Breaking News
Home / News / Editorial / सुदेश जी राज्य विकास परिषद के प्रति अब तक गंभीर नहीं

सुदेश जी राज्य विकास परिषद के प्रति अब तक गंभीर नहीं

Spread the love

राज्य विकास परिषद ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख करते हुए कहा है कि झारखंड को वर्तमान विकास दर से प्रति व्यक्ति आय के राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में 17 साल लगेंगे।  यह अनुमान राज्य विकास परिषद ने राष्ट्रीय व राज्य की आमदनी और प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों का विश्लेषण कर निकला है।  साल 2000 में अपने गठन के समय आर्थिक आधार पर झारखंड एक बीमारू राज्य की श्रेणी में था।  रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2000-01 में देश की कुल आमदनी 1,972,606 करोड़ में राज्य का हिस्सा मात्र 33,043 करोड़ यानी 1.6 प्रतिशत ही था।  उस वक्त प्रति व्यक्ति आय का राष्ट्रीय औसत 16,764 रुपये था, जबकि झारखंड में यह 10,451 रुपये था।

झारखंड राज्य विकास परिषद् की पहली बैठक में मुख्यमंत्री रघुवर दास तो थे परन्तु सरकार की मुख्य सहयोगी पार्टी के मुखिया एवं परिषद् के उपाध्यक्ष सुदेश महतो नदारद थे। यहाँ तक कि इस बाबत उनके द्वारा कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया तक नहीं दी गयी थी। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी ने अफ़सोस जताते हुए कहा था कि “यह बहुत ही अफसोस की बात है कि उपजाउ भूमि, मेहनती मानव संसाधन और खनिज संपदा से परिपूर्ण झारखंड की धरती पर रहने वाले अधिकतर लोग गरीब हैं और उनके जीवन का स्तर बहुत नीचे है”। उन्होंने कहा यह भी कहा था कि “राज्य के उचित विकास के लिए सरकार प्रति दिन का विकास लक्ष्य रखेगी और उसे हर हाल में हासिल करेगी साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए अलग बजट का प्रावधान जाएगा”। इसपर झामुमो ने कहा था कि सरकार विकास के प्रति स्वयं ही गंभीर नहीं है और उन्होंने राज्य विकास परिषद की बैठक का बहिष्कार किया था। जेएमएम विधायक कुणाल षाड़ंगी ने आरोप लगाते हुए कहा था कि अंतिम दिन बुलायी गयी बैठक महज खानापूर्ति है। आज प्रदेश का विकास का हाल क्या है सभी जानते हैं, लिखने की आवश्यकता ही नहीं है।

राज्य विकास परिषद के औचित्य पर मंत्री सरयू राय ने भी सवाल उठाते हुए कहा था कि “सुदेश महतो का बैठक में उनुपस्थित रहना गंभीर विषय है”। फिर बाद में चुपके से सुदेश महतो एवं श्री सुरजीत सिंह भल्ला (अर्थशास्त्री) को राज्य विकास परिषद, झारखण्ड का उपाध्यक्ष बनाया दिया गया। कारण आज तक नहीं बताया गया। शायद यह उपहार उन्हें नाराजगी दूर करने के लिए दिया गया हो। ख़ैर मंशा चाहे जो भी रही हो परन्तु सुदेश जी पर यह आरोप लगते रहे हैं कि इस योजना में उनकी सक्रियता न के बराबर है।

इन्हीं हालात के बीच राज्य विकास परिषद की गंभीरता देखने को मिल जाती है जब झारखण्ड में 11 साल की बच्ची सन्तोषी कुमारी भात माँगते-माँगते भूख से दम तोड़ देती है और यह सिलसिला राज्य के 14 भूखों की जान- जिसमे संरक्षित जनजाति भी शामिल है, रुकने का नाम नहीं ले रही। अब सरकार के ही महत्वपूर्ण अधिकारी ने इन रिपोर्टों को सही ठहरा दिया है। राज्य विकास परिषद के सीईओ अनिल स्वरूप ने गत एक अगस्त को एक ट्वीट कर साफ सब्दों में कहा, “किसी प्रदेश का विकास सिर्फ बड़े लॉंन्चिंग व टार्गेट बनाने से नहीं होता, जब तक एक्शन प्लान तैयार न हो। सपना देखना अच्छी बात है और सभी को देखना भी चाहिए, पर हमारे पैर हमेशा जमीन पर रहने चाहिए।” अब झारखंडी जनता विकास परिषद के सीईओ के इस बयान को सरकार की कार्यशैली से जोड़कर देखने लगे हैं। इस प्रकरण से ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य विकास परिषद की टीम और टीम के सीईओ अनिल स्वरूप के बीच तालमेल की कमी है। हालांकि, इस विषय पर इस परिषद से जुड़े अधिकारी बयान से बचते दिख रहे हैं, लेकिन नाम न छापने या बताने के शर्त पर जो जो बातें सामने आयी उससे साफ हो जाता है कि झारखंड राज्य विकास परिषद में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इन सभी लकीरों के बीच महत्वपूर्ण लकीर यह उभरती है कि परिषद के कई सदस्यों में से एक को जानकारी ही नहीं है कि वह इसके सदस्य भी हैं।

अब बड़ा सवाल है कि जिस प्रकार इस प्रदेश की सरकार यहाँ की ज़मीनों को कोडियों के भाव लूटा रही है साथ में अपने चेहेते उद्योगपतियों को बैक डोर से फायदा पहुँचा रहे है और उनके हर क्रिया कलाप में जिस प्रकार सुदेश महतो चुप रहकर साथ दे रहे है लगता नहीं है कि प्रदेश का विकास शीघ्र हो पाए। जबकि सुदेश जी के कार्यशैली को देखते हुए राज्य विकास परिषद में उनकी उपयोगिता प्रासंगिक प्रतीत नहीं होता

  • 8
    Shares

Check Also

जेपी पटेल अपने पिता स्व. टेकलाल महतो को पुष्प अर्पित करते हुए

जेपी पटेल ने अपने पिता स्व. टेकलाल महतो से किया वादा तोड़ दिया  

Spread the loveस्व. टेकलाल महतो के छठी पुण्यतिथि पर बनासो के महतो बीएड कॉलेज में …

पोस्टर वार

पोस्टर वार में भी भाजपा को झामुमो से मुंह की खानी पड़ रही है

Spread the loveआम चुनाव को लेकर अन्य राज्यों की भंति झारखंड में भी प्रचार प्रसार …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: