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झारखण्ड के पांचवे स्तम्भ पूछ रहे है रघुवर! से “क्या हुआ तेरा वादा ?“

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झारखण्ड राज्य के सभी प्रमुख अख़बारों में ख़ुदकुशी, मर्डर, भूख से मौत, बलात्कार आदि की ख़बरें लगभग रोज ही छपती है। बीती 09 अगस्त गुरुवार की रात आर्थिक तंगी के कारण झारखण्ड के गुमला ज़िले में मुरगू करंज टोली के 45 वर्षीय किसान फौदा उरांव व 40 वर्षीय पीपुड़ही देवी द्वारा कीटनाशक खाकर ख़ुदकुशी की भयानक घटना ने एक बार फिर से राज्य के संवेदनशील लोगों को हिला कर रख दिया। शुक्रवार की सुबह देर तक फौंदा के घर का दरवाजा नहीं खुलने पर ग्रामीणों ने आवाज लगाई परन्तु अंदर से किसी की आवाज नहीं आने पर पड़ोसी दरवाजा तोड़कर अंदर गए तो वहां का नजारा देख कर दंग रह गए। मिया-बीवी की लाश खाट पर पड़ी थी। सबूत के तौर पर घर के अंदर चारों तरफ उनके द्वारा की हुई उल्टीयां बदबू कर रही थी।

ग्रामीणों की माने तो फौदा उरांव की गाँव में लगभग एक एकड़ से अधिक खेती योग्य जमीन है। आर्थिक तंगी के कारण वह खेती कर पाने में असमर्थ था और जिसके कारण पिछले तीन माह से वह अत्यंत चिंतित था। बरसात के इस खेती-बाड़ी के मौसम में यदि कोई किसान खेती नहीं कर पा रहा हो तो निश्चित ही आत्महत्या को मजबूर होगा, यही हुआ भी। यह तो त्रासदी है झारखण्ड में खेती की। यह यहाँ के संकट में जी रहे ग़रीब किसानों और मज़दूरों की दर्दनाक हालत को दिखाने वाली एक परिघटना है। और यहाँ की रघुवर सरकार नगाड़ा बजाने के सिवा कुछ नहीं करती है।  विडंबना देखिये कि यहाँ की रघुवर सरकार ने किसानों और खेत मज़दूरों की ख़ुदकुशियों के संबंध में अबतक कोई नया सर्वेक्षण नहीं करवाया है और ना ही इनका रिकार्ड रखने के लिए कोई तंत्र क़ायम किया है, जबकि इस समय के दौरान कृषि संकट और गहरा होने के कारण ख़ुदकुशियों की गिनती में वृद्धि होती है।

यह परिघटना रघुवर दास के उन वायदों को झूठा करार देती है जिसमें  उन्होंने कहा था कि, ‘किसान अन्नदाता है और उनके जीवन में खुशहाली लाना हमारा लक्ष्य है’। उन्होंने यह भी कहा था कि झारखंड सरकार इस लक्ष्य को पाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके लिए गांव-गांव तक अच्छी सड़क, सिंचाई और बेहतर बिजली सुविधा पहुंचाने का काम कर रही है।  रघुवर दास ने यह भी कहा था कि किसानों की समस्या का त्वरित समाधान करने की दिशा में उन्होंने मुख्यमंत्री किसान राहत कोषांग का गठन किया है। यदि किसी किसान को कोई भी समस्या होगी तो यहां फोन कर अपनी समस्या बतायेंगे। हर हाल में किसान की हर प्रकार की समस्या का हरण किया जाएगा और यह कोषांग 24 घंटे कार्य करेगा। इस घटना के बाद किसान राहत हेल्पलाइन फोन नंबर 0651-2490542 तथा 7632996429 बेईमानी सी लगती है और यह भी प्रतीत होता है कि उनके द्वारा इन्हें पांचवी स्तंभ कह संबोधित करना केवल दिखावे के अतिरिक्त और कुछ नहीं।

किसानों और खेत मज़दूरों की ख़ुदकुशी की घटनाएँ आज झारखण्ड में एक गम्भीर समस्या का रूप लेती जा रही हैं। लेकिन इसका स्थायी हल एक ही है, और वह है पैदावार के साधनों के निजी मालिकाने को ख़त्म करके इसको समाज की सांझी मिल्कियत बनाना, जिससे पैदावार मुनाफे़ के लिए ना हो बल्कि समाज की ज़रूरतों की पूर्ति‍ के लिए हो।

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