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“ झारखंड संघर्ष यात्रा ”
“ झारखंड संघर्ष यात्रा ” - झारखंडियत-आदिवासियत की रक्षा

“ झारखंड संघर्ष यात्रा ” – झारखंडियत-आदिवासियत की रक्षा

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“ झारखंड संघर्ष यात्रा ” प्रकरण में नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन का कहना है कि यह संघर्ष यात्रा दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रेरणा और आशीर्वाद से हो रहा है। उनका कहना है कि गुरूजी ने कहा है कि जिस प्रकार अलग झारखंड के लिए झारखंड आन्दोलन करना पड़ा ठीक उसी प्रकार झारखण्ड के अमन-चैन और सुनेहरे भविष्य के लये फिर से “ झारखंड संघर्ष यात्रा ” के रूप में आन्दोलन झारखंड के समस्त युवाओं को करना पड़ेगा। क्योंकि उनका मानना है कि झारखंडियों को बिना लड़े कुछ भी प्राप्त न हुआ है न होगा।

झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के साथ-साथ तमाम कोल्हान विधायक, छोटे बड़े नेता एवं प्रदेश के असंख्य कार्यकर्ता-समर्थक झारखंड को संकट से उबारने “ झारखंड संघर्ष यात्रा ” पर निकल पड़े हैं किसी भी देश या समाज में हुए क्रांति-प्रगति में युवाओं का बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान होता है। युवा काल वह समय होता है जब व्यक्ति आज़ाद के साथ-साथ सृजनशील होता है। साथ ही वह जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर विचार करने की भी क्षमता रहता है, खुले आसमान में अपने सपनों को पंख दे दूर तक विचरण करता है और बाद में उन सपनों को ज़मीनी हकीक़त में बदलता है। मानव इतिहास के अधिकांश पन्नें ऐसे ही युवाओं के असंख्य बलिदान और वीरता की कहानी से भरे पड़े है।

झारखंड आन्दोलन संग्राम में भी युवाओं ने खूब कुर्बानियां दी थी। धरती आबा बिरसा मुंडा, सिद्धू–कान्हू, जयपाल सिंह मुंडा, शहीद निर्मल महतो, स्व. विनोद बिहारी महतो, दिशोम गुरु शिबू सोरेन जैसे अनेक युवाओं की कुर्बानियों एवं संघषों के बदौलत ही हम गुलामी की बेड़ियों को तोड़ कर नए झारखंड का निर्माण कर पाए। इनमें से दिशोम गुरु शिबू सोरेन केवल एक बहादुर युवा ही नहीं बल्कि क्रान्तिकारी विचारक भी थे और हैं भी। उन्होंने उस समय की क्रान्तियों का अध्‍ययन किया और सम्पूर्ण झारखंड के आदिवासी-मूलवासी जनता को एकसूत्र में पिरो कर झारखंड आन्दोलन को अंजाम तक पहुंचाया

अब मौजूदा समय में जब झारखंड सरकार की जन विरोधी नीतियों से झारखंडी जनता त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रही है। तो ऐसे समय में झारखंड युवा नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन, अमित महतो, सुदीव्य सोनू, कुणाल शारंगी, दसरथ गगराई, दीपक बरुआ, निर्मल पूर्ति, शशी शामद एवं कई अन्य झारखंडी युवा दिशोम गुरुजी, चम्पई सोरेन जैसे नेताओं के अनुभवों की छाँव में अपने झारखण्ड के सुन्दर भविष्य के अरमानों को संजोए एक कठिन यात्रा – “झारखंड संघर्ष यात्रा” पर निकल पड़े हैं। यह सभी युवा राज्य में व्याप्त कुशाषण – भूख, ज़मीन लूट, महंगाई, शिक्षा, बेरोजगारी, स्वास्थ्य, विस्थापन, महिला असुरक्षा, ठीक मजदूरी आदि जैसे मुद्दों के जद्द में छिपे कारक की सच्चाई को झारखंडी अवाम के बीच लाने का प्रयास कर रहे हैं। कोल्हान की आम जनता की माने तो इनके प्रयास रंग भी लाती दिख रही है। इनके काफिले को पूरे कोल्हान की जनता का पूरा समर्थन भी प्राप्त हुआ है।

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