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दलित छात्रों का अपमान क्यों नहीं खलता भाजपा नेताओं को ?

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भारत देश आज असंख्य जातियों में विभाजित है और देश में जाति आधारित अनगिनत संगठन विद्यमान हैं। तकरीबन सभी जाति के पास अपने से नीचे देखने के लिए एक जाति है। इसी मनुवादी सोच में सबसे नीचे समझे जाने वाले दलितों के प्रति हिंसा हर वक़्त जारी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट की माने तो प्रतिदिन देश में तीन दलित महिलाओं के साथ बलात्कार होता है और दो दलितों की हत्या होती है। देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में दलित छात्रों के प्रति होने वाले भेदभाव का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2007 से उत्तर भारत व हैदराबाद के विश्वविद्यालयों में हुए 25 आत्महत्याओं में से 23 दलित छात्रों ने किए थे।

देश में निहित जाति व्यवस्था एवं जातिगत उत्पीड़न हमारे समाज के चेहरे पर एक बदनुमा दाग है और यह त्रासदी ख़त्म होने के बजाय और ज़्यादा सड़ाँध मार रही है। अच्छे दिनों के ढपोर शंखी वादों के आड़ में सत्ता में आयी भाजपा सरकार ने जाति का इस्तेमाल हर बार जनअसन्तोष को दबाने के लिए किया है और कर भी रहे हैं। देश में आज जब आर्थिक संकट चरम पर है और सरकारी नौकरियां लगभग खत्म के कगार पर हैं तब भी यह दल पूरे समाज को जाति के आधार पर तोड़ने का अपना नापाक दाँव लगातार खेलता आ रहा है।

जैसे–जैसे अब झारखण्ड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा सरकार द्वारा दलितों से किए अच्छे दिनों के वादों की कलई खुलने लगी है, वैसे-वैसे दलित समुदाय के शिक्षित छात्र इनके नुमाइंदों से सवाल भी करने लगे है। परन्तु दुःख की बात यह है कि दलित लोगों को जवाब में सिर्फ मिल रहा है लप्पड़-थप्पड़ या फिर डंडे। एक ताजा वाक्यात के अनुसार झारखण्ड के गिरिडीह जिले में भाजपा विधायक एवं भाजपा एमपी के कार्यक्रम में कुछ ऐसा ही घटित हुआ है।

रिपोर्ट: झारखण्ड, गिरिडीह के गिरिडीह कॉलेज में रविवार 6 अक्टूबर को युवा विचार मंथन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा के कोडरमा सासंद रवींद्र राय, गिरिडीह विधायक निर्भय शाहबादी एवं गांडे विधान सभा क्षेत्र के विधायक जय प्रकाश वर्मा उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में उसी कॉलेज के दलित छात्र पप्पू कुमार सुम्मन को अपने वक्तव्य रखने का मौका मिला। वह अपने संबोधन में ज्योंही मोदी जी के कार्यकाल पर सवाल उठाया त्यों ही अचानक इन नेतागणों के समर्थको-कार्यकर्ताओं ने भरी सभा में स्टेज पर चढ़कर उस दलित विद्यार्थी का माईक छीन उसे मारते हुए बेइज्जत कर स्टेज से निचे उतार दिया।

इस घटनाक्रम के पूरे कैनवास में दिलचस्प बात यह रही कि पूरी परिघटना भाजपा के सासंद, दो विधायक एवं गिरिडीह जिले के लगभग तमाम पत्रकारों के मौजूदगी में हुई। परन्तु किसी जनप्रतिनिधि ने इसे रोकने या बीच-बचाव करने का प्रयास तक नहीं किया। साथ ही इस घटना के 48 घंटे बीत जाने के बावजूद अबतक उन समर्थकों के खिलाफ किसी भी प्रकार का कोई केस दर्ज नहीं किया गया है। झारखण्ड खबर की पूरी टीम इस घटना की कड़ी निंदा करती है।

बहरहाल, झारखण्ड में हुए इस बर्बर दलित उत्पीड़न की घटना के विरुद्ध सभी इंसाफ़पसन्द बुद्धिजीवीयों को सड़क पर उतर निंदा करते हुए मौजूदा सरकार से सवाल करना होगा ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना रुक सके। प्रदेश की तमाम जनता को यह भी समझना होगा यदि वे आज इस दलित छात्र के लिए एकजुट नहीं होते तो कल वे अकेले रह जायेंगे। यही तो इस सरकार का जनता के साथ प्रयोग है। ताकि कल वे अपनी मनमानी और भी बर्बर तरीके से कर सके। अन्य सभी जातियों के बुद्धिजीवीयों, नौजवानों एवं विद्यार्थियों को आज ये विशेष तौर पर समझना होगा कि जब तक आम जनता जाति के नाम पर बँटा रहेगा तब तक पूरा देश इसी तह बदहाल और भाजपा तंत्र के गुंडों के हाथों पीटा जाता रहेगा।

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