टटोलकर मर्ज की जड़ तक पहुँचने का दावा करते फिरते हैं। जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोणीय डॉक्टर मर्ज के अधिक से अधिक लक्षणों (symptoms) का पर्यवेक्षण (जांच) कर उनका सामान्यीकरण (इलाज) करता है। मतलब सतह के सच को भेदकर तह तक पहुँचने का प्रयास करता है। जबकि नीमहकीम घरेलु नुस्ख़ों को अचूक रामबाण नुस्ख़ा बताने से भी नहीं कतराते।

हमारे समाज के राजनीति क्षेत्र में भी ऐसे नीमहकीमों की भरमार है। ये किसी सीमित कार्रवाई के जरिए भाजपा जैसे फैले असाध्य मर्ज का इलाज़ करने का नाकाम प्रयास कर रहे हैं। अर्थात कुछ राजनितिक दलों ने विपक्षी गठबंधन एकता को छिन्न कर झारखण्ड के दूसरे मजबूत दल झामुमो को कमजोर करने का प्रयास किया है इनके इस प्रयास को देखकर आसानी से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि झारखण्ड की इन राजनितिक दलों को यहाँ कि समस्या से कोई लेनादेना नहीं, केवल सत्ता सुख का लोभ है

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परन्तु हेमंत सोरेन ने झारखण्ड की अस्मिता की रक्षा के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोणीय डॉक्टर वाली भूमिका को चुनते हुए अपना नया दाव नए गठबंधन के रूप में चल दिया है, जिसका स्वागत बहन मायावती जी ने आगे बढ़ कर स्वीकार किया है। मतलब दबे कुचले, आम गरीब समुदाय ( झामुमोबसपा गठबंधन ) अब स्वयं पर निर्भर हो चुनाव लड़ने की दिशा में अग्रसर है।यह ( झामुमोबसपा गठबंधन ) दल पूंजीवादी एवं मनुवादी व्यवस्था से किसी भी स्थिति में समझौता करने की मानसिक स्थिति में नहीं दिखती। बल्कि उलट, यह गठबंधन झारखण्ड की पृष्ठभूमि पर और मजबूत दिखने लगी है।

झारखण्ड में यदि वस्तुगत परिस्थितियाँ तैयार हों जो दिख भी रही है, उत्पीड़ित जनसमुदाय को नेतृत्व देने वाली झामुमोबसपा एवं बामपंथी गठबंधन जैसे हरावल शक्तियाँ तैयार हों जो कठिन नहीं दिखता, सामाजिक अन्तरविरोधों और संघर्ष की दिशा एवं रास्ते का उनका वैज्ञानिक आकलन सटीक हो, सतत क्रान्तिकारी प्रचार के साथ वे जनता को उन्नत से उन्नततर धरातल के संघर्षों में नेतृत्व देने में सफल हों जाए (यह सीधी रेखा में नहीं होगा, बेशक़ बीचबीच में उतार और ठहराव के दौर भी आयेंगे), तो निश्चय ही क्रान्तिकारी परिवर्तन की सम्भावना को वास्तविकता में रूपान्तरित किया जा सकता है।

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