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भाजपा के विधायक ने ऐसा क्या किया जिससे शर्मसार हुआ पूरा झारखण्ड?

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किसी ने ओशो से पूछा, “राजनैतिक लुच्चों-लफंगों से देश को छुटकारा कब मिलेगा?”

ओशो ने जवाब दिया, “बहुत कठिन है, क्योंकि प्रश्न राजनेताओं से छुटकारे का नही है, प्रश्न तो तुम्हारे अज्ञान के मिटने का है! तुम जब तक अज्ञानी हो, कोई न कोई तुम्हारा शोषण करता रहेगा। बेहतर होगा कि यह पूछो कि, मैं कब इतना जाग सकूँगा कि, झूठ को झूठ की तरह पहचान सकूँ।

झारखंड के गिरिडीह ज़िले में कथित तौर पर भूख से महिला की मौत के बाद चतरा ज़िले से भी एक और महिला की मौत का मामला सामने आया है। कहा जा रहा है कि उस महिला की मौत की वजह भी भूख ही है।

राज्य की एक दैनिक की रिपोर्ट के मुताबिक 4 मई 2018 की रात लगभग 9 बजे 45 वर्षीय महिला मीना मुसहर की मौत हो गई। मृतिका चतरा के इटखोरी ब्लॉक प्रेमनगर मोहल्ले के आसपास रहती थीं और बेटे साथ कचरा बीनने का काम करती थी। राज्य में सरकार की चरमराई व्यवस्था के कारण लगभग तीन-चार दिनों से उनकी कोई कमाई नहीं हुई थी। जब तबीयत बिगड़ी तो इलाज कराने या दवा खरीदने के भी पैसे उनके पास नहीं थे।

महिला के बेटे गौतम मुसहर ने बातचीत में बताया कि वह महिला पिछले चार दिनों से अन्न का एक दाना भी नहीं खाया था। मृतक के लिए एम्बुलेंस तक का भी व्यवस्था नहीं हो पाया बेटा ने दाना माझी की तरह ही शव को अपने कंधे पर लेकर अस्पताल पंहुचा लेकिन यहाँ बेइंतज़ामी का आलम ये था कि उसे कंधे पर शव लिए देर तक भटकना पड़ा। बाद में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 

इस मौत के बाद भी रघुवर दास के प्रशासनिक तंत्र रघुकुल रीति को निभाते हुए मामले की लीपापोती में जुट गया है। जाँच के पूर्व ही अंचलाधिकारी दिलीप कुमार जैसे लोग इसे बीमारी से हुई मौत बता रहें है तो कोई कुछ और कह रहा |

महज चंद दिनों पहले झारखंड ही वो जगह थी जिसके गिरिडीह ज़िले के मंगरगड्डी गांव की रहने वाली सावित्री देवी (58 वर्ष) की मौत भी कथित तौर पर भूख से हुई थी । फेहरिस्त में तो और भी है जैसे सिमडेगा जिला क्षेत्र के करीमती गांव में सितंबर, 2017 में 11 वर्षीय संतोषी की मौत भात-भात करते हो गयी थी।

बहरहाल, कायदे से देखा जाय तो झारखण्ड प्रदेश के मुखिया रघुवर दास के साथ-साथ उसके मंत्रियों एवं विधायकों को मीडिया के सामने आकर अपनी विफलता के लिए जनता से माफ़ी मांगनी चाहिए और अपने तंत्र का निष्पक्ष जाँच करा सम्बंधित दोषियों को सजा दिलवानी चाहिए। होना तो ये चाहिए था कि वे जनता को इस विषम परिस्थिति में ढाडस बंधाते हुए तंत्र की बेहतरी के लिए कमिटी गठित करते पर ये कहना पड़ता है कि इसके वजाय इनके विधायक, इनके मेयर, इनके डिप्टी मायेर आदि एक साथ जश्न मनाते पकडे जाते हैं। जी हाँ ये विल्कुल सच है…

गिरिडीह के बेलाइसेंसी! जायका रेस्टोरेंट में वहाँ के एसडीएम विजया जाधव ने गुरुवार की रात छापेमारी की तो होटल में गिरिडीह के भाजपा विधायक निर्भय शाहाबादी, भाजपा के ही मेयर सुनील पासवान और  डिप्टी मेयर प्रकाश सेठ 17 वार्ड पार्षदों के साथ जश्न मना रहे थे। कथित तौर पर पता चला कि छापा के दौरान रेस्टोरेंट में अफरा-तफरी मच गई इसका फ़ायदा उठाकर विधायकजी व डिप्टी मेयर रेस्टोरेंट से किनारा लेने लगे परन्तु एसडीएम की नजर उनपर गयी और आवाज़ लगाकर उन्हें रोक लिया। कई पार्षद तो अपनी बाइक को वहीँ छोड़कर भाग निकले। वहां बगैर लाइसेंस के अवैध शराब की बिक्री होने के कारण रेस्टोरेंट को तत्काल सील कर दिया गया।

पूछ-ताछ के दौरान विधायक जी ने कहा कि वे वहां मीटिंग कर रहे थे जबकि एसडीएम ने अपने बयान में कहा कि जिस टेबल पर ये लोग मीटिंग कर रहे थे, उस पर महंगी शराब की बोतलें मिली हैं।

मसलन, उपरोक्त घटनाक्रम को देख ये समझा जा सकता है इस सरकार ने पूरे राज्य की कार्यप्रणाली को मज़ाक समझ लिया है? प्रदेश तो सच में राम के भरोसे ही चल रही है। इनके मंत्री-विधयक तो सिर्फ अय्यासी में ही डूबे रहते हैं ऐसे में सवाल ये उठता है कि अब और कितनी लाशें चाहिए रघुवार सरकार को कुम्भकर्णी नींद से जागने के लिए? ओशो के उत्तर के अनुसार लगता है अब वक़्त आ गया है जनता को जागने का। जितना जल्दी हो अब जनता को जाग जाना चाहिए नहीं तो आपका भी हाल जल्द ही संतोषी, सावित्री देवी, मीना मुसहर, आदियों की तरह होने वाला है।

इस बार भी आगे आप को ही विचार करना है…

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