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तूतीकोरिन में 11 लोगों की पुलिसिया हत्‍या !

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नीरव पाण्डेय

देश के जिस भी राज्य में अपार खनिज संपदा है वहाँ तूतीकोरिन मौजूद है। स्टारलाइट जैसी न जाने कितने अपराध कथाओं से देश पटा पड़ा है। वेदांता कंपनी की स्टारलाइट कॉपर यूनिट के खिलाफ तमिलनाडु के तूतीकोरिन में हो रहे प्रदर्शन के दौरान कल 11 लोगों की मौत हो गयी।  इस घटना को लेकर राष्ट्रीय मीडिया में एक अजीब सी चुप्पी देखी जा रही है, क्योंकि जब इस पूरी कहानी के सिरे खुलनें शुरू होंगे तो सबसे पहले बड़े और नामचीन लोगों के चेहरे बेनक़ाब होंगे और मीडिया ठहरी कॉरपोरेट की गुलाम विज्ञापन नहीं मिलने से इनकी दुकान नहीं बंद हो जाएगी!

हिन्दुस्तान में आपने अडानी-अम्बानी का बहुत नाम सुना होगा लेकिन जितने बड़े ये ग्रुप हैं लगभग उतनी ही बड़ी कम्पनी है वेदांता रिसोर्सेज जिसके मालिक हैं अनिल अग्रवाल।  वेदांता मूल रूप से विदेशी कंपनी है और कर्ज के मामले में अनिल अग्रवाल की यह कंपनी ‘वेदांता समूह’ भारत मे दूसरे स्थान पर है। वेदांता पर 1.03 लाख करोड़ का कर्ज है।

वेदांता रिसोर्सेज़ का विभिन्न देशों में बड़े पैमाने पर कानून और पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन करने के मामले में एक अलग ही पहचान है। आर्मेनिया के सोने की खदानों में,  जाम्बिया की तांबे की खदानों में इस कम्पनी ने अंतराष्ट्रीय पर्यावरण नीतियों का जमकर उल्लंघन किया है। खनिजों के खनन से लेकर धातु उत्पादन तक में, वेदांता रिसोर्सेज का कारोबारी मॉडल, धातु व खनन परितंत्र को पूरी तरह एकीकृत कर मुनाफे कमाने वाली उद्योग है। इस कंपनी ने भारत की हर छोटे बड़े राजनीतिक दलों को अच्छी तरह से साध रखा है। तभी तो अटल बिहारी वाजपेयी की NDA सरकार नें मुनाफे में चल रही छत्तीसगढ़ की बाल्को संयंत्र बेहद सस्ते दाम में वेदांता को बेच दी।

अनिल अग्रवाल ने जब 2001 में बाल्को कारखाना खरीदने के साथ ही वहाँ की सैकड़ों एकड़ सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया और हजारों पेड़ कटवा दिये। बाल्को के कामगारों के साथ वेदांता ने जितने भी करार किये थे प्रायः उनमें से किसी एक का भी पालन नहीं किया। छत्तीसगढ़, कोरबा में गिरी जानलेवा चिमनी-कांड शायद अब किसी को याद नहीं होगा फिर भी जानकारी के लिए बता दूं कि 2009 में हुई इस दुर्घटना में आधिकारिक रूप से 41 मजदूरों की जानें गयी थी। इसे बाल्को हादसा कह कर बुलाया जाता रहा पर हकीकत में यह स्टारलाइट का ही एक उपक्रम था।

तूतीकोरिन में 20 हजार लोगों की भीड़ आखिर किस बात का विरोध कर रही थी

भारत में वेदांता ने आज से बीस साल पहले तमिलनाडु के तूतीकोरिन में पर्यावरण सुरक्षा कानूनों को धत्ता बताते हुए भारत में पहले ताँबे के विशाल स्मेल्टर का निर्माण किया। धातु गलाने वाले इस संयंत्र से 23 मार्च 2013 के दिन सल्फर डाई ऑक्साइड का कथित रूप से रिसाव हुआ जिससे बड़ी संख्या में तूतीकोरिन के निवासी प्रभावित हुए। तब वहां के तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने इसे बंद करने का आदेश दिया था। इसके बाद यह कंपनी एनजीटी में चली गई।

उच्चतम न्यायालय ने स्टारलाइट इंडस्ट्रीज़ को तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित तांबा गलाने के संयंत्र में पर्यावरण कानूनों की अनदेखी करने का दोषी पाया और उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए 100 करोड़ का जुर्माना लगाया लेकिन साथ ही साल 2010 के मद्रास उच्च न्यायालय के तूतीकोरिन कंपनी के संयंत्र को बंद करने के आदेश को रद्द कर दिया। मामला एनजीटी के पास चल ही रहा था।

मोदीजी के राज में एनजीटी से कारखाने को वापस खोलने के आदेश प्राप्त होने के बाद स्टारलाइट तूतीकोरिन में इस कारखाने का और अधिक विस्तार देने  की योजना बना रही थी। इसी के विरोध में संयंत्र और कलेक्ट्रेट की घेराव करने के लिए तकरीबन 20 हज़ार लोगों ने जुलूस निकाली। मांग थी कि तांबा संयंत्र को स्थायी रूप से बंद किया जाए। इसी दौरान हिंसा हुई ओर 11 लोग प्रशासन की कार्यवाही में जान से हाथ धो बैठे।

जैसा कि इस प्लांट पर शुरूआत से ही लगातार पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने के आरोप लगते रहे हैं। सिर्फ तूतीकोरिन ही क्यो वेदांता के जितने भी प्रोजेक्ट हैं चाहे वह राजस्थान की खदानें हो या उड़ीसा में बॉक्साइट की खदाने हों या फिर आप छत्तीसगढ़ की ही बात कर लें,  हर जगह वेदांता रिसोर्सेज ने पर्यावरण नियमों का घोर उल्लंघन किया है। पूरे मामले को देखते हुए यह प्रतीत होता है कि यह कंपनी सिर्फ फ़ायदे कमाने वाली कंपनी है। ऐसे में यदि इस कंपनी का तूतीकोरिन में और विस्तार हो जाता है तो वह निःसंदेह अत्याधिक मात्रा में  प्रदूषण का उत्सर्जन करेगी जिससे वहां की जान माल का जीना दूभर हो जायेगा।

राजनीतिक दलों को चन्दा देने में भी इस कंपनी का नाम जुड़ा है। पिछले महीने जो एफसीआरए में परिवर्तन कर भूतलक्षी प्रभाव से पार्टियों को चन्दा देने वालो के नाम छुपाए गए हैं उसमें भी अदालत ने 2014 में पाया कि भाजपा ने ब्रिटेन स्थित वेदांता रिसोर्सेज कंपनी से चंदा लेकर इस अधिनियम का उल्लंघन किया था।

वेदांता रिसोर्सेज का यह मामला बताता है कि भारत जैसे देश में ऐसी कंपनियां पर्यावरण ओर लोगों की जान से कितनी आसानी से खेल सकती है।

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